India Slams Trump Tariff: अमेरिका की ओर से मिल रही आर्थिक चेतावनियों और कड़े प्रतिबंधों की धमकियों के बीच भारत ने अपना स्टैंड पूरी तरह साफ कर दिया है। रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने के लिए अमेरिकी संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस बिल को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किया जा रहा है, जहां इस पर जल्द ही वोटिंग होने की उम्मीद है। (India Slams Trump Tariff) यदि यह कानून पास हो जाता है, तो भारत पर इसका सीधा वित्तीय असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका के इस कड़े पैंतरे के बावजूद भारत ने दुनिया के सामने दो टूक कह दिया है कि वह किसी भी देश के दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल की खरीद लगातार जारी रखेगा।
India Slams Trump Tariff: 140 करोड़ नागरिकों का हित सर्वोपरि
अमेरिकी टैरिफ बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े तमाम बड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को केंद्र में रखकर ही करता है। (India Slams Trump Tariff) उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां भले ही बदलें, लेकिन भारत अपनी बुनियादी नीतियों और आर्थिक प्राथमिकताओं पर कायम रहेगा। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों का भी कहना है कि वाशिंगटन की इस नई रणनीति पर बारीक नजर रखी जा रही है, लेकिन भारत रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत व्यापारिक संबंधों से पीछे हटने वाला नहीं है।
क्या है लिंडसे ग्राहम बिल और 100% टैरिफ का गणित?
अमेरिका में इस विवादित विधेयक को ‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ का नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेट ने इसे 86-11 के प्रचंड बहुमत से पहले ही पास कर दिया है। (India Slams Trump Tariff) इस बिल का सीधा मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, क्योंकि वाशिंगटन का मानना है कि तेल की बिक्री से होने वाली कमाई से रूस यूक्रेन युद्ध का खर्च उठा रहा है। (India Slams Trump Tariff) इस कानून में प्रावधान है कि रूस से सबसे ज्यादा मात्रा में तेल आयात करने वाले शीर्ष देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क (टैरिफ) ठोक सकते हैं। इसका सीधा और सबसे बड़ा असर भारत तथा चीन जैसे विशाल तेल आयातक देशों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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बिल में भारत का नाम सीधे शामिल करने की उठी मांग
हालिया घटनाक्रम में मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कुछ अमेरिकी सांसदों ने बिल में नए संशोधनों की सिफारिश कर दी। पहले बिल में केवल ‘रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देश’ लिखा गया था, लेकिन अब सांसदों ने मांग की है कि इसमें भारत का नाम अलग से और स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। (India Slams Trump Tariff) यही नहीं, दायरा बढ़ाकर इसमें भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर सहित 10 देशों को शामिल करने और उन पर सीधा 100 फीसदी टैरिफ लगाने की वकालत की गई है।
पुरानी धमकियों का भी भारत ने दिया है करारा जवाब
यह कोई पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की हो। इससे पहले भी अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल के व्यापार को लेकर भारत पर आरोप लगाए थे और पिछले साल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने जैसा कड़ा कदम उठाया था। (India Slams Trump Tariff) उस वक्त भी भारत ने अपने निर्भीक रुख से दुनिया को संदेश दिया था कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना उसकी पहली जिम्मेदारी है। भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक महाशक्तियों के प्रतिबंधों और आर्थिक धमकियों के आगे वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों से रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा।
