By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
नौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरेंनौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरेंनौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरें
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • राजनीति
  • लाइफ स्टाइल
  • प्रौद्योगिकी
Search
  • About
  • Contact
  • Privacy Policy
© 2025 naudunia.com
Reading: Trump Harvard Lawsuit 2026: ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रवेश रिकॉर्ड माँगने वाला मुकदमा खारिज
Share
Sign In
Notification Show More
Aa
नौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरेंनौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरें
Aa
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • राजनीति
  • लाइफ स्टाइल
  • प्रौद्योगिकी
Search
  • विदेश
  • मनोरंजन
  • स्पोर्ट्स
  • राजनीति
  • लाइफ स्टाइल
  • प्रौद्योगिकी
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
नौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरें > News > विदेश > Trump Harvard Lawsuit 2026: ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रवेश रिकॉर्ड माँगने वाला मुकदमा खारिज
विदेश

Trump Harvard Lawsuit 2026: ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रवेश रिकॉर्ड माँगने वाला मुकदमा खारिज

Puja Shrivastava
Last updated: 2026/11/03 at 11:51 पूर्वाह्न
Puja Shrivastava
Share
9 Min Read
WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1 1
SHARE

Trump Harvard Lawsuit 2026: अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के बीच चल रहे कानूनी विवाद में विश्वविद्यालय को एक और राहत मिली है। मैसाचुसेट्स की संघीय जिला अदालत ने ट्रंप प्रशासन का वह मुकदमा खारिज कर दिया है, जिसके माध्यम से अमेरिकी न्याय विभाग हार्वर्ड से हजारों छात्रों के प्रवेश संबंधी व्यक्तिगत रिकॉर्ड प्राप्त करना चाहता था। सरकार का तर्क था कि इन दस्तावेजों के आधार पर यह जाँचना आवश्यक है कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को प्रवेश देते समय अब भी नस्ल को आधार तो नहीं बना रहा।

Contents
Trump Harvard Lawsuit 2026: 5 साल के प्रवेश रिकॉर्ड और छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी माँग रही थी सरकारअदालत ने कहा—सीधे मुकदमा नहीं कर सकती सरकार2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवेश में नस्ल को आधार बनाने पर लगाई थी रोकट्रंप और हार्वर्ड के बीच पहले से कई कानूनी विवादहार्वर्ड में अश्वेत छात्रों का अनुपात घटा, प्रवेश नीति पर बहस जारीसरकार दोबारा अदालत जा सकती है

लेकिन संघीय न्यायाधीश म्योंग जौन ने दो नवंबर को दिए अपने फैसले में कहा कि न्याय विभाग अदालत पहुँचने से पहले कानून द्वारा निर्धारित आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने में विफल रहा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमा खारिज होने का अर्थ हार्वर्ड की प्रवेश नीति को पूरी तरह वैध घोषित करना नहीं है। सरकार आवश्यक प्रक्रिया अपनाकर फिर कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

Trump Harvard Lawsuit 2026: 5 साल के प्रवेश रिकॉर्ड और छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी माँग रही थी सरकार

ट्रंप प्रशासन ने फरवरी 2026 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। न्याय विभाग और शिक्षा विभाग का कहना था कि विश्वविद्यालय से पिछले पाँच वर्षों के विस्तृत प्रवेश रिकॉर्ड माँगे गए थे, लेकिन उसने आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। (Trump Harvard Lawsuit 2026) सरकार आवेदकों की नस्लीय एवं जातीय पृष्ठभूमि, शैक्षणिक अंक, प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम, व्यक्तिगत निबंध, पाठ्येतर गतिविधियों, आंतरिक मूल्यांकन और अंतिम प्रवेश निर्णयों से संबंधित जानकारी चाहती थी।

- Advertisement -

Also Read –Crude Oil Price Crash 2026: ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में 8 फीसदी की भारी गिरावट, भारत को मिल सकती है बड़ी आर्थिक राहत

यह माँग केवल स्नातक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं थी, बल्कि हार्वर्ड के मेडिकल और लॉ स्कूल से संबंधित रिकॉर्ड भी इसके दायरे में थे। प्रशासन का कहना था कि केवल समेकित आँकड़ों से यह निर्धारित करना संभव नहीं है कि किसी विशेष छात्र को प्रवेश देने में नस्ल की भूमिका रही या नहीं।

दूसरी ओर हार्वर्ड ने कहा कि उसने उपलब्ध कराने योग्य दस्तावेज दिए हैं और सरकार हजारों आवेदकों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी माँग रही है।

अदालत ने कहा—सीधे मुकदमा नहीं कर सकती सरकार

संघीय न्यायाधीश म्योंग जौन ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी नागरिक अधिकार कानून के अंतर्गत कार्रवाई करने से पहले सरकार को संबंधित शैक्षणिक संस्थान को कथित अनुपालन विफलता की स्पष्ट जानकारी देनी होती है। (Trump Harvard Lawsuit 2026) इसके बाद स्वैच्छिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है। न्याय विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि संस्थान की किस कार्रवाई को कानून का उल्लंघन माना जा रहा है और अनुपालन नहीं होने पर मुकदमा दायर किया जा सकता है।

Also Read –Europe Gen Z Protests: यूरोप की सड़कों पर Gen-Z का विद्रोह: फ्रांस से जर्मनी और स्विट्जरलैंड तक क्यों भड़का युवाओं का गुस्सा?

अदालत ने पाया कि सरकार ने इन शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा किए बिना न्यायिक हस्तक्षेप माँग लिया। इसी आधार पर मुकदमा खारिज कर दिया गया। न्यायाधीश ने यह निर्णय नहीं दिया कि हार्वर्ड ने नस्ल के आधार पर भेदभाव किया है या नहीं। उन्होंने यह भी तय नहीं किया कि सरकार भविष्य में व्यक्तिगत प्रवेश रिकॉर्ड प्राप्त करने की कानूनी पात्रता रखती है या नहीं।

2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवेश में नस्ल को आधार बनाने पर लगाई थी रोक

इस विवाद की पृष्ठभूमि जून 2023 का अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला है। उस समय अदालत ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना की नस्ल-सचेत प्रवेश व्यवस्थाओं को असंवैधानिक माना था। इससे अमेरिकी उच्च शिक्षा में लंबे समय से लागू ‘अफर्मेटिव एक्शन’ की व्यवस्था को बड़ा झटका लगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से वंचित नस्लीय समूहों को उच्च शिक्षा में अवसर उपलब्ध कराना था। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रवेश निर्णयों में नस्ल को सीधे आधार नहीं बना सकते, हालांकि किसी विद्यार्थी के व्यक्तिगत जीवन पर नस्लीय भेदभाव के प्रभाव से संबंधित अनुभवों पर सीमित कानूनी दायरे में विचार संभव है।

ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ विश्वविद्यालय प्रवेश के दूसरे मानदंडों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नस्ल को महत्व दे रहे हैं। हार्वर्ड इन आरोपों का विरोध करता रहा है।

ट्रंप और हार्वर्ड के बीच पहले से कई कानूनी विवाद

यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के बीच चल रहे व्यापक टकराव का हिस्सा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था, नियुक्तियों, विविधता संबंधी नीतियों और परिसर में कथित भेदभाव को लेकर कई बार आपत्ति जताई है। उनके प्रशासन ने हार्वर्ड को मिलने वाले दो अरब डॉलर से अधिक के संघीय शोध अनुदानों को रोकने, विदेशी छात्रों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने और यहूदी तथा इजरायली छात्रों के कथित उत्पीड़न के मामले में भी कानूनी कार्रवाई की कोशिश की थी।

विश्वविद्यालय ने इन कार्रवाइयों को अदालत में चुनौती दी और विभिन्न मामलों में उसे राहत मिली। हार्वर्ड का आरोप है कि सरकार विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और शैक्षणिक निर्णयों को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप बदलने का दबाव बना रही है। प्रशासन इन कदमों को संघीय नागरिक अधिकार कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की कार्रवाई बताता है।

हार्वर्ड में अश्वेत छात्रों का अनुपात घटा, प्रवेश नीति पर बहस जारी

नस्ल-सचेत प्रवेश व्यवस्था पर सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिबंध के बाद हार्वर्ड में प्रवेश पाने वाले विभिन्न सामाजिक समूहों के अनुपात में भी बदलाव दिखाई दिया है। विश्वविद्यालय के नवीनतम उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2030 की स्नातक कक्षा में अश्वेत छात्रों का अनुपात लगभग 9.3 प्रतिशत है, जबकि पिछली प्रवेश कक्षा में यह 11.5 प्रतिशत था।

इन आँकड़ों से प्रवेश व्यवस्था में आए सामाजिक बदलाव का संकेत मिलता है, लेकिन केवल इसी आधार पर किसी कानूनी उल्लंघन या भेदभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

यह बहस अब भी जारी है कि उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करते समय शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत परिस्थितियों और ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं के बीच किस प्रकार संतुलन बनाया जाना चाहिए।

सरकार दोबारा अदालत जा सकती है

दो नवंबर के फैसले के बाद हार्वर्ड के प्रवेश रिकॉर्ड से संबंधित मौजूदा मुकदमा समाप्त हो गया है, लेकिन कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। न्याय विभाग यदि निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करता है और विश्वविद्यालय के स्वैच्छिक अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाता है, तो वह दोबारा मुकदमा दायर कर सकता है। दूसरी ओर हार्वर्ड के लिए भी यह निर्णय उसकी प्रवेश व्यवस्था को किसी भविष्य की जाँच से स्थायी संरक्षण नहीं देता।

इस विवाद का व्यापक महत्व विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता, छात्रों की निजी जानकारी की सुरक्षा और संघीय सरकार की नियामक शक्तियों से जुड़ा है। अमेरिकी अदालत ने फिलहाल इतना स्पष्ट किया है कि सरकार के पास जाँच करने का अधिकार होना और उस अधिकार का इस्तेमाल करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना दो अलग-अलग प्रश्न हैं।

सरकार की जाँच वैध हो सकती है, लेकिन उसे कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के भीतर ही आगे बढ़ना होगा।

You Might Also Like

Crude Oil Price Crash 2026: ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में 8 फीसदी की भारी गिरावट, भारत को मिल सकती है बड़ी आर्थिक राहत

US-Iran War: ईरान में फिर शुरू हुई तबाही? ट्रंप के इनकार के अगले ही दिन केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला, गूंजे धमाके

Bangladesh Anti India Protest: ‘दिल्ली ना ढाका’ के नारों से गूंजा बांग्लादेश, भारत के खिलाफ किसने खोला मोर्चा?

US-Iran Peace Deal: ईरान यूरेनियम का भंडार देश से बाहर भेजेगा? अमेरिका के साथ समझौते का नया प्रस्ताव

Israel Election 2026: इजरायल में अरब पार्टियों ने पलटा सत्ता का खेल, 19 सीटों ने बढ़ाई नेतन्याहू की मुश्किलें

TAGGED: #Trump Harvard Lawsuit 2026

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1 Crude Oil Price Crash 2026: ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में 8 फीसदी की भारी गिरावट, भारत को मिल सकती है बड़ी आर्थिक राहत
Next Article WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1 2 Bigg Boss 20 Update: फूट-फूटकर रोए कॉजी, जानिए क्या हुआ फैमिली टॉस्क में
Leave a comment Leave a comment

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Latest News

WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1 2
Bigg Boss 20 Update: फूट-फूटकर रोए कॉजी, जानिए क्या हुआ फैमिली टॉस्क में
मनोरंजन 24 मिनट ago
WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1
Crude Oil Price Crash 2026: ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में 8 फीसदी की भारी गिरावट, भारत को मिल सकती है बड़ी आर्थिक राहत
विदेश 2 घंटे ago
WhatsApp Image 2026 05 23 at 2.07.33 PM 1779525490942 v ezremove 1
US-Iran War: ईरान में फिर शुरू हुई तबाही? ट्रंप के इनकार के अगले ही दिन केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला, गूंजे धमाके
विदेश 2 घंटे ago
2061076 india skills report 2026202611021634120000 1
Delhi-NCR Diwali 2026: दिल्ली-NCR में दिवाली पर सिर्फ दो दिन जलेंगे ग्रीन पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने तय की समय सीमा; 300 मीटर का नियम भी लागू !
राष्ट्रीय समाचार 20 घंटे ago
neha bora 1793611767193 qkvk 1793611767428 BiC8 b7a54f30 1ed0 40fa ad57 1ade0fffff8e rEKu
Delhi Police Protest: दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर वर्दी में पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन, तबादलों के खिलाफ जताई नाराजगी; नेहा बोरा ने कसा तंज !
राष्ट्रीय समाचार 21 घंटे ago
2061014 befunky2026 10 114 0 42
ShahRukh Khan King Movie: जन्मदिन पर शाहरुख ने फैंस को दिया तोहफा, ‘तू मिल जाए’ गाने पर क्यों उठी बॉयकॉट की मांग?
मनोरंजन 22 घंटे ago
नौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरेंनौ दुनिया : देश विदेश की बड़ी खबरें
Follow US
© 2025 All Rights Reserved.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Contact
  • About
adbanner
AdBlock Detected
Our site is an advertising supported site. Please whitelist to support our site.
Okay, I'll Whitelist
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?