US Iran Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव फिलहाल कुछ समय के लिए थमता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच संभावित युद्धविराम वार्ता की तैयारी चल रही है, मगर इस बीच एक नया मोड़ सामने आया है, जिसने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ईरान-अमेरिका विवाद में चीन की कथित भूमिका ने इस पूरे संकट को और जटिल बना दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली के हालिया दावों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। हेली के अनुसार, हाल ही में अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज में एक ईरानी जहाज को जब्त किया, जो कथित तौर पर चीन से ईरान की ओर जा रहा था। (US Iran Tensions) इस जहाज में ऐसे रासायनिक पदार्थ होने की आशंका जताई गई है, जिनका उपयोग मिसाइल निर्माण में किया जा सकता है। यह दावा सीधे तौर पर चीन की संभावित भूमिका की ओर इशारा करता है।
निक्की हेली ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन, ईरान की सरकार को मजबूत करने में सहयोग कर रहा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो अमेरिका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए विशेष सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। (US Iran Tensions) उनके अनुसार, यह एक जोखिम भरा मिशन होगा, जिसमें एक सप्ताह से लेकर दस दिन तक का समय लग सकता है। दरअसल, अमेरिकी बलों ने ‘टूस्का’ नामक ईरानी झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को जब्त किया था। समुद्री सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस जहाज में ‘ड्यूल-यूज’ उपकरण होने की आशंका है, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इस तरह के उपकरण ईरान की सैन्य क्षमता को बढ़ा सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
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दूसरी ओर, चीन ने इस कार्रवाई पर चिंता जताई है और इसे ‘जबरन रोकने’ की घटना बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि होरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति पहले से ही संवेदनशील है और इसमें शामिल सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। चीन ने यह भी अपील की है कि जलमार्ग में सामान्य आवाजाही को बहाल करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई जाएं। (US Iran Tensions) हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख कुछ अलग नजर आ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि चीन ने ईरान को हथियार न देने का आश्वासन दिया है और यह कदम वैश्विक शांति के लिए सकारात्मक है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा।
इसके बावजूद जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज में नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है और ईरान से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर सख्ती बरती जा रही है। (US Iran Tensions) विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन खुलकर या परोक्ष रूप से ईरान का समर्थन करता है, तो यह संघर्ष और भी व्यापक हो सकता है। ऐसे में यह संकट अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें बड़ी वैश्विक शक्तियों के शामिल होने की आशंका बढ़ती जा रही है। (US Iran Tensions) यही कारण है कि अमेरिका अब हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहा है और चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
