Indian Army: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त कूटनीति की बिसात पर टिकी हैं। एक तरफ जहां पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर खुद को ‘शांतिदूत’ बताते हुए ईरान के दरवाजे पर दस्तक देने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं भारत ने सेंट्रल एशिया के महत्वपूर्ण मोर्चे पर एक ऐसी चाल चली है जिसकी धमक दूर तक सुनाई दे रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट और युद्ध के तनाव के बीच, भारतीय सेना की एक जांबाज टुकड़ी उज्बेकिस्तान के नामंगन में उतर चुकी है। (Indian Army) भारत का यह कदम न केवल ऐतिहासिक दोस्ती को नई मजबूती दे रहा है, बल्कि इस रणनीतिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का भी अहसास करा रहा है।
Also Read –Lahore Attack: हाफिज सईद के ‘दोहिना हाथ’ कहे जाने वाले आतंकी को पाकिस्तान में मारी गोली, मचा कोहराम
Indian Army: उज्बेकिस्तान की धरती पर ‘डस्टलिक’ का शंखनाद
उज्बेकिस्तान के नामंगन क्षेत्र स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Dustlik) के सातवें संस्करण का भव्य आगाज हो गया है। यह युद्धाभ्यास 12 अप्रैल से शुरू होकर 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा। ऐसे समय में जब पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति की तरह इस्तेमाल करता रहा है, भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखाया है कि वह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। (Indian Army) इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अवैध सशस्त्र समूहों और उग्रवादियों को पूरी तरह निष्क्रिय करना है, जो कि आज के दौर की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
Also Read –Amit Shah Rally: जलपाईगुड़ी में TMC पर बरसे अमित शाह, कानून-व्यवस्था को लेकर साधा निशाना
- Advertisement -
पहाड़ी इलाकों में दुश्मन का ‘काम तमाम’ करने की ट्रेनिंग
उद्घाटन समारोह में उज्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल सईदोव ओयबेक अजादोविच की मौजूदगी में दोनों सेनाओं ने अपनी साझा ताकत का प्रदर्शन किया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों (semi-mountainous) में संयुक्त अभियानों को अंजाम देना है। भारतीय सैनिक अपनी फिटनेस, सटीक योजना निर्माण और विशेष हथियारों के इस्तेमाल में उज्बेक सेना के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। इसका सीधा संदेश उन ताकतों को है जो दुर्गम इलाकों का सहारा लेकर अशांति फैलाने की कोशिश करती हैं।
साझा ऑपरेशन और रणनीतिक प्रहार की तैयारी
‘डस्टलिक’ अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं केवल परेड नहीं कर रहीं, बल्कि दुश्मन के ठिकानों पर सीधे हमले (Strike Missions) और कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराने जैसे कठिन अभियानों का अभ्यास कर रही हैं। इसके लिए एक साझा संचालन प्रणाली (Unified Operational Algorithm) विकसित की जा रही है, ताकि युद्ध की स्थिति में दोनों सेनाएं एक ही भाषा और रणनीति के साथ दुश्मन पर प्रहार कर सकें। (Indian Army) भारतीय दल जहां उज्बेकिस्तान की युद्ध पद्धतियों को समझ रहा है, वहीं अपने व्यापक अनुभवों को साझा कर सेंट्रल एशिया में भारत की सामरिक बढ़त को और भी मजबूत कर रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर निर्णायक चोट
इस अभ्यास का समापन एक बेहद कठिन 48 घंटे के ‘वैलिडेशन एक्सरसाइज’ के साथ होगा, जिसमें सैनिकों की रणनीतियों का कड़ा इम्तिहान लिया जाएगा। (Indian Army) विशेषज्ञों का मानना है कि आसिम मुनीर के ईरान पहुंचने से ठीक पहले भारत का यह सैन्य प्रदर्शन पाकिस्तान और उसके समर्थकों के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव है। (Indian Army) ‘डस्टलिक’ के माध्यम से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य एशिया के अपने पुराने दोस्तों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है। यह अभ्यास भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
