Peru Election 2026: पेरू की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए कीको फुजीमोरी (Keiko Fujimori) ने देश के राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है। इसके साथ ही 26 सालों के लंबे अंतराल के बाद देश के सबसे चर्चित और विवादित ‘फुजीमोरी राजवंश’ (Fujimori Dynasty) की सत्ता में वापसी हुई है। 51 वर्षीय कीको फुजीमोरी पेरू के इतिहास में जनता द्वारा सीधे चुनी जाने वाली पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं। यह जीत न केवल कीको के निजी राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी सफलता है, बल्कि यह दक्षिण अमेरिका के राजनीतिक परिदृश्य में दक्षिणपंथी रुझान की मजबूत वापसी का भी संकेत देती है।
Peru Election 2026: कौन हैं कीको फुजीमोरी?
कीको फुजीमोरी पेरू के पूर्व तानाशाह/राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की सबसे बड़ी बेटी हैं। अल्बर्टो फुजीमोरी ने 1990 से 2000 तक पेरू पर शासन किया था। 1994 में जब उनके माता-पिता (अल्बर्टो फुजीमोरी और सुसाना हिगुची) का तलाक हुआ, तब महज 19 साल की उम्र में कीको को देश की ‘फर्स्ट लेडी’ की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी थी। (Peru Election 2026) उन्होंने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएशन और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। 2006 में उन्होंने पेरू की संसद (कांग्रेसी) का चुनाव जीता। 2010 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘पॉपुलर फोर्स’ की स्थापना की।
3 बार हार के बाद चौथी बार में मिली ऐतिहासिक जीत
कीको फुजीमोरी का राजनीतिक सफर धैर्य और असफलताओं से भरा रहा है। राष्ट्रपति बनने के लिए उन्हें तीन बार हार का सामना करना पड़ा:
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2011: ओलंटा हुमाला से बेहद करीबी मुकाबले में हारीं।
2016: पेड्रो पाब्लो कुचिंस्की के सामने रन-ऑफ में मामूली अंतर से पराजित हुईं।
2021: वामपंथी नेता पेड्रो कैस्टिलो से महज कुछ हजार वोटों से हार गईं।
2026 (चौथा प्रयास): आखिरकार 2026 के आम चुनावों में उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार रॉबर्टो सांचेज को हराकर राष्ट्रपति पद हासिल किया।
इस बार कितना कड़ा था मुकाबला?
पेरू में 2026 के आम चुनाव बेहद उतार-चढ़ाव भरे रहे। अप्रैल 2026 में हुए पहले चरण के मतदान में किसी भी उम्मीदवार को 50% से अधिक वोट नहीं मिले। (Peru Election 2026) इसके बाद 7 जून 2026 को अंतिम रन-ऑफ मुकाबला हुआ। कीको फुजीमोरी को 50.13% वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रॉबर्टो सांचेज को 49.87% वोट हासिल हुए। लगभग 1.8 करोड़ वोटों में से जीत का अंतर 50,000 वोटों से भी कम रहा। चुनाव की शुरुआती गिनती में वामपंथी उम्मीदवार आगे थे, लेकिन विदेशों में रहने वाले पेरूवासियों के पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होने के बाद कीको ने बढ़त बना ली और जीत हासिल की।
पेरू की राजनीति पर इसका क्या असर होगा?
कीको फुजीमोरी के राष्ट्रपति बनने से पेरू और लैटिन अमेरिका के राजनीतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा।
कीको के पिता अल्बर्टो फुजीमोरी को देश की अर्थव्यवस्था को संभालने और आतंकवाद (शाइनिंग पाथ उग्रवादियों) को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है, हालांकि उन पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप थे। कीको की जीत से सुरक्षा और कड़े शासन वाली नीति की वापसी हुई है। (Peru Election 2026) पेरू में बढ़ते क्राइम रेट और संगठित अपराध से निपटने के लिए उन्होंने सख्त रुख अपनाने का वादा किया है। कीको का झुकाव अमेरिका की ओर है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के साथ सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने की इच्छा जताई है। पिछले 10 वर्षों में पेरू में 9 राष्ट्रपति बदल चुके हैं। कीको की संसद में मजबूत पकड़ होने के कारण अब देश में लंबे समय बाद राजनीतिक स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
विवाद भी रहेंगे साथ
कीको फुजीमोरी का राजनीतिक करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। उन पर चुनावी वित्तपोषण और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच होती रही है। (Peru Election 2026) हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है और इन्हें राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उनके आलोचकों का कहना है कि फुजीमोरी परिवार की सत्ता में वापसी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चुनौती बन सकती है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि देश को इस समय मजबूत नेतृत्व और निर्णायक शासन की आवश्यकता है।
