India-Israel Pact: दुनिया की राजनीति में जब दो मजबूत देश एक साथ खड़े होते हैं, तो उसका असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुश्मनों के खेमे तक साफ दिखाई देता है। वहीं यहां भारत और इजरायल की दोस्ती अब केवल औपचारिक रिश्तों या व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं रही है। (India-Israel Pact) बल्कि, दोनों देशों ने मिलकर अब आतंकवाद के खिलाफ एक ऐसा सख्त प्लान तैयार कर लिया है, जिसका मकसद उन नेटवर्कों को खत्म करना है जो सरहद पार बैठकर मासूमों की जान लेने की साजिश रचते हैं।
हाल ही में आई एक ग्लोबल रिपोर्ट ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है कि भारत और इजरायल अब सीधे तौर पर उन आतंकी ढांचों को निशाने पर ले रहे हैं, जो लंबे समय से दोनों देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
India-Israel Pact: एक जैसी चुनौती, एक जैसी रणनीति
रिपोर्ट के मुताबिक आज भारत और इजरायल दोनों ही एक जैसे सुरक्षा संकट से जूझ रहे हैं। (India-Israel Pact) दुश्मन खुले मैदान में नहीं लड़ते, बल्कि नागरिकों को ढाल बनाते हैं, सीमा पार से हमले करते हैं और डर का माहौल बनाकर अपनी रणनीति को अंजाम देते हैं।
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ऐसे हालात में दोनों देशों ने अपने जवाब देने के तरीके को भी लगभग एक जैसा बनाया है। (India-Israel Pact) सर्जिकल स्ट्राइक जैसे सटीक ऑपरेशन, अपनी प्रतिरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करना और हर संभव कोशिश के साथ नागरिकों के नुकसान को कम रखना, ये सभी कदम अब उनकी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
अचानक नहीं हुआ था पहलगाम अटैक
अमेरिका स्थित जर्नल ‘द एल्गेमाइनर’ में लिखते हुए भारतीय-जर्मन अंतर-सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक सलाहकार पौशाली लास ने इस पूरे मुद्दे को गहराई से समझाया है। (India-Israel Pact) उन्होंने इजरायल में मनाए गए मेमोरियल डे और स्वतंत्रता दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती की कीमत युद्ध के मैदान से लेकर आम जिंदगी तक चुकानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने भी एक साल पहले पहलगाम में यही सच्चाई देखी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी भारतीय सीमा में घुस आए और महिलाओं व बच्चों के सामने 26 बेगुनाह लोगों की हत्या कर दी। (India-Israel Pact) यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि नागरिकों को निशाना बनाकर डर और अविश्वास फैलाने की सोची-समझी साजिश थी।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई सही
पौशाली लास के मुताबिक भारत ने इस हमले के बाद जो कदम उठाया, वह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने सिंधु जल संधि के कई अहम प्रावधानों को निलंबित कर दिया।
पहले भारत पाकिस्तान को नदी के प्रवाह और जल स्तर से जुड़ा हाइड्रोलॉजिकल डेटा देता था, जो उसकी कृषि व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी था। लेकिन पहलगाम हमले के बाद यह सहयोग रोक दिया गया। (India-Israel Pact) लास ने कहा कि यह कदम वियना संधि कानून सम्मेलन के अनुच्छेद 62 के अनुरूप है, जो परिस्थितियों में बड़े बदलाव और भरोसा खत्म होने पर संधि को निलंबित करने की अनुमति देता है।
इजरायल और भारत का एक जैसा रुख
वहीं लास ने यह भी बताया कि भारत और इजरायल दोनों एक जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं और उसी तरह जवाब भी दे रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों को मिलने वाली प्रतिक्रिया अलग है। इजरायल को फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ता है, जबकि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को उतनी आलोचना नहीं झेलनी पड़ती।
सूचना युद्ध में भारत की बढ़त
वहीं इस पूरे संघर्ष में केवल हथियार ही नहीं, बल्कि सूचना भी एक बड़ा हथियार बन चुकी है। लास ने कहा कि भारत ने सूचना युद्ध के मोर्चे पर बेहद प्रभावी रणनीति अपनाई है। (India-Israel Pact) ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भारत ने सनसनीखेज तरीके से पेश करने के बजाय उसे एक रणनीतिक उपलब्धि के रूप में सामने रखा।
इसके साथ ही पाकिस्तान आधारित दुष्प्रचार नेटवर्क को उजागर किया गया और फेक न्यूज से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता को बढ़ाया गया। लास का मानना है कि यही वह क्षेत्र है, जहां इजरायल को अभी और काम करने की जरूरत है, क्योंकि केवल मजबूत खुफिया तंत्र और आधुनिक रक्षा तकनीक ही काफी नहीं है, जब तक उसके साथ साफ और प्रभावी संवाद न हो।
आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का संदेश
वहीं अंत में लास ने साफ कहा कि भारत और इजरायल दोनों यह समझते हैं कि आतंकवाद से अकेले नहीं लड़ा जा सकता। इसके लिए यूरोप और अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ मजबूत खुफिया साझेदारी जरूरी है।
जमीनी कार्रवाई और सूचना युद्ध दोनों मोर्चों पर एकजुट रणनीति बनाकर ही आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है। यही वह दिशा है, जिसमें अब भारत और इजरायल तेजी से आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।
