Pakistan News: आतंकवाद को पनाह देने के दुनियाभर के आरोपों से घिरे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप से सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तानी सेना श्रीलंका के साथ मिलकर आतंकवाद-रोधी संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही है। इस अभ्यास को लेकर विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों के बीच लगातार तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है, क्योंकि जिस देश पर खुद आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हों, वही अब दूसरों को आतंकवाद से लड़ने की ट्रेनिंग प्रदान कर रहा है।
एक पाकिस्तानी सेना की मीडिया के मुताबिक, ‘शेक हैंड्स-II’ नाम से यह दो सप्ताह का संयुक्त अभ्यास पाकिस्तान के तरबेला क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। इसमें पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) और श्रीलंकाई सेना की स्पेशल फोर्सेज भी हिस्सा ले रही हैं। ISPR का दावा है कि इस अभ्यास का मकसद आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और गहरा करना है।
Pakistan News: पाकिस्तान के दावे और सच्चाई में अंतर
पाकिस्तान का कहना है कि उसके श्रीलंका के साथ लंबे वक़्त से रक्षा संबंध रहे हैं और उसने श्रीलंका को तमिल अलगाववादी विद्रोह से निपटने में मदद किया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़े पाकिस्तान के दावों पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। मार्च 2026 में अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 150 से ज्यादा आतंकवादी संगठन एक्टिव हैं, जिनमें से कई को सुरक्षित पनाहगाह मिलती रही है।
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पाकिस्तान की राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (NACTA) ने अप्रैल 2026 तक 91 संगठनों को प्रतिबंधितऐलान किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उठाया गया है, न कि वास्तविक कार्रवाई के तहत।
UN की ब्लैक लिस्ट में पाक से जुड़े आतंकी संगठन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति ने भी पाकिस्तान से जुड़े या वहां एक्टिव लगभग 150 आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को ब्लैकलिस्ट किया हुआ है। इनमें अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और लश्कर-ए-झांगवी जैसे खतरनाक संगठन शामिल हैं।
भारत काफी लंबे वक़्त से पाकिस्तान पर आरोप लगाता आ रहा है कि वह आतंकवाद को अपनी रणनीति के अंतर्गत प्रयोग करता है और प्रॉक्सी वॉर के माध्यम से भारत को निशाना बनाता है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने की मांग भी संयुक्त राष्ट्र में उठाई है।
श्रीलंका के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग
इस संयुक्त अभ्यास को पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के रणनीतिक हलकों में इसे लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस तरह के सैन्य अभ्यास भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की चिंता
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े आरोपों के बावजूद पाकिस्तान का इस तरह के अभ्यास करना एक “दोहरे मापदंड” को दर्शाता है। उनका मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने अंदर सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसके ऐसे प्रयासों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान और श्रीलंका का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास केवल सैन्य सहयोग का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा के नजरिए से भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है, जिस पर पूरे विश्व की निगाहें टिकी हुई हैं।
