Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan: आज पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। मौका है ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली उस ऐतिहासिक ‘पीस-टॉक’ का, जिससे मिडिल ईस्ट में मचे युद्ध के थमने की उम्मीद जगी है। इस शांति वार्ता के केंद्र में जो जगह सबसे ज्यादा चमक रही है, वह है इस्लामाबाद का आलीशान ‘सेरेना होटल’। लेकिन इस होटल की भव्यता के पीछे एक ऐसी कड़वी हकीकत छिपी है, जो पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करती है। विडंबना देखिए कि जिस होटल में बैठकर दुनिया के दिग्गज अमन की इबारत लिख रहे हैं, उसके मालिक ‘आगा खान’ को पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी तबका आज भी ‘मुसलमान’ मानने को तैयार नहीं है।
Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan: सेरेना होटल: शांति का वो किला जहां ठहरते हैं दुनिया के दिग्गज
पाकिस्तान के इस्लामाबाद से लेकर क्वेटा तक अपनी रईसी और खूबसूरती के लिए मशहूर ‘सेरेना होटल्स’ हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पहली पसंद रहे हैं। आज जब डोनाल्ड ट्रंप के शांति दूत और ईरान के शीर्ष अधिकारी एक मेज पर बैठे हैं, तो सेरेना की छत ही उन्हें वो सुरक्षा और सुकून दे रही है जिसकी दरकार एक वैश्विक समझौते के लिए होती है। लेकिन पाकिस्तान के कट्टरपंथी गुटों की आंखों में यह होटल और इसके मालिक आगा खान हमेशा से खटकते रहे हैं। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) यही वजह है कि आज सेरेना होटल के आस-पास सुरक्षा का ऐसा घेरा है कि वह किसी अभेद्य किले जैसा नजर आता है। कट्टरपंथियों का तर्क है कि आगा खान के ये होटल और उनके उदारवादी विचार पाकिस्तान में ‘पश्चिमी सभ्यता’ और ‘गैर-इस्लामी’ मूल्यों को बढ़ावा दे रहे हैं।
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इतिहास के पन्नों में आगा खान: पाकिस्तान के असली ‘फाउंडिंग फादर’
प्रिंस करीम आगा खान और उनके खानदान का पाकिस्तान के वजूद से बहुत गहरा और पुराना नाता है। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) लेकिन यह पाकिस्तान की बदकिस्मती है कि आज वहां के कुछ देवबंदी और वहाबी गुट इस्माइली समुदाय को ‘मुस्लिम’ मानने से ही इनकार करते हैं और उन्हें ‘काफिर’ तक कह देते हैं। हकीकत तो यह है कि जिस ‘मुस्लिम लीग’ ने पाकिस्तान बनाने की लड़ाई लड़ी, उसके पहले अध्यक्ष कोई और नहीं बल्कि आगा खान के दादा (सर आगा खान तृतीय) ही थे। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) वे मोहम्मद अली जिन्ना के सबसे करीबी साथियों में से एक थे और उन्होंने ही पाकिस्तान के निर्माण के लिए वैचारिक और आर्थिक आधार तैयार किया था। आज उन्हीं के वंशजों को अपनी धार्मिक पहचान के लिए उसी जमीन पर जंग लड़नी पड़ रही है जिसे उनके पूर्वजों ने संवारा था।
ग्वादर का वो अनमोल तोहफा जिसे पाकिस्तान भूल गया
पाकिस्तान आज जिस ‘ग्वादर पोर्ट’ को अपनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानता है और जिसके दम पर चीन के साथ मिलकर सुनहरे भविष्य के सपने देखता है, वह भी आगा खान परिवार की ही देन है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ग्वादर पहले ओमान के सुल्तान के कब्जे में था। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) उसे ओमान से खरीदने के लिए आगा खान परिवार ने ही कूटनीतिक रास्ते साफ किए थे और उस समय भारी आर्थिक मदद भी दी थी। अगर आगा खान परिवार ने तब पहल न की होती, तो आज पाकिस्तान के पास सामरिक रूप से इतना महत्वपूर्ण बंदरगाह कभी नहीं होता। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) पाकिस्तान को अस्पताल, स्कूल, यूनिवर्सिटी और पहचान देने वाला यह परिवार आज कट्टरपंथियों के निशाने पर है क्योंकि इनकी सोच आधुनिक और उदारवादी है।
आज जब सेरेना होटल की दीवारों के भीतर ईरान और अमेरिका के बीच मची जंग को रुकवाने के लिए कूटनीति के प्यादे चले जा रहे हैं, तब पाकिस्तान की आंतरिक विडंबना पूरी दुनिया के सामने है। पाकिस्तान की सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को एक ‘शांति दूत’ के रूप में पेश कर रही है और दावा कर रही है कि वह दो महाशक्तियों के बीच सुलह करा सकती है। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) लेकिन सवाल यह है कि जो देश अपने ही उन नागरिकों को सम्मान और सुरक्षा नहीं दे पा रहा, जिन्होंने इस मुल्क की बुनियाद रखी थी, वह दुनिया को शांति का क्या पाठ पढ़ाएगा?
आगा खान फाउंडेशन ने पाकिस्तान में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जो काम किए हैं, उनका कोई सानी नहीं है। इसके बावजूद, उनके इबादत के तरीके और उनकी मॉडर्न लाइफस्टाइल को आधार बनाकर नफरत फैलाई जाती है। (Serena Hotel Islamabad owner Aga Khan) आज जब दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के प्रतिनिधि आगा खान के होटल में बैठकर चाय पी रहे हैं और शांति की उम्मीद कर रहे हैं, तब पाकिस्तान के उन कट्टरपंथियों को आईना देखने की जरूरत है जो अपनों को ही पराया बनाने पर तुले हैं। यह होटल आज सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस उदारवादी पहचान का आखिरी किला है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी अब खुद पाकिस्तानियों की है।
