France-India Protest Connection: भारत में एसआईआर (SIR) में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विरोध-प्रदर्शन किया था। (France-India Protest Connection) इस प्रदर्शन में कई विपक्षी दलों ने भी उसका साथ दिया। अब भारत से हजारों मील दूर फ्रांस में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारत के प्रदर्शन से इसके कथित कनेक्शन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
France-India Protest Connection: फ्रांस दंगों और भारत के प्रदर्शन के बीच कनेक्शन
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस में हुए दंगों और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच संबंध सामने आए हैं। (France-India Protest Connection) रिपोर्ट में एक ऐसे नेटवर्क की ओर इशारा किया गया है, जो अलग-अलग देशों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को जोड़ने और उन्हें बढ़ावा देने का काम कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, नौ देशों में 101 ऐसे संगठनों की पहचान की गई है, जो एक रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम (Red-Green Protest Ecosystem) का हिस्सा हैं। रिपोर्ट में रेड-ग्रीन से आशय इस्लामी और कम्युनिस्ट समूहों से बताया गया है। (France-India Protest Connection) दावा है कि ये संगठन यूरोप में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को व्यवस्थित करने, आयोजित करने और उन्हें बढ़ावा देने में भूमिका निभा रहे हैं।
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किस संगठन ने जोड़े फ्रांस और भारत के प्रदर्शन?
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में फ्रांस स्थित इंडियन एलायंस पेरिस (Indian Alliance Paris) का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह संगठन फ्रांस और भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के संदेशों को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंडियन एलायंस पेरिस का संबंध मैनहट्टन स्थित पीपल्स फोरम (People’s Forum) से भी है। इसी कड़ी में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (Progressive International) का भी जिक्र किया गया है।
एक ही मंच पर फ्रांस, भारत और अल्बानिया के प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के अंतरराष्ट्रीय पूंजीवाद विरोधी संगठन ने 16 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर एक ब्रीफिंग के दौरान फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को एक साथ जोड़कर पेश किया।
इस ब्रीफिंग में सवाल उठाया गया कि क्या ये नए विद्रोह संगठित होकर इतनी ताकत हासिल कर सकते हैं कि उन परिस्थितियों को बदल सकें, जिनकी वजह से ये विरोध प्रदर्शन पैदा हुए हैं। (France-India Protest Connection) यानी रिपोर्ट में अलग-अलग देशों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों को एक बड़े वैश्विक विरोध आंदोलन के हिस्से के तौर पर देखने की कोशिश की गई है।
कौन दे रहा है फंड और समर्थन?
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूरोप में चल रहे इस असंतोष को कम्युनिस्ट समर्थक संगठनों के एक नेटवर्क से भी बढ़ावा मिल रहा है। (France-India Protest Connection) रिपोर्ट में ब्रेकथ्रू न्यूज (Breakthrough News), कोडपिंक (CodePink) और पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन (Party for Socialism and Liberation) जैसे संगठनों का नाम लिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों को शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम (Neville Roy Singham) का फंड और समर्थन प्राप्त है। यही दावा इस पूरी रिपोर्ट को और ज्यादा चर्चा में ला रहा है, क्योंकि इसमें यूरोप में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को संगठनों और फंडिंग के एक नेटवर्क से जोड़ने की बात कही गई है।
जोडी इवांस ने क्या कहा?
14 अक्टूबर को ब्रेकथ्रू न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में नेविल रॉय सिंघम की पत्नी और कोडपिंक की सह-संस्थापक जोडी इवांस (Jodie Evans) ने भी फ्रांस, स्पेन और भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया। (France-India Protest Connection) उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि लोग फ्रांस, स्पेन और भारत की ओर देखें और खुद से सवाल करें कि हम कहां हैं और हम सड़कों पर क्यों नहीं हैं।
फिलहाल इस रिपोर्ट में किए गए दावों ने भारत के एसआईआर विरोध (SIR Protest), फ्रांस के हिंसक प्रदर्शन (France Protest) और यूरोप में चल रहे दूसरे विरोध प्रदर्शनों के बीच कथित संबंध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए ये दावे इसी रिपोर्ट में बताए गए संगठनों, उनके संबंधों और गतिविधियों पर आधारित हैं।
