Global TV Trends: कुछ दशक पहले तक दुनिया के लगभग हर घर में शाम का एक तय कार्यक्रम होता था – टीवी देखना। लेकिन आज यह सवाल पहले जितना आसान नहीं रहा कि ‘लोग कितना टीवी देखते हैं?’ इसकी वजह यह है कि अब टीवी केवल टीवी चैनल देखने का माध्यम नहीं रह गया है। (Global TV Trends) स्मार्ट टीवी, YouTube, Netflix, Disney+, Amazon Prime Video और दर्जनों स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने ‘टीवी देखने’ की परिभाषा ही बदल दी है। यही कारण है कि आज जब किसी देश में टीवी देखने का समय मापा जाता है, तो कई बार उसमें पारंपरिक टीवी (Broadcast TV) और इंटरनेट आधारित वीडियो (Streaming) को अलग-अलग देखा जाता है।
फिर भी वैश्विक सर्वेक्षणों और मीडिया रिसर्च से यह साफ पता चलता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में स्क्रीन देखने की आदतों में बड़ा अंतर है।
Global TV Trends: टीवी देखने का समय कैसे मापा जाता है?
टीवी देखने के आंकड़े अलग-अलग संस्थाएं अलग तरीकों से जुटाती हैं। कुछ केवल पारंपरिक टीवी चैनलों का समय मापती हैं, जबकि कुछ स्मार्ट टीवी पर देखे गए स्ट्रीमिंग कंटेंट को भी शामिल करती हैं। (Global TV Trends) इसीलिए किसी एक वैश्विक सूची को अंतिम नहीं माना जा सकता। फिर भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया अध्ययनों, प्रसारण उद्योग के आंकड़ों और डिजिटल रिसर्च से व्यापक रुझान स्पष्ट दिखाई देते हैं।
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किन देशों में सबसे ज्यादा टीवी देखा जाता है?
लैटिन अमेरिका लंबे समय से टीवी देखने के मामले में सबसे आगे रहा है। ब्राजील और मेक्सिको जैसे देशों में टेलीनोवेला (टीवी धारावाहिक), फुटबॉल और मनोरंजन कार्यक्रमों की लोकप्रियता बहुत अधिक है। (Global TV Trends) कई अध्ययनों में ब्राजील के दर्शकों का औसत टीवी समय प्रतिदिन चार से पांच घंटे या उससे भी अधिक दर्ज किया गया है।
अमेरिका भी लंबे समय तक सबसे ज्यादा टीवी देखने वाले देशों में शामिल रहा। हालांकि यहां अब पारंपरिक टीवी का समय घटा है, लेकिन उसकी जगह स्ट्रीमिंग ने ले ली है। (Global TV Trends) यानी कुल वीडियो देखने का समय अभी भी दुनिया में सबसे अधिक देशों में गिना जाता है।
यूनाइटेड किंगडम, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में भी टीवी देखने की मजबूत परंपरा रही है, हालांकि युवा वर्ग तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है।
दक्षिण कोरिया में मनोरंजन उद्योग की लोकप्रियता के कारण टीवी और स्ट्रीमिंग दोनों का उपयोग काफी अधिक है।
किन देशों में सबसे कम टीवी देखा जाता है?
अगर केवल पारंपरिक टीवी की बात करें तो नॉर्डिक देशों, जैसे स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड में टीवी देखने का समय कई अन्य देशों की तुलना में कम हो चुका है।
इसका मतलब यह नहीं कि वहां लोग कम वीडियो देखते हैं। असल में इन देशों में YouTube, ऑन-डिमांड वीडियो, स्ट्रीमिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग बहुत अधिक है। (Global TV Trends) यानी टीवी चैनल कम, लेकिन इंटरनेट वीडियो ज्यादा देखा जाता है। कुछ विकासशील देशों में टीवी देखने का समय इसलिए कम रहता है क्योंकि वहां इंटरनेट, बिजली या टीवी सेट की पहुंच अभी भी सीमित है।
भारत कहां खड़ा है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी बाजारों में से एक है।करोड़ों परिवार आज भी रोजाना टीवी देखते हैं। हिंदी और क्षेत्रीय भाषा के मनोरंजन चैनल, समाचार, क्रिकेट और धार्मिक कार्यक्रम बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। (Global TV Trends) साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े YouTube बाजारों में भी शामिल है। यानी भारतीय दर्शक पारंपरिक टीवी और डिजिटल वीडियो, दोनों का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। युवा पीढ़ी में मोबाइल पर वीडियो देखने की आदत तेजी से बढ़ रही है, जबकि परिवारों में टीवी अभी भी सामूहिक मनोरंजन का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
अमेरिका में क्या बदल गया?
अमेरिका इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है।
पहले लोग केबल टीवी देखते थे। अब वही लोग टीवी स्क्रीन पर YouTube, Netflix, Hulu, Disney+ और अन्य स्ट्रीमिंग सेवाएं देखते हैं। यानी टीवी सेट का उपयोग कम नहीं हुआ, बल्कि उसका उद्देश्य बदल गया। आज कई घरों में टीवी चालू होता है, लेकिन उस पर कोई पारंपरिक चैनल नहीं चल रहा होता।
जापान और दक्षिण कोरिया की आदतें अलग क्यों हैं?
जापान में सार्वजनिक प्रसारण और उच्च गुणवत्ता वाले टीवी कार्यक्रमों की मजबूत परंपरा रही है। साथ ही वहां एनीमे, समाचार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बड़ी दर्शक संख्या है। (Global TV Trends) दक्षिण कोरिया में टीवी और स्ट्रीमिंग दोनों समान रूप से लोकप्रिय हैं। के-ड्रामा, संगीत कार्यक्रम और ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म वहां के मीडिया उपभोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
सांस्कृतिक अंतर क्यों मायने रखते हैं?
टीवी देखने की आदत केवल तकनीक से तय नहीं होती। लोगऔर समाज
जहां परिवार साथ बैठकर कार्यक्रम देखने की परंपरा मजबूत होती है, वहां टीवी का महत्व अधिक रहता है।
दूसरी ओर, जिन देशों में व्यक्तिगत मोबाइल और टैबलेट का उपयोग अधिक है, वहां लोग अलग-अलग स्क्रीन पर अपनी पसंद का कंटेंट देखते हैं। (Global TV Trends) यानी एक देश में पूरा परिवार एक टीवी देखता है, जबकि दूसरे देश में घर के चार लोग चार अलग-अलग डिवाइस पर वीडियो देख रहे होते हैं।
स्ट्रीमिंग ने सबसे बड़ा बदलाव क्या किया?
पहले टीवी कार्यक्रम तय समय पर आते थे। अब दर्शक तय करते हैं कि क्या देखना है और कब देखना है। इसी बदलाव ने ‘बिंज वॉचिंग’ यानी एक साथ पूरी सीरीज देखने की आदत पैदा की। (Global TV Trends) आज किसी लोकप्रिय वेब सीरीज का पूरा सीजन एक ही दिन में देख लेना आम बात है। यह पारंपरिक टीवी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई।
क्या भविष्य में टीवी खत्म हो जाएगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि टीवी खत्म नहीं होगा। लेकिन ‘टीवी’ का मतलब बदल जाएगा।
भविष्य में टीवी स्क्रीन केवल एक डिस्प्ले होगी। उस पर YouTube भी चलेगा, लाइव क्रिकेट भी, Netflix भी और शायद AI द्वारा तैयार किया गया व्यक्तिगत चैनल भी।यानी टीवी और इंटरनेट के बीच का अंतर लगातार कम होता जाएगा।
डेटा क्या बताता है?
वैश्विक स्तर पर मीडिया अनुसंधान से तीन बड़े रुझान सामने आते हैं। पहला, पारंपरिक टीवी देखने का समय अधिकांश विकसित देशों में लगातार घट रहा है। (Global TV Trends) दूसरा, कुल वीडियो देखने का समय कम नहीं हुआ है, बल्कि कई देशों में बढ़ा है क्योंकि स्ट्रीमिंग ने उसकी जगह ले ली है। तीसरा, YouTube लगभग हर आयु वर्ग और लगभग हर महाद्वीप में सबसे प्रभावशाली वीडियो प्लेटफॉर्म बन चुका है।
यानी आज का सबसे बड़ा बदलाव यह नहीं है कि लोग टीवी कम देख रहे हैं, बल्कि यह है कि वे टीवी पर क्या देख रहे हैं। पहले चैनल तय करते थे कि दर्शक क्या देखेंगे। (Global TV Trends) अब दर्शक तय करते हैं कि वे कब, कहां और किस स्क्रीन पर क्या देखना चाहते हैं। यही बदलाव वैश्विक मीडिया उद्योग की सबसे बड़ी कहानी बन चुका है।
