Saudi Arabia Uranium: सऊदी अरब ने खनिज संसाधनों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। देश में करीब 110 मिलियन टन ऐसे कच्चे खनिज संसाधनों का पता चला है, जिनमें यूरेनियम के साथ-साथ दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ मिनरल्स की भी अच्छी मात्रा मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने यह जानकारी दी है। यह खोज मदीना में जाबल सईद परियोजना से जुड़ी बताई गई है।
सऊदी अरब में यूरेनियम संसाधनों का यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब मध्य पूर्व में तनाव काफी गंभीर है। सऊदी अरब एक प्रमुख सुन्नी शक्ति है, जबकि ईरान को क्षेत्र की प्रमुख शिया शक्ति माना जाता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से टेंशन का माहौल रहा है। सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी हैं और इसी वजह से ईरान के साथ उसके संबंधों में सुरक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है। वहीं, यमन में सक्रिय हूती समूह की गतिविधियों ने सऊदी अरब के लाल सागर तक समुद्री पहुंच को भी प्रभावित किया है।
Saudi Arabia Uranium: मदीना में हुई खनिजों की खोज
सऊदी ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, मदीना में जाबल सईद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों से करीब 110 मिलियन टन अयस्क के संसाधनों का अनुमान सामने आया है। इसमें खास तौर पर भारी तत्वों वाले रेयर अर्थ मिनरल्स की मात्रा ज्यादा बताई गई है। इसके साथ ही यूरेनियम की भी संभावित रूप से अच्छी मात्रा मौजूद होने की बात कही गई है।
यह खोज ऐसे समय में सामने आई है, जब सऊदी अरब अपने तेल और गैस पर निर्भरता को कम करने के लिए ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में नए विकल्प तलाश रहा है। देश अपनी Vision 2030 योजना के तहत अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है।
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सऊदी अरब के लिए क्यों अहम है यूरेनियम?
प्राकृतिक अयस्क में यूरेनियम की मौजूदगी सऊदी अरब के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश पहले से ही घरेलू यूरेनियम संसाधनों के इस्तेमाल और नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली उत्पादन जैसे शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
यूरेनियम की यह खोज अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौते के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने जुलाई में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में मदद करने की भूमिका मिलनी है।
अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील से क्या कनेक्शन?
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुआ समझौता एक लंबे समय की और अरबों डॉलर की साझेदारी की नींव के तौर पर पेश किया गया था। इस समझौते के तहत सऊदी अरब अपने यहां नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित कर सकेगा।
इस समझौते की एक अहम बात यह भी बताई गई है कि सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन यानी यूरेनियम एनरिचमेंट का विकल्प मिलेगा और इसके लिए अमेरिकी निगरानी की शर्त नहीं होगी। ऐसे में मदीना के पास यूरेनियम वाले खनिज संसाधनों की खोज सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिहाज से खास महत्व रखती है।
