Iran agree for Islamabad Peace talk: मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बादलों के बीच दुनिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने बुधवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की बेहद अहम शांति वार्ता में शामिल होने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसे मौजूदा वैश्विक संघर्ष को खत्म करने और तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को टालने की दिशा में सबसे बड़ी कूटनीतिक प्रगति माना जा रहा है। तेहरान के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें इस ‘महामंथन’ पर टिक गई हैं।
Iran agree for Islamabad Peace talk: सर्वोच्च नेता मोजतबा का बड़ा फैसला
पिछले कई दिनों से इस वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ईरान ने पहले अमेरिका पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाते हुए बातचीत से दूरी बनाने के संकेत दिए थे। (Iran agree for Islamabad Peace talk) हालांकि, ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आंतरिक चर्चाओं और पाकिस्तान, मिस्र व तुर्की जैसे मध्यस्थ देशों के भारी दबाव के बाद बातचीत के लिए ‘हरी झंडी’ दे दी है। ईरान का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि बुधवार रात को दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर खत्म होने वाला है।
जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी ‘पावर टीम’ रवाना
अमेरिका ने भी इस वार्ता को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार सुबह ही इस्लामाबाद के लिए रवाना हो रहे हैं। (Iran agree for Islamabad Peace talk) उनके साथ इस प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के करीबी और रणनीतिकार जेयर्ड कुश्नर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार शामिल होंगे। अमेरिकी टीम का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना और क्षेत्र में स्थाई शांति की गारंटी लेना है।
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इस्लामाबाद बना दुनिया का ‘डिप्लोमैटिक सेंटर’
इस ऐतिहासिक वार्ता को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान ने इस्लामाबाद को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है। करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ ‘रेड जोन’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है। पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और मिस्र भी इस पर्दे के पीछे की कूटनीति में शामिल हैं। (Iran agree for Islamabad Peace talk) विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 24 घंटों में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो सीजफायर खत्म होते ही मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर बमों और मिसाइलों का दौर शुरू हो सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस्लामाबाद की यह मेज ‘शांति की मेज’ साबित होगी या ‘जंग का एलान’ करेगी।
