china pakistan: पाकिस्तान और चीन के बीत बीते कुछ सालों में दोस्ती काफी गहरी हुई है. दोनों देशों के लिए एक कहावत इस्तेमाल होती है – ‘Higher than the mountains and deeper than the ocean’. यानी ये ऐसी दोस्ती है जो पहाड़ों से ऊंची और सागर से भी गहरी है. हालांकि, दो देशों के आपसी संबंधों को भले दोस्ती का नाम दें, लेकिन असल में कोई न कोई मतलब जरूर छुपा होता है. चीन-पाकिस्तान के रिश्ते भी इससे अछूते नहीं है. इसकी सबसे बड़ी निशानी है ग्वादर का बंदरगाह (Gwadar Port). चीन के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा ग्वादर पोर्ट ही था. इसे अरब सागर के गेटवे के तौर पर प्लान किया गया था.
china pakistan: हिंद महासागर तक अपनी पहुंच बनाने में जुटा चीन
चीन हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है. इसलिए ग्वादर उसके सबसे अहम प्रोजेक्ट्स में से एक है. दरअसल चीन, स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. ये सिंगापुर के पास का समुद्री मार्ग है. यहीं से चीन का आधे से अधिक समुद्री व्यापार होता है. यही वजह है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), चीन के लिए बहुत अहम है. लेकिन CPEC का समुद्री जंक्शन एक दशक बीतने के बाद भी अधर में ही है. ग्वादर पोर्ट प्रोजेक्ट के साथ सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी शामिल हैं. इस पोर्ट से बहुत कम व्यापारिक गतिविधियां होती हैं और स्थानीय लोगों के बीच भी इसे लेकर नाराजगी है. इसके बाद से ही सवाल उठ रहे हैं कि चीन को इस प्रोजेक्ट से जैसी रणनीतिक फायदे की उम्मीद थी, वह मिलेगी या नहीं?
रिपोर्ट कहती है कि चीन और पाकिस्तान की ग्वादर से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं उसके भौगोलिक स्थिति की वजह से है. चीन का विजन अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग को पाकिस्तान के रास्ते अरब सागर से जोड़ना है. मकसद था व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक जमीनी रास्ता बनाना. लेकिन शिनजियांग और ग्वादर के बीच का रास्ता दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों से होकर गुजरता है.
- Advertisement -
सिडनी स्थित लोवी इंस्टीट्यूट के लिए नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च के डिस्टिंग्विश्ड फेलो जयदीप सैकिया ने इस पर एक रिसर्च पेपर लिखा है. पेपर में इस प्रोजेक्ट की कई कमियों का जिक्र है. सैकिया ने अपने पेपर में लिखा,
शिनजियांग से ग्वादर जाने वाले सामान को काराकोरम हाईवे से गुजरना पड़ता है. इसके लिए 4,600 मीटर से अधिक की ऊंचाई पार करनी होती है. यह इलाका अक्सर लैंडस्लाइड, हिमस्खलन और खराब मौसम की चपेट में रहता है. यह समुद्री शिपिंग की जगह लेने के लिए जरूरी भारी मात्रा में कंटेनर ट्रैफिक को संभालने के लिए सक्षम नहीं है.
बौखलाए चीन ने रोक दी फंडिंग
जनवरी 2025 में, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का एक विमान नए ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा. उसका पारंपरिक ‘वॉटर सैल्यूट’ से स्वागत किया गया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे चीन के साथ दोस्ती की एक शानदार मिसाल बताया. वहीं इसके फाइनेंसर, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इसे ‘दान’ करार दिया. दान शब्द ने लोगों का ध्यान भी खींचा. इसका एक उदाहरण ‘मेन लाइन-1’ रेलवे अपग्रेड है. इसे कभी CPEC का सबसे बड़ा और सबसे अहम प्रोजेक्ट माना जाता था. चीन ने 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग रोक दी. इसके बाद पाकिस्तान को कराची-रोहरी सेक्शन के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से फंडिंग लेनी पड़ी.
ग्वादर प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी
ग्वादर को एक ऐसे प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया गया, जो पाकिस्तान के सबसे गरीब इलाकों में से एक की कायापलट कर देता. फिर भी, स्थानीय लोगों ने बार-बार शिकायत की है कि उन्हें CPEC से कोई आर्थिक फायदा नहीं मिला है. ग्वादर में पीने लायक पानी और बिजली की भी भारी किल्लत है. वहां के मछुआरों ने भी चीन के डीप-सी ट्रॉलर और सुरक्षा पाबंदियों के असर को लेकर शिकायतें की हैं.
हालांकि, समस्या सिर्फ स्थानीय लोगों के विरोध तक ही सीमित नहीं है. हाल ही में एक चीनी कंपनी ‘हैंगेंग ट्रेड कंपनी’ ने ग्वादर फ्री जोन में अपनी फैक्ट्री बंद कर दी. उसने अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. कंपनी ने इसके लिए वित्तीय नुकसान और काम करने के लिए अनुकूल माहौल न होने का हवाला दिया.
