India-US trade deal update: वैश्विक व्यापार की बिसात पर आज एक बहुत बड़ी चाल चली जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए आज यानी 20 अप्रैल से वॉशिंगटन में बातचीत का नया दौर शुरू हो रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी अदालतों के फैसलों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापार नीतियों ने पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है। (India-US trade deal update) भारतीय प्रतिनिधिमंडल, जिसकी कमान मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन संभाल रहे हैं, तीन दिनों तक अमेरिकी अधिकारियों के साथ पसीना बहाएगा ताकि भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और चौड़े किए जा सकें।
India-US trade deal update: टैरिफ की जंग और अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला
इस पूरी बातचीत के केंद्र में ‘टैरिफ’ यानी आयात शुल्क है। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से अगले 150 दिनों के लिए दुनिया के सभी देशों पर 10% का एक समान टैरिफ लागू कर दिया है। (India-US trade deal update) इस फैसले ने भारत के लिए गणित थोड़ा उलझा दिया है। पहले भारत को अन्य देशों के मुकाबले जो विशेष छूट मिलती थी, वह इस एक समान व्यवस्था से कम हो गई है। अब भारतीय अधिकारी इस कोशिश में हैं कि अमेरिका के साथ होने वाली इस नई चर्चा में भारत के लिए इस 10% के टैरिफ में भी और कटौती करवाई जाए।
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पिछली डील का गणित और भारत का बड़ा दांव
अगर हम इतिहास में झांकें, तो 7 फरवरी को हुई चर्चा में भारत को बड़ी कामयाबी मिली थी। तब भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटकर महज 18% रह गया था। इसमें सबसे बड़ी राहत यह थी कि रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर लगा 25% का दंडात्मक शुल्क हटा लिया गया था। इसके बदले में भारत ने भी अपना दिल बड़ा किया था। नई दिल्ली ने अमेरिकी मेवे, फल, सोयाबीन तेल और शराब जैसे कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने का वादा किया था। इतना ही नहीं, भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से विमान, कोकिंग कोयला और टेक्नोलॉजी समेत करीब 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का इरादा भी जताया था। अब इसी पुराने फॉर्मूले को नए सिरे से तराशने की चुनौती है।
चीन का बढ़ता प्रभाव और व्यापारिक संतुलन की चुनौती
यह बातचीत तब हो रही है जब भारत के व्यापारिक आंकड़ों में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। साल 2025-26 में चीन एक बार फिर अमेरिका को पछाड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। पिछले चार सालों से अमेरिका शीर्ष पर था, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) भी घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है। भारत का निर्यात तो मामूली रूप से बढ़ा, लेकिन आयात में 16% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में भारत चाहता है कि व्यापार का यह पलड़ा फिर से भारत के पक्ष में झुके, जिसके लिए टैरिफ में रियायत मिलना बेहद जरूरी है।
धारा 301 और कूटनीति की पेचीदगियां
बातचीत की राह इतनी आसान भी नहीं है। अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत भारत के खिलाफ दो जांचें चल रही हैं। अमेरिका ने भारत की कुछ व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जिसे भारत ने पूरी तरह से आधारहीन बताया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य इन जांचों को समाप्त करवाना भी होगा ताकि व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट कम हो सके। चूंकि अभी ‘बेसिक ट्रेड एग्रीमेंट’ (BTA) पर हस्ताक्षर होना बाकी है, इसलिए भारतीय अधिकारियों के पास समझौते को अंतिम रूप देने से पहले अपनी शर्तें मनवाने का यह बेहतरीन मौका है।
