UP BJP Reshuffle Plan Before Assembly Elections: उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले ही यहां की राजनीति में हलचल देखने को मिल रही है। इन दिनों सत्ता की गलियारों में एक ही चर्चा है कि क्या बीजेपी अपने संगठन में कोई बड़ा बदलाव करने जा रही है? ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी किसी बड़े फैसले की तैयारी में है। (UP BJP Reshuffle Plan Before Assembly Elections) सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी अपने प्रदेश संगठन में बड़े फेरबदल के मूड में है और इसी सिलसिले में टीम में कई नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। वहीं लंबे समय से पदों पर बैठे नेताओं को बदला जा सकता है। इस कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम में जगह बनाने के लिए दर्जनों नेता लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सक्रिय हो गए हैं।
UP BJP Reshuffle Plan Before Assembly Elections: दो फॉर्मूले पर काम कर रही बीजेपी
बीजेपी इस बदलाव को सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके पीछे साफ रणनीति है। पहला फोकस सामाजिक समीकरण साधने पर है और दूसरा नए चेहरों को मौका देने पर। (UP BJP Reshuffle Plan Before Assembly Elections) बीजेपी चाहती है कि हर वर्ग और हर क्षेत्र को संगठन में प्रतिनिधित्व मिले, ताकि चुनावी मजबूती और बढ़ाई जा सके।
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, और माना जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया जनवरी से शुरू हो सकती है। ऐसे में पार्टी के पास बहुत कम समय बचा है। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर तेजी से रणनीति बनाई जा रही है।
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हाल ही में पार्षदों के मनोनयन में भी पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग साफ दिखाई दी है, जहां पिछड़े, अति पिछड़े और ब्राह्मण वर्ग को साधने की कोशिश की गई। अब यही फॉर्मूला प्रदेश संगठन में भी लागू किया जा सकता है।
अभी बाकी हैं कई जिले
फिलहाल करीब 30 जिला इकाइयों का गठन अभी बाकी है। पार्टी इन्हें जल्द पूरा करना चाहती है, ताकि चुनाव से पहले संगठन पूरी तरह तैयार हो सके। माना जा रहा है कि अप्रैल के मध्य तक यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
अंदरखाने तेज हुई खींचतान
जहां एक ओर नए चेहरे मौका पाने के लिए कोशिश कर रहे हैं, वहीं मौजूदा पदाधिकारी अपनी कुर्सी बचाने में जुटे हैं। सिफारिशों और दबाव के बीच पार्टी नेतृत्व के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोएडा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्धाटन करेंगे। इन कार्यक्रमों के बाद संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। साथ ही आयोग, निगम और बोर्डों में खाली पदों को भरने की कवायद भी जारी है।
