Bengaluru Heavy Rain: बेंगलुरु, जो पिछले कई हफ्तों से भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहा था, वहां बुधवार को आसमान से राहत नहीं बल्कि आफत बरसी। शहर के लोगों ने सोचा था कि ओलावृष्टि और ठंडी हवाएं सुकून लेकर आएंगी, लेकिन महज दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को घुटनों पर ला दिया। यह बारिश इतनी अप्रत्याशित और भयानक थी कि कुछ ही देर में राहत का शोर मातम में बदल गया। शहर के प्रतिष्ठित ‘बोरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल’ (Bowring and Lady Curzon Hospital) के पास एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहां अस्पताल की भारी-भरकम चारदीवारी अचानक भरभरा कर गिर गई। इस मलबे की चपेट में आने से एक मासूम बच्चे सहित सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे कर्नाटक में हड़कंप मच गया है।
Bengaluru Heavy Rain: विधानसभा से लेकर सड़कों तक जलप्रलय का नजारा
बारिश का तांडव इतना जबरदस्त था कि इसका असर सिर्फ आम सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता के सबसे सुरक्षित केंद्र यानी कर्नाटक विधानसभा (Vidhanshana) तक पहुंच गया। विधानसभा की गलियारों और महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों के अंदर तक पानी घुस गया, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक का कार्यालय भी पूरी तरह जलमग्न हो गया। शहर के पॉश इलाके कहे जाने वाले रिचमंड टाउन और शांतिनगर की सड़कें किसी उफनती नदी जैसी नजर आने लगीं, जहां कमर तक पानी भर गया था। जो लोग शाम के समय दफ्तरों से अपने घर के लिए निकले थे, वे घंटों तक बीच सड़क पर फंसे रहे और गाड़ियां पानी में तैरती नजर आईं।
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ट्रैफिक जाम और मेट्रो सेवाओं पर लगा ब्रेक
इस कुदरती आपदा ने बेंगलुरु की लाइफलाइन माने जाने वाले यातायात को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। भारी जलभराव के कारण प्रमुख सड़कों और चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और गाड़ियां रेंगने को मजबूर हो गईं। केवल सड़क मार्ग ही नहीं, बल्कि मेट्रो सेवाओं में भी व्यवधान की खबरें सामने आईं, जिससे आम यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। शाम के समय हुई इस तबाही ने घर लौट रहे कामकाजी लोगों के लिए सफर को एक बुरे सपने में बदल दिया। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के घरों में पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ है, और लोग रात भर अपने घरों से पानी निकालने की जद्दोजहद करते नजर आए।
50 से ज्यादा जगहों पर गिरे पेड़ और राहत कार्य
तूफानी हवाओं और ओलावृष्टि का असर यह हुआ कि शहर के पुराने और घने इलाकों में पेड़ों का गिरना शुरू हो गया। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (BBMP) की रिपोर्ट के अनुसार, मल्लेश्वरम, शांतिनगर और शेषाद्रिपुरम जैसे इलाकों में करीब 50 से ज्यादा जगहों पर बड़े पेड़ उखड़कर सड़कों और बिजली के खंभों पर गिर गए। इससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई और रास्ते बंद हो गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग, आपातकालीन सेवाओं और ट्रैफिक पुलिस की बड़ी टुकड़ियों को मैदान में उतारा गया। जलमग्न सड़कों से पानी निकालने के लिए भारी-भरकम पंपों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि जनजीवन को दोबारा पटरी पर लाया जा सके। सूखे से जूझ रहे शहर के लिए यह बारिश एक कड़वा अनुभव साबित हुई है।
