China Fighter Jet Sales: चीन वैश्विक हथियार बाजार में खुद को एक बड़े सप्लायर के तौर पर स्थापित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। इसके तहत उसकी नजर खास तौर पर दक्षिण एशिया पर है, जहां वह अपने लड़ाकू विमानों की बिक्री बढ़ाना चाहता है। इसी रणनीति के तहत चीन ने एशिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सिंगापुर एयर शो में अपने एडवांस्ड फाइटर जेट्स को जोर-शोर से पेश किया है।
China Fighter Jet Sales: सिंगापुर एयर शो में चीन की ताकत का प्रदर्शन
हर दो साल में होने वाले इस एयर शो में चीन ने अपने J-10C मल्टीरोल फाइटर जेट और लेटेस्ट J-35A पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर को प्रदर्शित किया। (China Fighter Jet Sales) इन विमानों को चीन अपनी तकनीकी क्षमता और भविष्य की सैन्य ताकत के प्रतीक के रूप में दिखा रहा है। खासतौर पर J-10C को वह एक “कॉम्बैट-प्रूव्ड” फाइटर के तौर पर प्रचारित कर रहा है।
भारत-पाक टकराव को बना रहा प्रचार का हथियार
चीन J-10C की बिक्री बढ़ाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल मई में हुए सैन्य टकराव का हवाला दे रहा है। इस विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान करता है और पाकिस्तान का दावा है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान J-10C को तैनात किया था। (China Fighter Jet Sales) चीन अब इसी दावे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर अपने फाइटर जेट को युद्ध में आजमाया हुआ बताने की कोशिश कर रहा है।
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J-10C को नहीं मिल पा रहे खरीदार
भारी प्रचार के बावजूद चीन को J-10C के लिए ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अब तक पाकिस्तान ही इसका एकमात्र खरीदार बना हुआ है। चीन ने ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया, कोलंबिया और ईरान जैसे देशों से बातचीत जरूर की है, लेकिन किसी के साथ ठोस सौदा नहीं हो सका है। इसके साथ ही चीन अपने नए J-35A को भी संभावित ग्राहकों के सामने पेश कर रहा है।
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पाकिस्तान के साथ बना JF-17 भी चर्चा में
एयर शो में चीन का तीसरा प्रमुख फाइटर JF-17 भी दिखाया जा रहा है, जिसे पाकिस्तान के साथ मिलकर विकसित किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और लीबिया जैसे देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। (China Fighter Jet Sales) पाकिस्तान ने भारत के साथ टकराव के दौरान JF-17 से राफेल गिराने का दावा किया था, जिसे बाद में गलत साबित कर दिया गया।
प्रोपेगैंडा के सहारे बाजार बनाने की कोशिश
इन दावों के बावजूद चीन J-10C और JF-17 की संभावनाओं को लगातार बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। वह दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हथियारों के मुकाबले कम कीमत, तेज डिलीवरी और कम शर्तों का वादा कर नए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश में लगा है।
