Nepal Flash Flood: नेपाल के हिमालयी इलाके में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने गुरुवार को बताया कि करीब 300 भारतीय उन हजारों लोगों में शामिल हैं, जिनका अब तक पता नहीं चल पाया है। यह संख्या शुरुआती सरकारी आंकड़ों में बताए गए 100 से ज्यादा भारतीयों के मुकाबले काफी अधिक है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, रासुवा जिले में आई बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 162 तक पहुंच गया है। वहीं नेपाल-चीन सीमा के दूसरी तरफ तिब्बत में भी लोगों के लापता होने और मौतों की खबर है। व्यापक आपदा को लेकर अलग-अलग इलाकों से आने वाले आंकड़ों को जुटाने का काम अभी जारी है।
Nepal Flash Flood: 300 भारतीयों के लापता होने से बढ़ी चिंता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि करीब 300 भारतीय नागरिक उन लोगों में शामिल हैं, जिनके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार अभी आपदा की पूरी भयावहता का आकलन कर रही है और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर संबंधित देशों के दूतावासों के संपर्क में है।
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बाढ़ प्रभावित रासुवा क्षेत्र कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी वजह से बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु और पर्यटक भी इस आपदा की चपेट में आए हैं।
हालांकि, अलग-अलग समय पर सामने आए आंकड़ों में अंतर है। गुरुवार की सुबह तक नेपाल के कुछ आधिकारिक/स्थानीय आंकड़ों में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की बात सामने आई थी, जबकि बाद में विदेश मंत्री खनाल ने यह संख्या करीब 300 बताई। इसलिए लापता भारतीयों का अंतिम आंकड़ा अभी सत्यापन के दौर में है।
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
फ्लैश फ्लड ने नेपाल के रासुवा इलाके में भोटेकोशी नदी और आसपास की घाटियों में अचानक तबाही मचा दी। शुरुआती तौर पर भूकंप को संभावित कारण माना गया था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक आकलनों में हिमनद/बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने से पैदा हुए लैंडस्लाइड और उसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में मलबा आने को प्रमुख कारण माना गया है।
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मलबे और पानी की तेज लहर ने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को बहा दिया। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था टूटने से राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
162 मौतें, सैकड़ों अब भी लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार रासुवा में मृतकों की संख्या 162 हो चुकी है। वहीं व्यापक हिमालयी आपदा में नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल और चीन में कुल मिलाकर करीब 1,500 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं।
आपदा के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर भी संकट
भोटेकोशी क्षेत्र कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। बाढ़ आने के समय कई भारतीय श्रद्धालु और पर्यटक इसी इलाके में मौजूद थे।
ईशा फाउंडेशन ने भी बताया था कि उसके 77 सदस्य प्रभावित क्षेत्र के एक इमिग्रेशन सेंटर से लापता बताए गए थे, जबकि सद्गुरु ने कहा था कि 495 सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं।
इसके अलावा तमिलनाडु के पर्यटकों और पश्चिम बंगाल के एक 32 सदस्यीय समूह के भी प्रभावित क्षेत्र में फंसे या लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है।
कर्नाटक के दो लोगों को सुरक्षित निकाला गया
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के दो लोगों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाला गया है। उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है।
यह घटनाक्रम इस बात की उम्मीद भी बढ़ाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद राहत एवं बचाव दल दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने में सफल हो सकते हैं।
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
+977 981 032 6117
दूतावास के अनुसार इन नंबरों पर WhatsApp के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
अभी सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की सही संख्या पता करना और दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना है। संचार और सड़क संपर्क टूटने के कारण कई लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों की सुरक्षा के लिए संबंधित देशों के दूतावासों के साथ संपर्क बढ़ाया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी कहा है कि सरकार अभी आपदा के वास्तविक पैमाने का आकलन कर रही है।
यानी फिलहाल 300 भारतीयों के लापता होने का आंकड़ा बेहद गंभीर है, लेकिन इसे अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता। रेस्क्यू अभियान और ग्राउंड वेरिफिकेशन के साथ यह संख्या घट या बढ़ सकती है।
