Cockroach Awami Party Pakistan: किसे मालूम था कि सुप्रीम कोर्ट के भीतर की गई एक मौखिक टिप्पणी देखते ही देखते पूरे दक्षिण एशिया की डिजिटल राजनीति में हलचल मचा देगी? मई के मध्य में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने एक सुनवाई के दौरान विरोध-प्रदर्शनों में शामिल बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टे) और ‘परजीवी’ (पैरासाइट्स) से कर दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने तुरंत अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका इशारा सिर्फ उन लोगों की तरफ था जो फर्जी डिग्री के सहारे किसी पेशे में घुसपैठ करते हैं, लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था।
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इंटरनेट पर मौजूद युवाओं ने इस टिप्पणी को गुस्से के बजाय एक अनोखे राजनीतिक हथियार में बदल दिया। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे 30 साल के भारतीय छात्र और आम आदमी पार्टी के पूर्व रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने 16 मई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का गठन कर दिया। (Cockroach Awami Party Pakistan) उन्होंने साफ कहा, “अगर सिस्टम को लगता है कि रोजगार मांगने वाला युवा कॉकरोच है, तो हां, हम कॉकरोच हैं!” इसके बाद गूगल फॉर्म्स और सोशल मीडिया के जरिए सदस्यता अभियान की ऐसी शुरुआत हुई, जिसने स्थापित राजनीतिक घरानों की नींव हिला दी।
Cockroach Awami Party Pakistan: लाखों फॉलोअर्स का सैलाब
CJP की शुरुआत भले ही एक डिजिटल व्यंग्य के रूप में हुई थी, लेकिन इसने देखते ही देखते रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की। महज 1 हफ्ते से भी कम समय के भीतर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज ने 20 मिलियन यानी 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया। यह आंकड़ा भारत की दो सबसे बड़ी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल के कुल फॉलोअर्स से भी कहीं आगे निकल गया।
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इस पार्टी का नाम और निशान ‘कॉकरोच’ रखने के पीछे एक गहरी सोच थी। तिलचट्टा एक ऐसा जीव माना जाता है जो किसी भी मुश्किल से मुश्किल स्थिति में जिंदा रहने की क्षमता रखता है, जिसे आसानी से मिटाया नहीं जा सकता और जो बहुत तेजी से अपनी तादाद बढ़ाता है। (Cockroach Awami Party Pakistan) भारतीय युवाओं ने इसी प्रतीक को अपनी ताकत बना लिया। जब इस पेज के X (पहले ट्विटर) अकाउंट को भारत में अस्थायी रूप से रोका गया, तो पार्टी ने तुरंत एक नया हैंडल बनाकर पोस्ट किया “आपको लगा था कि आप हमसे छुटकारा पा लेंगे? हंसने की बात है!” यह पोस्ट चंद मिनटों में वायरल हो गई।
सिर्फ मीम नहीं, युवाओं के असल मुद्दों का घोषणापत्र
अक्सर आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) पर यह आरोप लगाया जाता है कि वे सोशल मीडिया पर सिर्फ रील्स देखने और हंसने-हंसाने तक सीमित हैं। लेकिन CJP ने मीम्स और तंज के जरिए देश के वास्तविक ज्वलंत मुद्दों को केंद्र में ला खड़ा किया। पार्टी ने अपने आधिकारिक घोषणापत्र में स्पष्ट किया कि वे “आलसी और बेरोजगार” युवाओं की आवाज हैं, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।
पार्टी की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक और धांधली पर रोक, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार, युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता शामिल थी। (Cockroach Awami Party Pakistan) इस आंदोलन ने साबित कर दिया कि जब युवाओं का गुस्सा मीम्स और हास्य के साथ मिलकर सामने आता है, तो वह किसी भी भाषण से ज्यादा तीखा और असरदार हो जाता है। देखते ही देखते यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गई और दुनिया भर के विश्लेषक इस नए ट्रेंड को समझने में जुट गए।
इस्लामाबाद पहुंचा ‘कॉकरोच फीवर’
भारत में उपजी इस अनोखी डिजिटल लहर की गूंज बहुत जल्द सीमा पार कर पाकिस्तान तक जा पहुंची। भारत में CJP की जबरदस्त सफलता को देखकर पाकिस्तानी युवाओं ने भी अपने देश के सामाजिक और राजनीतिक हालात पर तंज कसने के लिए इस विचार को हाथों-हाथ अपना लिया। (Cockroach Awami Party Pakistan) पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर कई तरह के कॉकरोच संगठन रातों-रात सामने आने लगे, जिनमें ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ (CAP) और ‘कॉकरोच अवामी लीग’ (CAL) सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं। राजनीति
पाकिस्तान के इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ (CAP) नाम से बने एक पेज ने अपने बायो में खुले तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने यह विचार भारत से लिया है। उन्होंने लिखा, “हां, हमने इसे कॉपी किया है, लेकिन किसे परवाह है? हमारा मकसद तो एक ही है।” इस पेज ने अपने बायो में यह भी लिखा कि यह “युवाओं का, युवाओं द्वारा, पाकिस्तान के लिए एक राजनीतिक मंच है।” कुछ ही दिनों में इस पेज से 1600 से ज्यादा युवा जुड़ गए।
पारंपरिक घरानों को चुनौती: “हर हाल में जिंदा हैं”
पाकिस्तान में ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ ने अपना जो लोगो बनाया, वह भारत की CJP से काफी मिलता-जुलता है, लेकिन उन्होंने इसे पाकिस्तान के झंडे के रंगों के अनुसार हरे और सफेद रंग में ढाला है। यह नया समूह खुद को इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) जैसे स्थापित राजनीतिक दलों के एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
उर्दू में लिखे गए कई पोस्ट और नारों के जरिए वहां के युवा अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। एक अन्य अकाउंट ने अपना परिचय देते हुए लिखा, “जिन्हें सिस्टम ने कॉकरोच समझा, हम उन्हीं अवाम की आवाज हैं।” वहीं ‘कॉकरोच अवामी लीग’ (CAL) ने अपना मुख्य नारा रखा है—”हर हालात में जिंदा हैं।” यह नारा पाकिस्तानी युवाओं की उस बेबसी और जिजीविषा को दर्शाता है, जहां वे भीषण महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद संघर्ष कर रहे हैं।
भारतीय और पाकिस्तानी मॉडल में क्या है बुनियादी फर्क?
हालांकि दोनों देशों में आंदोलनों का नाम और प्रतीक एक जैसा है, लेकिन उनके काम करने के तरीके में कुछ स्पष्ट अंतर देखने को मिलते हैं। भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का एक निश्चित ढांचा है। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने इसका ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किया है, एक आधिकारिक वेबसाइट बनाई है और एक लिखित घोषणापत्र तैयार किया है।
इसके विपरीत, पाकिस्तान में यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या टीम के नेतृत्व में नहीं चल रहा है। वहां यह पूरी तरह से विकेंद्रीकृत (decentralized) रूप में फैल रहा है। अलग-अलग शहरों के कई कंटेंट क्रिएटर्स और युवा अपने स्तर पर ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ या ‘कॉकरोच अवामी लीग’ के नाम से सोशल मीडिया पेजों का संचालन कर रहे हैं। वहां का मुख्य उद्देश्य किसी एक बैनर के नीचे इकट्ठा होना नहीं, बल्कि व्यंग्य के जरिए अपनी बेबाक राय सरकार तक पहुंचाना है।
व्यंग्य से उपजी राजनीति का नया वैश्विक दौर
भारत से शुरू होकर पाकिस्तान तक फैला यह ‘कॉकरोच आंदोलन’ इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आज का युवा पारंपरिक राजनीति से पूरी तरह ऊब चुका है। जब राजनीतिक व्यवस्थाएं आम जनता की तकलीफों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करने लगती हैं, तब जनता विरोध के नए रास्ते तलाश लेती है। कीटों की दुनिया में कॉकरोच को एक ऐसा जीव माना जाता है जिसे खत्म करना बेहद मुश्किल होता है। ठीक उसी तरह, भारत और पाकिस्तान की युवा पीढ़ी ने इस प्रतीक के जरिए सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरानों को यह कड़ा संदेश दिया है कि उनके वजूद को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 16 मई से शुरू हुआ एक छोटा सा सोशल मीडिया व्यंग्य आज दोनों देशों के युवाओं के बीच व्यवस्था के खिलाफ एकजुटता का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
