Pune Liquor Ban: महाराष्ट्र में गणेश उत्सव (Ganesh Festival) की धूम रहती है और 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर हर तरफ तैयारियां होती हैं। इसी बीच पुणे जिला प्रशासन की ओर से गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री (Liquor Sale Ban) पर 10 दिनों तक रोक लगाने का आदेश जारी किया गया। मामला जब बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) पहुंचा तो अदालत ने जिला प्रशासन के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा सवाल
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर सिर्फ पुणे जिले को ही शराब की बिक्री पर रोक के लिए क्यों चुना गया। अदालत ने कहा कि मुंबई समेत महाराष्ट्र के किसी दूसरे जिले में ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। कोर्ट ने प्रशासन को साफ तौर पर कहा कि उसे यह आदेश वापस ले लेना चाहिए, वरना अदालत को इस मामले में दखल देना पड़ेगा।
शराब कारोबारियों ने दी थी चुनौती
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पुणे जिला प्रशासन के फैसले के खिलाफ होटल मालिकों और शराब की दुकानों के मालिकों के संगठनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। इन संगठनों ने पुणे कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव के दौरान लगातार 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया था। मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि जिन लोगों के पास शराब बेचने का वैध लाइसेंस है, उन्हें 10 दिनों तक अपना कारोबार करने से रोकना पूरी तरह मनमाना है।
सिर्फ पुणे को क्यों चुना?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुणे जिला प्रशासन के फैसले को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की। बेंच ने सवाल किया कि सिर्फ पुणे को चुनने के पीछे आखिर क्या तर्क है। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसी प्रथा की निंदा करता है और इसे पुणे के लोगों के लिए एक कलंक बताया। अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि सिर्फ पुणे के लोग ही शराब पीने के बाद खराब व्यवहार करते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरे महाराष्ट्र में से केवल एक जिले को चुनकर इस तरह की पाबंदी लगाना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने पुणे कलेक्टर की ओर से पेश वकील से साफ कहा कि वह अदालत को बताए कि क्या जिला प्रशासन अपना आदेश वापस लेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो अदालत उचित आदेश पारित करेगी। इस दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब शराब की दुकानों और अन्य कारोबारियों के पास वैध लाइसेंस हैं तो उन्हें 10 दिनों तक अपना कारोबार करने से रोकने का आधार क्या है। बेंच ने ऐसे प्रतिबंध को मनमाना बताया।
कोर्ट ने शराब की लत को लेकर भी की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में शराब पर 10 दिनों की पाबंदी के संभावित असर की भी बात की। अदालत ने कहा कि शराब की लत वाले लोगों को अचानक इतने लंबे समय तक शराब नहीं मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी ने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर उन्हें 10 दिनों तक शराब नहीं मिली तो वे अस्पतालों में भर जाएंगे।
अब प्रशासन के फैसले पर नजर
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पुणे जिला प्रशासन के शराब बिक्री पर 10 दिनों की पाबंदी वाले आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने प्रशासन से आदेश वापस लेने को लेकर अपना रुख साफ करने को कहा है और ऐसा नहीं होने पर उचित आदेश पारित करने की बात कही है। गणेश उत्सव के दौरान शराब बिक्री पर लगाए गए इस प्रतिबंध को होटल मालिकों और शराब कारोबारियों के संगठनों ने चुनौती दी है, जिस पर अब आगे की कार्रवाई प्रशासन और अदालत के रुख पर निर्भर करेगी।
