US fighter jets down Iran update: पिछले पांच हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब उस खौफनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसे पेंटागन दशकों तक नहीं भूल पाएगा। पिछले 24 घंटे अमेरिकी सेना के लिए किसी ‘बुरे सपने’ से कम नहीं रहे। जिस ‘एयर सुपीरियरिटी’ (हवाई सर्वोच्चता) का दंभ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भर रहे थे, उसे ईरान ने मिट्टी में मिला दिया है। महज एक दिन के भीतर अमेरिका ने अपने दो कीमती फाइटर जेट खो दिए हैं, जबकि रेस्क्यू मिशन पर निकले हेलीकॉप्टरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में यह पहली बार है जब अमेरिकी वायुसेना को इतनी करारी चोट लगी है।
US fighter jets down Iran update: आसमान से गिरा ‘स्ट्राइक ईगल’, एक पायलट अब भी लापता
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान की सीमा के भीतर सैन्य अभियान चला रहा एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट क्रैश हो गया। इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, एक को तो सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन दूसरा पायलट अब भी लापता है। आशंका जताई जा रही है कि वह ईरान के दुर्गम इलाकों में कहीं छिपा है। इसी दौरान कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे एक A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को भी निशाना बनाया गया, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। ईरानी मीडिया ने तो ‘कैंप बुहरिंग’ पर हमले की तस्वीरें जारी कर एक भारी-भरकम चिनूक (CH-47) हेलीकॉप्टर के भी तबाह होने का दावा किया है।
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लापता पायलट के लिए ‘इनामी शिकार’
ईरान ने अब इस जंग को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है। लापता अमेरिकी पायलट को पकड़ने के लिए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिम इलाके में एक विशाल ‘सर्च ऑपरेशन’ शुरू किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे युद्ध का ‘टर्निंग पॉइंट’ बताते हुए कहा कि अब लड़ाई तख्तापलट से हटकर ‘अमेरिकी पायलटों के शिकार’ पर केंद्रित हो गई है। ईरानी अधिकारियों ने अपने नागरिकों के लिए बड़े इनाम की घोषणा की है जो भी अमेरिकी पायलट को जिंदा पकड़ेगा या मारेगा, उसे मालामाल कर दिया जाएगा।
रेस्क्यू हेलीकॉप्टरों पर बारूद की बारिश
लापता पायलट को बचाने की कोशिशें भी नाकाम साबित हो रही हैं। रेस्क्यू मिशन के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक (HH-60W जॉली ग्रीन II) हेलीकॉप्टरों पर ईरान ने इतनी भारी गोलाबारी की कि उन्हें मिशन अधूरा छोड़कर भागना पड़ा। इस हमले में कुछ अमेरिकी जवान घायल हुए हैं। इसके अलावा, एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को भी तकनीकी खराबी या हमलों के डर से इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है। यह घटनाएं ट्रंप के उन दावों की हवा निकाल रही हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है।
ट्रंप की बेरुखी: ‘यह जंग है, ऐसा होता रहता है’
इतने बड़े नुकसान के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आए। उन्होंने इन घटनाओं को तवज्जो न देते हुए कहा, “यह जंग है और ऐसा होता रहता है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि इन विमानों के गिरने से ईरान के साथ बातचीत की मेज पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के मोबाइल मिसाइल सिस्टम और ग्राउंड फायर ने अमेरिका के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा
इस ताजा सैन्य टकराव का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं है। कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों और होर्मुज स्ट्रेट में जारी अनिश्चितता ने तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल ला दिया है। पाकिस्तान द्वारा की जा रही सीजफायर की कोशिशों को भी तब झटका लगा जब ईरान ने बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एक लापता पायलट की किस्मत यह तय करेगी कि यह जंग थमेगी या फिर एक महाविनाशकारी तीसरे विश्व युद्ध में तब्दील हो जाएगी।
