Bihar Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राज्य कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ चुकी हैं। माना जा रहा है कि मई 2026 के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। यह विस्तार न केवल राजनीतिक संतुलन बल्कि आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, एनडीए गठबंधन के भीतर मंत्री पद को लेकर मंथन जारी है। (Bihar Cabinet Expansion|) जनता दल (यूनाइटेड) में बड़े बदलाव की संभावना कम बताई जा रही है, लेकिन कुछ खाली सीटों पर नए और पुराने चेहरों को मौका मिल सकता है। पिछली कैबिनेट में जदयू के कुछ पद खाली रह गए थे, जिन्हें इस बार भरा जा सकता है।
जदयू के मौजूदा नेताओं में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव पहले ही शपथ ले चुके हैं। इसके अलावा श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, जमा खान और मदन सहनी के दोबारा मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। (Bihar Cabinet Expansion) यदि पार्टी पूरा कोटा भरती है, तो महेश्वर हजारी, शीला मंडल, संतोष निराला, रत्नेश सदा और जयंत कुशवाहा जैसे नेताओं को भी मौका मिल सकता है। वहीं, युवा चेहरों में चेतन आनंद, रूहेल रंजन, शुभानंद मुकेश, कोमल सिंह और मृत्युंजय कुमार के नाम भी चर्चा में हैं।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी में इस बार नेतृत्व की भूमिका अहम मानी जा रही है। पिछली सरकार में भाजपा के 14 मंत्री थे, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी पसंद और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नई टीम तैयार कर सकते हैं। (Bihar Cabinet Expansion) पार्टी के भीतर नए चेहरों को मौका देने की कवायद भी चल रही है। संभावित नामों में इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, मनोज शर्मा और रत्नेश कुशवाहा शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि कुछ मंत्री पद जानबूझकर खाली रखे जा सकते हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में विपक्षी दलों के संभावित टूट की स्थिति में नए सहयोगियों को जगह देना हो सकता है।
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यह रणनीति एनडीए को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अपनाई जा सकती है। सहयोगी दलों की बात करें तो हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष सुमन के मंत्री बने रहने की संभावना है। (Bihar Cabinet Expansion) वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी में फिलहाल बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। बिहार कैबिनेट विस्तार केवल पदों का बंटवारा नहीं बल्कि एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
