Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई यूरोपीय देशों के दूतों और अधिकारियों ने निजी रूप से भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह पुतिन पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डालें।
सूत्रों का कहना है कि कई यूरोपीय दूतों ने विनम्रता से यह संदेश दिया है कि यह युद्ध उनके अस्तित्व और यूरोपीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। (Putin India Visit) इन दूतों की ओर से भारत को भेजे गए संदेश का सार यह था, “पुतिन आपके मित्र हैं, आपकी बात सुनते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि युद्ध के मैदान में समाधान संभव नहीं है, इसलिए कृपया उनसे युद्ध रोकने पर जोर दें।”
Putin India Visit: भारत ने बुचा नरसंहार को लेकर कड़ा रुख दिखाया था
यूरोपीय देशों का यह संदेश 2022 की शुरुआत में दिए गए संदेश से अलग है, जब उन्होंने भारत से यूक्रेन पर रूसी कार्रवाई की निंदा करने को कहा था। (Putin India Visit) उस समय कई यूरोपीय नेता और विदेश मंत्री दिल्ली पहुंचे थे और भारत से एक पक्ष चुनने की अपील की थी।
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भारत ने रूसी आक्रमण की खुलकर निंदा नहीं की, लेकिन बुचा नरसंहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन युद्ध से जुड़े प्रस्तावों पर मतदान से दूरी बनाए रखी।
यह नया संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें से कई यूरोपीय देश भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं और भारतीय छात्रों, पेशेवरों एवं वर्कर्स के लिए अहम गंतव्य भी। (Putin India Visit) यूरोपीय संघ के नेताओं को 2026 के गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के रूप में भी आमंत्रित किया गया है।
भारत ने सुनी यूरोपीय दूतों की चिंताएँ
सूत्र बताते हैं कि साउथ ब्लॉक के अधिकारियों ने पुतिन की यात्रा की तैयारियों के दौरान यूरोपीय दूतों की चिंताओं को गंभीरता से सुना। अमेरिका और यूरोप दोनों ही भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं, इसलिए पुतिन–मोदी वार्ता पर दोनों की कड़ी निगाह रहेगी।
मोदी–पुतिन के बीच अब तक कितनी बातचीत हुई?
युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी और पुतिन के बीच बातचीत लगातार जारी रही है—अब तक कुल 16 बार, जिसमें 2022 से 2024 के बीच 11 बार और इस वर्ष 5 बार संवाद हुआ। (Putin India Visit) पुतिन की यात्रा के दौरान भारत उनकी मेजबानी के लिए प्राइवेट डिनर, राजकीय भोज, द्विपक्षीय बैठकें और सीईओ सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत में ही पुतिन से कहा था, “यह युद्ध का दौर नहीं है।” जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा को लेकर भी मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से बात की थी। भारत ने रूस–यूक्रेन अनाज समझौते में भी शांत रूप से सहयोग किया था।
मॉस्को में पीएम मोदी का संदेश
जुलाई 2024 में मास्को यात्रा के दौरान भी मोदी ने यही कहा था कि “समाधान युद्ध के मैदान में नहीं मिल सकता।” सूत्रों के अनुसार, भारत इसी संदेश को दोहराएगा, लेकिन समाधान पर अंतिम निर्णय युद्ध में शामिल पक्षों को ही लेना होगा।
पोलैंड के विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोस्ज़ेव्स्की ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मुझे भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी पुतिन से कहेंगे कि यूक्रेन के साथ शांति समझौता करना ही सबके हित में है। पुतिन मोदी की बातों को महत्व देते हैं।”
