US-Iran war plan Z: मिडिल ईस्ट के मुहाने पर बारूद की गंध अब और गहरी हो गई है। दुनिया की नजरें इस वक्त होर्मुज की लहरों और ईरान के रेतीले तटों पर टिकी हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘प्लान-Z’ ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ताजा खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए अपने 21 घातक युद्धपोतों को मोर्चे पर तैनात कर दिया है। यह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक ‘अंतिम प्रहार’ (Final Blow) की आहट लग रही है।
US-Iran war plan Z: युद्धपोतों का घेरा और मरीन कमांडो की एंट्री
ईरान को घुटनों पर लाने के लिए अमेरिका ने अपनी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत झोंक दी है। इस घेराबंदी में 21 भारी युद्धपोत, डेस्ट्रॉयर और विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं। रणनीतिक रूप से, 10 युद्धपोत अकेले अरब सागर में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास पहरा दे रहे हैं, जबकि 3 युद्धपोत पर्शियन गल्फ में ईरान की आर्थिक रीढ़ ‘खार्ग द्वीप’ के करीब तैनात हैं। (US-Iran war plan Z) लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ‘USS ट्रिपोली’ की हो रही है। 27 मार्च को अरब सागर पहुंचे इस एम्फीबियस असॉल्ट शिप पर 3500 जांबाज मरीन कमांडो सवार हैं। मरीन कमांडो की मौजूदगी का सीधा मतलब है कि अब जंग सिर्फ आसमान से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर लड़ी जा सकती है।
न्यूक्लियर साइट और यूरेनियम पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का प्लान
अमेरिका के ‘प्लान-Z’ का सबसे बड़ा और पहला टारगेट ईरान का 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम है। रिपोर्टों की मानें तो अमेरिका 5 से 10 हजार सैनिकों को सीधे ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर उतारने की योजना बना रहा है। मकसद साफ है—ईरानी सेना से लड़कर उस यूरेनियम को कब्जे में लेना जो 60 प्रतिशत तक समृद्ध हो चुका है। हालांकि, यह मिशन ‘सुसाइड मिशन’ से कम नहीं होगा। (US-Iran war plan Z) ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिकी सैनिकों से तीन गुना ज्यादा जवान तैनात हैं, और वहां रेडिएशन लीक होने का खतरा पूरी दुनिया के लिए तबाही का सबब बन सकता है।
होर्मुज और खार्ग द्वीप: अर्थव्यवस्था पर प्रहार की तैयारी
अमेरिका का दूसरा बड़ा लक्ष्य ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर कब्जा करना है, जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है। यहां ईरान ने 7 रणनीतिक द्वीपों पर मिसाइल बंकर और हजारों स्पीड बोट तैनात कर रखी हैं। वहीं, तीसरा बड़ा टारगेट ‘खार्ग द्वीप’ है, जहां से ईरान अपना 90% तेल निर्यात करता है। (US-Iran war plan Z) अमेरिकी योजना के अनुसार, 2 हजार पैराट्रूपर्स को हवाई रास्ते से इस द्वीप पर उतारा जा सकता है। लेकिन ईरान भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है; उसने खार्ग द्वीप के पास 1 लाख सैनिकों की फौज खड़ी कर दी है और समंदर में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछा दी हैं।
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ट्रंप की चेतावनी और तेल बाजार में मचा कोहराम
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो उसके पावर प्लांट, तेल के कुएं और पानी साफ करने वाले संयंत्रों को खंडहर बना दिया जाएगा। (US-Iran war plan Z) इस तनाव का सीधा असर पूरी दुनिया की जेब पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें जो 28 फरवरी को महज 68 डॉलर प्रति बैरल थीं, अब 71 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। जमीनी जंग का यह गणित बेहद पेचीदा है, क्योंकि 10 लाख सैनिकों वाले ईरान में घुसना अमेरिका के लिए इराक युद्ध से भी कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया एक ऐसी चिंगारी के डर में है जो नक्शे को हमेशा के लिए बदल सकती है।
