US Nepal Relations: अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक समीर पॉल कपूर सोमवार को नेपाल की महत्वपूर्ण यात्रा पर पहुंच रहे हैं। यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार कोई अमेरिकी अधिकारी केवल नेपाल के लिए अलग से दौरा कर रहा है। इससे पहले अमेरिका के अधिकारी जब भी नेपाल आते थे, उनका दौरा आमतौर पर भारत, श्रीलंका या बांग्लादेश जैसे अन्य देशों के साथ जोड़ा जाता था। इस बार कपूर सीधे काठमांडू पहुंचेंगे, जो इस यात्रा के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
समीर पॉल कपूर अमेरिका के विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक सचिव हैं। उनका यह दौरा खासतौर पर बालेन शाह के नेतृत्व में बनी नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है। (US Nepal Relations) वे नेपाल में तीन दिनों तक रहेंगे और नई सरकार बनने के बाद यह उनका पहला उच्चस्तरीय संपर्क होगा। काठमांडू स्थित अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा नेपाल की नई सरकार को बधाई देने और उसकी प्राथमिकताओं को समझने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, अमेरिका यह भी स्पष्ट करेगा कि वह नेपाल के साथ भविष्य में किस प्रकार के सहयोग और साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहता है। (US Nepal Relations) इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल और नेपाल-अमेरिका चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा। इसके अलावा, काठमांडू के ऐतिहासिक पाटन दरबार स्क्वायर का दौरा भी कार्यक्रम में शामिल है।
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पिछले वर्ष डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कपूर को दक्षिण एशियाई मामलों के लिए नियुक्त किया था। इससे पहले वे क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बांग्लादेश का भी दौरा किया था, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा नेपाल के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। (US Nepal Relations) अमेरिका दक्षिण एशिया में अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कपूर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि “कर्ज आधारित प्रभाव रणनीतियां” छोटे देशों के लिए जोखिम भरी हो सकती हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से चीन की नीतियों की ओर इशारा माना जाता है। (US Nepal Relations) नेपाल ने अब तक चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत कर्ज लेने में सावधानी बरती है। ऐसे में अमेरिका इस देश के साथ संतुलित और दीर्घकालिक साझेदारी बनाना चाहता है।
