Pakistan-Sudan fighter jet deal: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दूसरों के कर्ज और इशारों पर अपनी सियासत चलाने वाले पाकिस्तान का एक बड़ा हथियार समझौता सऊदी अरब के एक आदेश पर बीच में ही लटक गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के दबाव में आकर पाकिस्तान ने सूडान को लड़ाकू विमान और हथियार बेचने की करीब 1.5 अरब डॉलर (लगभग 12,500 करोड़ रुपये) की महाडील को फिलहाल रोक दिया है। यह खबर तब सामने आई है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा की सख्त जरूरत थी।
Pakistan-Sudan fighter jet deal: सऊदी अरब का इनकार और पाकिस्तान की मजबूरी
रॉयटर्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने न केवल पाकिस्तान को इस समझौते को खत्म करने का निर्देश दिया, बल्कि सूडान को इस हथियार खरीद के लिए दी जाने वाली वित्तीय मदद (फंडिंग) से भी हाथ खींच लिए। (Pakistan-Sudan fighter jet deal) पाकिस्तान के कूटनीतिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह डील लगभग अंतिम चरण में थी और खुद सऊदी अरब की मध्यस्थता से इसे तैयार किया गया था। लेकिन ऐन वक्त पर रियाद ने अपनी रणनीति बदल दी, जिससे पाकिस्तान के हाथ से एक बड़ा मुनाफा निकल गया। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान चाहकर भी सऊदी के इस फैसले का विरोध नहीं कर सकता क्योंकि उसकी अपनी अर्थव्यवस्था सऊदी की मदद पर टिकी है।
रियाद में हुई बैठक और बदली रणनीति
इस पूरी कहानी में मोड़ तब आया जब इसी साल मार्च में रियाद में सूडान की सेना और सऊदी अधिकारियों के बीच एक गुप्त बैठक हुई। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक के बाद ही सऊदी अरब ने फंडिंग रोकने का कड़ा फैसला लिया। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की लीबिया के साथ होने वाली 4 अरब डॉलर की एक और प्रस्तावित डिफेंस डील भी अब खतरे में पड़ गई है। (Pakistan-Sudan fighter jet deal) बताया जा रहा है कि कुछ पश्चिमी देशों ने सऊदी अरब को अफ्रीका के आंतरिक संघर्षों से दूर रहने की सलाह दी है, जिसके बाद सऊदी अपनी पूरी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है।
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सूडान पिछले तीन सालों से गृहयुद्ध की आग में जल रहा है, जहां सेना और अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेस’ (RSF) के बीच खूनी संघर्ष जारी है। इस जंग ने मिडिल ईस्ट के दो बड़े खिलाड़ियों- सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)- को आमने-सामने ला खड़ा किया है। (Pakistan-Sudan fighter jet deal) जहां सऊदी अरब सूडान की आधिकारिक सेना का समर्थन कर रहा है, वहीं UAE पर आरोप लगते रहे हैं कि वह चोरी-छिपे RSF की मदद कर रहा है। सऊदी अरब अब नहीं चाहता कि सूडान को दिए जाने वाले हथियारों की वजह से क्षेत्र में सैन्य संतुलन बिगड़े या UAE के साथ उसके रिश्ते और ज्यादा कड़वे हों।
खतरे में पाकिस्तान का डिफेंस एक्सपोर्ट
पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। एक तरफ उसका विदेशी मुद्रा भंडार खाली है और दूसरी तरफ उसके बड़े डिफेंस सौदे कूटनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ रहे हैं। (Pakistan-Sudan fighter jet deal) एक वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र ने बताया कि जब फंडिंग करने वाला देश ही हाथ खींच ले, तो पाकिस्तान के पास डील रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तान भविष्य में अपने दम पर ऐसे सौदे कर पाएगा या उसे हमेशा की तरह बड़े देशों के इशारों का इंतजार करना होगा।
