CM Yogi Ram Ayodhya Visit: रामनगरी अयोध्या इस समय देश के राजनीतिक और सांस्कृतिक नक्शे पर सबसे बड़े कौतूहल का केंद्र बन चुकी है. शुक्रवार का दिन अयोध्या के इतिहास में एक बेहद अनोखे और दोहरे घटनाक्रम के रूप में दर्ज होने जा रहा है. एक तरफ जहां प्रभु श्रीराम की इस पावन नगरी को एक नया और बेहद भव्य सांस्कृतिक आकर्षण मिलने जा रहा है, जो यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं का दिल जीत लेगा, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर के भीतर चढ़ावे, करोड़ों के सोने-चांदी के आभूषणों और गुप्त दस्तावेजों में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर विशेष जांच दल यानी SIT की जांच अब अपने सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है.
इसी भारी तनाव और सस्पेंस के बीच सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अयोध्या की धरती पर कदम रख चुके हैं. इस बार मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल विकास योजनाओं की समीक्षा और फीता काटने तक सीमित नहीं माना जा रहा है. मंदिर परिसर के भीतर चल रही इस बड़ी उथल-पुथल के बीच उनका वहां पहुंचना और बंद कमरों में होने वाली संभावित गुप्त बैठकें पूरे देश की मीडिया की नजरों में आ चुकी हैं.
CM Yogi Ram Ayodhya Visitचंपत राय की मंच से दूरी
इस पूरे हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम में जिस एक बात ने सबसे ज्यादा राजनीतिक पंडितों को चौंकाया है, वह है राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की मुख्यमंत्री के साथ मंच पर गैर-मौजूदगी. आधिकारिक तौर पर हालांकि प्रशासन और ट्रस्ट के लोगों द्वारा इसे एक सामान्य और पहले से तय कार्यक्रम व्यवस्था बताया जा रहा है, लेकिन राम मंदिर के चंदे और खजाने की जांच की पृष्ठभूमि में इस दूरी को लोग अलग ही चश्मे से देख रहे हैं. अयोध्या के गलियारों में यह सवाल बड़ी तेजी से तैर रहा है कि आखिर इतने बड़े मौके पर, जब खुद सूबे के मुखिया वहां मौजूद हैं, तब ट्रस्ट के इतने महत्वपूर्ण पदाधिकारी का सार्वजनिक मंच से दूर रहना क्या किसी बड़े सियासी बदलाव या आने वाले तूफान का संकेत है?
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पांचवें दिन भी SIT का कड़ा पहरा
राम मंदिर के खजाने और आभूषणों से जुड़ी इस जांच को चलते हुए अब 5 दिन बीत चुके हैं. एसआईटी की तेज-तर्रार टीमें अयोध्या के चप्पे-चप्पे पर अपनी नजरें गड़ाए बैठी हैं. जांच के पांचवें दिन भी यह साफ हो गया है कि एजेंसियां किसी भी रसूखदार को बख्शने के मूड में नहीं हैं. सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को एक बार फिर इस पूरे मामले के मुख्य किरदार रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को पूछताछ के कड़े दौर से गुजरना होगा.
पिछले 4 दिनों की लंबी पूछताछ में उसने जो भी बयान दिए हैं, उनका मिलान अब तक जब्त किए गए पुख्ता सरकारी और गैर-सरकारी दस्तावेजों से किया जा रहा है. जांचकर्ता बहुत बारीकी से यह देख रहे हैं कि टिन्नू के बयानों और मंदिर के रिकॉर्ड रूम से मिली फाइलों के बीच कोई अंतर या विरोधाभास तो नहीं है. अब यह जांच सिर्फ एक नाम या एक छोटी सी घटना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसकी आंच हर उस शख्स तक पहुंच रही है जिसने इस व्यवस्था को संभाला था.
हर छोटे-बड़े कर्मचारी की जवाबदेही तय
एसआईटी की इस बार की रणनीति बहुत ही अलग और अचूक दिखाई दे रही है. जांच के अधिकारी अब केवल मौखिक गवाहियों या बातों पर विश्वास नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका पूरा ध्यान दस्तावेजी सबूतों को इकट्ठा करने पर है. अब तक लगभग एक दर्जन से ज्यादा प्रमुख लोगों और कई दर्जन छोटे-बड़े कर्मचारियों से घंटों तक पूछताछ की जा चुकी है. इनमें से कई लोगों को दोबारा समन भेजकर बुलाया गया है, ताकि उनके बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा सके. जांच की मेज पर बैठे अधिकारियों का हर आने वाले व्यक्ति से सिर्फ एक ही कड़क सवाल है कि ‘मंदिर के रजिस्टर और फाइलों में जो लिखा है, वह असलियत से मेल क्यों नहीं खा रहा?’ यही वजह है कि मंदिर के सभी डिजिटल रिकॉर्ड, दान की रसीदें और अलग-अलग विभागों की गुप्त फाइलें इस समय एसआईटी के कब्जे में हैं.
आभूषणों का हिसाब बनी सबसे बड़ी पहेली
इस पूरी जांच का जो हिस्सा सबसे ज्यादा सनसनीखेज है, वह है रामलला के दरबार में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और अन्य बहुमूल्य रत्न. श्रद्धालुओं ने पिछले कई वर्षों में अटूट आस्था के साथ जो भी आभूषण चढ़ाए हैं, उनके रिकॉर्ड खंगालने का काम शुक्रवार को और तेज कर दिया गया है. एसआईटी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती और पहेली यह है कि जो रिकॉर्ड कागजों पर दर्ज हैं, और जो जेवरात वास्तव में तिजोरियों में रखे हैं, उनके बीच का तालमेल अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो सका है. सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि कितना दान आया, बल्कि सवाल यह है कि उस दान को रखने और संभालने की जिम्मेदारी किसकी थी और वर्तमान में वह संपत्तियां कहां हैं?
अब जमीन खरीद की फाइलें भी रडार पर
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस जांच का दायरा इतना बढ़ता जा रहा है कि अब इसमें जमीन के सौदों की गूंज भी सुनाई देने लगी है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने पिछले कुछ समय में मंदिर के आसपास और अन्य जगहों पर की गई जमीन खरीद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पत्रावलियों और रजिस्ट्रीयों के दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांचना शुरू कर दिया है. हालांकि, जांच टीम की तरफ से अभी तक किसी भी बड़ी गड़बड़ी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जमीन की फाइलों का खोला जाना यह साफ संकेत देता है कि एसआईटी इस पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली को जड़ से समझना चाहती है और वह किसी भी लूपहोल को छोड़ने के मूड में नहीं है.
7 करोड़ की लागत से बना भव्य वैक्स म्यूजियम
इन तमाम जांचों और छापों के बीच, अयोध्या को एक नया और अद्भुत तोहफा भी मिलने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को राम मंदिर परिक्रमा मार्ग पर तैयार किए गए एक बेहद खूबसूरत और आधुनिक वैक्स म्यूजियम का लोकार्पण करेंगे. लगभग 8 हजार वर्ग फीट के विशाल दायरे में फैले इस अनूठे म्यूजियम को करीब 7 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया है.
इस म्यूजियम की खासियत यह है कि इसमें आधुनिक तकनीक और मोम की कलाकृतियों के जरिए रामायण काल के इतिहास को जीवंत कर दिया गया है. यहां भगवान श्रीराम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और संकटमोचन हनुमान सहित रामायण के करीब 50 सबसे प्रमुख पात्रों के सजीव पुतले लगाए गए हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वे अभी बोल पड़ेंगे. लेकिन इस बेहद सुंदर उद्घाटन समारोह से ज्यादा चर्चा इस समय मुख्यमंत्री की बंद कमरे की मुलाकातों को लेकर हो रही है.
बंद कमरे की बैठकें और 15 सदस्यीय ट्रस्ट का पूरा ढांचा
अयोध्या के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में इस बात की चर्चा बहुत गर्म है कि मुख्यमंत्री इस दौरे के दौरान राम मंदिर से जुड़े कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण और शीर्ष चेहरों के साथ एक गुप्त बैठक कर सकते हैं. चूंकि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी 2020 के आदेश के बाद बने 15 सदस्यीय ‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता बहुत अधिक है.
वर्तमान में इस पूरे ट्रस्ट का कामकाज महंत नृत्यगोपाल दास (अध्यक्ष), चंपत राय (महासचिव), स्वामी गोविंददेव गिरि (कोषाध्यक्ष), नृपेंद्र मिश्र (निर्माण समिति प्रमुख), स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ (धार्मिक समिति प्रमुख), डॉ. अनिल कुमार मिश्र (प्रशासनिक कार्य प्रमुख) और गोपाल राव (प्रबंधन और पास व्यवस्था) जैसे बड़े नामों के इर्द-गिर्द घूमता है. इन सभी की अलग-अलग 5 प्रमुख समितियां (निर्माण, ऑडिट, वित्त, धार्मिक और प्रबंध समिति) कार्यों को देखती हैं. अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री की इस समीक्षा और एसआईटी के इस पांचवें दिन के चक्रव्यूह से क्या नया सच बाहर निकलकर आता है.
