Pakistan Suicide Bombing Row: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में रविवार 2 अगस्त 2026 को एक अत्यंत भीषण और भयानक सुसाइड अटैक हुआ। स्वात घाटी के काबल कस्बे में एक पुलिस स्टेशन के ठीक पास मुख्य चौराहे (काबल चौक) पर यह आत्मघाती धमाका अंजाम दिया गया। (Pakistan Suicide Bombing Row) उस समय वहां भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और पुलिसकर्मी आतंकवाद के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। लोग उग्रवाद विरोधी नारे लगा रहे थे और इलाके में अमन-चैन स्थापित करने की मांग कर रहे थे। उसी दौरान फिदायीन हमलावर ने भीड़ को निशाना बना लिया।
तलाशी के दौरान रोका तो खुद को उड़ाया, 22 से अधिक घायल
स्वाति क्षेत्र के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) फिदा हुसैन और जिला पुलिस प्रमुख उमर खान के मुताबिक, हमलावर पुलिस स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार में जबरन घुसने का प्रयास कर रहा था। (Pakistan Suicide Bombing Row) वहां ड्यूटी पर तैनात मुस्तैद जवानों ने उसे रोका और चेकिंग शुरू की। खुद को घिरता देख आत्मघाती हमलावर ने मुख्य द्वार के पास ही अपने शरीर में बंधे शक्तिशाली विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। इस भीषण धमाके में 8 पुलिसकर्मियों सहित 13 निर्दोष लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में अस्पताल में एक और शव मिला, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 14 हो गई। इसके अलावा 22 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
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इलाके में आपातकाल, राहत और बचाव कार्य जारी
प्रांतीय आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि आसपास का पूरा इलाका दहल उठा। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव टीमों को मौके पर भेजा गया। (Pakistan Suicide Bombing Row) घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां कई लोगों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। सुरक्षा बलों ने पूरे काबल चौक को सील कर दिया है और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से सबूत जुटाए जा रहे हैं।
TTP का बढ़ता खौफ और जारी हिंसा
खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के उग्रवादी लगातार हमलों को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि इस विशेष फिदायीन हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने तुरंत नहीं ली है, लेकिन प्रांतीय राजधानी पेशावर में हुए एक अन्य बम धमाके की जिम्मेदारी टीटीपी ने ली है, जिसमें 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। (Pakistan Suicide Bombing Row) सैन्य आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक उग्रवादी हमलों और सैन्य अभियानों में 819 सुरक्षाकर्मी और नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।
