Hormuz Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक अहम और निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब “खत्म होने के बेहद करीब” है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक बार फिर बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं।
एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो आज ईरान परमाणु शक्ति बन चुका होता। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक संतुलन पूरी तरह बदल सकता था। (Hormuz Crisis) जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या यह संघर्ष समाप्त हो चुका है, तो उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि स्थिति अब अंत के काफी करीब है। हालांकि, ट्रंप के बयान में कूटनीतिक लचीलापन भी दिखाई दिया। (Hormuz Crisis) उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से वार्ता शुरू हो सकती है। उनके अनुसार, यदि बातचीत सफल होती है तो हालात सामान्य होने में समय लग सकता है, लेकिन यह एक सकारात्मक दिशा होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान समझौता करने के लिए इच्छुक हो सकता है।
ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर को “शानदार” बताते हुए कहा कि उनकी मध्यस्थता के कारण ही बातचीत का रास्ता खुल पाया है। (Hormuz Crisis) उन्होंने यह भी कहा कि यदि वार्ता आगे बढ़ती है, तो अमेरिका फिर से इस्लामाबाद में बातचीत के लिए लौट सकता है। दरअसल, हाल ही में इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने दबाव बढ़ाते हुए होर्मुज स्ट्रेट के आसपास नौसैनिक घेराबंदी (नेवी ब्लॉकेड) शुरू कर दी।
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इस ब्लॉकेड का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा। कई जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। हालांकि, जैसे ही दोबारा बातचीत की खबर आई, कीमतों में थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई। (Hormuz Crisis) दूसरी ओर, ईरान अपने रुख पर कायम है। वह यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता क्या मोड़ लेती है। (Hormuz Crisis) अगर बातचीत सफल होती है, तो यह लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। लेकिन यदि वार्ता फिर विफल होती है, तो हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
