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Nepal Flash Floods: बचने के लिए 5 मिनट भी…महीनों पहले चीन से मांगी थी अर्ली वॉर्निंग, नेपाल में तबाही का जिम्मेदार कौन?

Puja Shrivastava
Last updated: 2026/08/31 at 1:43 अपराह्न
Puja Shrivastava
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8 Min Read
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Nepal Flash Floods: नेपाल और चीन (China) की सीमा से लगे इलाके में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक कम से कम 800 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

Contents
आपदा से एक महीने पहले हुई थी बैठकनेपाल को 5 मिनट का भी समय नहीं मिलापिछले साल भी नेपाल ने उठाई थी ऐसी ही चिंतासमय पर जानकारी देने का दावाजिनपिंग ने सर्वे में तेजी लाने को कहाग्लेशियर ढहने से आई थी फ्लैश फ्लड

नेपाल इस भीषण आपदा से उबरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस त्रासदी ने चीन के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (Early Warning System) और पड़ोसी देश के साथ आपदा से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के खतरे को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन उन्हें समय रहते जरूरी जानकारी नहीं मिल सकी।

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आपदा से एक महीने पहले हुई थी बैठक

विनाशकारी फ्लैश फ्लड आने से करीब एक महीने पहले चीन और नेपाल के अधिकारियों के बीच नेपाल की राजधानी में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में बाढ़ (Flood), मौसम (Weather) और ग्लेशियर (Glacier) से जुड़े खतरों की निगरानी और उनसे निपटने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग पर चर्चा की गई थी।

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हालांकि, नेपाली अधिकारियों का कहना है कि बैठक के बावजूद उन्हें चीन की ओर से वह जरूरी जानकारी नहीं मिली, जिसकी उन्हें जरूरत थी। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन (Flood Forecasting Division) के हाइड्रोलॉजिस्ट सौहार्द्र जोशी (Subhadra Joshi) के मुताबिक, नेपाल को खासतौर पर ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और संवेदनशील इलाकों में होने वाली गतिविधियों की जानकारी पहले से चाहिए थी।

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उनका कहना था कि अगर ग्लेशियरों में किसी तरह की शुरुआती हलचल होती है या उस इलाके में कोई खतरा पैदा होने के संकेत मिलते हैं तो नेपाल को इसकी जानकारी कुछ समय पहले मिलनी चाहिए।

नेपाल को 5 मिनट का भी समय नहीं मिला

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (National Disaster Risk Reduction and Management Authority) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धरम राज उप्रेती (Dharam Raj Uprety) ने भी आपदा से पहले चेतावनी नहीं मिलने को लेकर चिंता जताई।

उनके मुताबिक, लोगों को आपदा आने से पहले पांच मिनट का भी समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऊंचे पर्वतीय इलाकों में नेपाल के पास पर्याप्त वेदर स्टेशन (Weather Stations) नहीं हैं और इसकी एक बड़ी वजह सीमा पार डेटा साझा करने के लिए मजबूत व्यवस्था का अभाव है।

धरम राज उप्रेती के मुताबिक, देशों के बीच मौसम और जलवायु से जुड़ी जानकारी सीमित स्तर पर साझा की जाती है। ऐसे में हिमालयी इलाकों में पैदा होने वाले खतरों की समय रहते पहचान करना और लोगों को चेतावनी देना मुश्किल हो जाता है।

पिछले साल भी नेपाल ने उठाई थी ऐसी ही चिंता

यह पहली बार नहीं है जब नेपाल ने चीन के साथ आपदा से जुड़ी जानकारी साझा करने को लेकर चिंता जताई हो। पिछले साल भी नेपाली अधिकारियों ने चीनी पक्ष के साथ बैठक में इसी तरह का मुद्दा उठाया था।

तिब्बत (Tibet) क्षेत्र में चीन की तरफ एक सुप्राग्लेशियल झील (Supraglacial Lake) के फटने से फ्लैश फ्लड आई थी। इस घटना में दोनों देशों में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग लापता हो गए थे।

उस घटना के बाद भी नेपाली अधिकारियों ने चीन के साथ बैठक के दौरान समय रहते जानकारी और बेहतर डेटा शेयरिंग (Data Sharing) की जरूरत पर चिंता जताई थी। इसके बावजूद अब एक बार फिर बड़े स्तर पर आई इस आपदा ने दोनों देशों के बीच सीमा पार आपदा संबंधी जानकारी साझा करने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समय पर जानकारी देने का दावा

वहीं, चीन ने नेपाल के आरोपों और चिंताओं के बीच कहा है कि उसकी ओर से जरूरी जानकारी समय पर साझा की गई थी। नेपाल में चीन के दूतावास (Chinese Embassy in Nepal) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बयान जारी कर कहा कि दोनों देश इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में हैं।

दूतावास के मुताबिक, मई में हुई बैठक के दौरान सीमा पार आपदा से जुड़ी जानकारी साझा करने को लेकर दोनों देशों ने काफी प्रगति की थी। चीन की ओर से यह भी कहा गया कि मौजूदा तकनीक की सीमाओं के भीतर ग्लेशियरों और दूसरे खतरनाक इलाकों की निगरानी, आकलन और विश्लेषण के लिए हर संभव कोशिश की गई।

चीनी दूतावास का दावा है कि जरूरी जानकारी नेपाली पक्ष के साथ साझा की गई थी। दूतावास ने यह भी माना कि हिमालयी क्षेत्र में निगरानी करना विशेषज्ञों के लिए कई तरह की चुनौतियां पैदा करता है, लेकिन इसके बावजूद डेटा समय पर साझा किया गया।

जिनपिंग ने सर्वे में तेजी लाने को कहा

इस आपदा के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने तिब्बती पठार (Tibetan Plateau) में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों (Glacial Lakes) के सर्वे को तेज करने का आह्वान किया है, ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं को रोका जा सके।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party) ने भी निगरानी और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद आपस में जुड़े प्राकृतिक खतरों की पहचान करने और समय रहते चेतावनी देने की क्षमता को बेहतर बनाना है।

ग्लेशियर ढहने से आई थी फ्लैश फ्लड

26 अगस्त को आई यह विनाशकारी फ्लैश फ्लड ग्लेशियर के ढहने से शुरू हुई थी। ग्लेशियर के टूटने के बाद बर्फ, कीचड़, चट्टानें और तेज रफ्तार पानी घाटी से होते हुए नीचे की ओर बढ़ गया।

तेज बहाव ने अपने रास्ते में आने वाली कई बस्तियों को तबाह कर दिया। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा का व्यापक असर देखने को मिला और कई इलाके इसकी चपेट में आ गए।

सोमवार तक इस आपदा में नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में कम से कम 800 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 3 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी इलाकों में ग्लेशियरों से पैदा होने वाले खतरों, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और नेपाल व चीन के बीच समय पर डेटा साझा करने की जरूरत को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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