India Iran Civilisational Ties: नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भारत और ईरान के संबंधों को सदियों पुराना और ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने जब से कमान संभाला है, दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बेहतर हो रहे हैं। हालांकि, आइए बिना देर किए यहां जानते हैं कि आखिर कैसे भारत-ईरान का संबंध हजारों साल पुराना है। इसके लिए हम आपको ले चलते एक ऐतिहासिक सैर पर…
India Iran Civilisational Ties: सिंधु घाटी सभ्यता के समय से संपर्क
भारत और ईरान के बीच संपर्क का इतिहास प्राचीन काल तक जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के ईरान और मेसोपोटामिया के क्षेत्रों से व्यापारिक संपर्क थे। समुद्री और जमीनी रास्तों के जरिए सामान और सांस्कृतिक प्रभाव एक-दूसरे तक पहुंचते थे।
दोनों की भाषाओं और संस्कृतियों की पुरानी कड़ी
भारतीय और ईरानी सभ्यताओं के बीच भाषाई और सांस्कृतिक समानताएं भी बहुत पुरानी हैं। प्राचीन समय में इंडो-ईरानी भाषाई समुदायों के बीच संबंध रहे थे।
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प्राचीन ईरानी साम्राज्य का भारत से संपर्क
प्राचीन काल में ईरानी साम्राज्यों का भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से संपर्क रहा। आकेमेनिड यानी हखामनी साम्राज्य के दौर में ईरानी शासकों का सिंधु क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण भी रहा। इसे भारत और ईरान के बीच राजनीतिक संपर्क के तौर पर देखा जाता है।
व्यापार ने रिश्तों को लगातार मजबूत किया
भारत और फारस के बीच सदियों से व्यापार होता रहा। समुद्री रास्तों से अरब सागर और फारस की खाड़ी के जरिए दोनों क्षेत्रों के व्यापारी एक-दूसरे के यहां पहुंचते थे। जमीन के रास्ते भी व्यापारिक कारवां चलते थे। भारत से कपड़े, मसाले, चीनी, कीमती पत्थर और दूसरी चीजें फारस जाती थीं, जबकि भारत में फारस से घोड़े और अन्य सामान आते थे।
फारसी भाषा का भारत पर गहरा प्रभाव
मध्यकाल में भारत और फारस के संबंध और गहरे हुए। 13वीं से 18वीं शताब्दी के बीच ईरान से बड़ी संख्या में प्रशासक, सैनिक, विद्वान, कवि, कलाकार और कारीगर भारत आए। फारसी भाषा ने भारतीय दरबारों और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुगल काल में भी मजबूत रहे रिश्ते
मुगल काल में भारत और फारस के बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क काफी मजबूत रहे। भारतीय शासकों और फारसी शासकों के बीच राजनयिक संपर्क और लेटर का आना-जाना होता था। दोनों क्षेत्रों के विद्वानों, कलाकारों और व्यापारियों का आना-जाना भी जारी रहा।
पारसी समुदाय भी इसी ऐतिहासिक कड़ी का हिस्सा
ईरान से आए पारसी समुदाय ने भारत में अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई। इस समुदाय के लोग सदियों पहले ईरान से भारत आए और यहां बस गए। हालांकि उनके भारत आने की सटीक तारीख को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग राय हैं।
सिर्फ ईरान से भारत ही नहीं, भारत का प्रभाव भी ईरान तक
यह रिश्ता एकतरफा नहीं था। भारत की कई चीजों का प्रभाव ईरान तक पहुंचा। उदाहरण के तौर पर भारतीय पंचतंत्र की कहानियां और शतरंज के भारत से ईरान पहुंचने के ऐतिहासिक प्रमाणों का उल्लेख मिलता है। भारतीय खगोल विज्ञान का भी सासानी ईरान पर प्रभाव पड़ा था।
आधुनिक दौर में भी जारी रहा रिश्ता
आधुनिक समय में भी भारत और ईरान के संबंध बने रहे। दोनों देशों ने 15 मार्च 1950 को दोस्ती की संधि पर हस्ताक्षर किए। बाद के दशकों में व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाया गया।
