Texas Hanuman Statue: अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानबाजी के बीच बहस का केंद्र बन गई है। शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर की प्रसिद्ध ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ को लेकर कंजर्वेटिव कमेंटेटर और MAGA समर्थक जेसी ह्यूजेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ह्यूजेस ने मूर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “Btw, when we win, we are tearing this down” यानी ‘वैसे, जब हम जीतेंगे तो हम इसे गिरा देंगे।’ उन्होंने इस पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘हम’ और ‘जीत’ से उनका आशय किससे है।
ह्यूजेस की पोस्ट के बाद हिंदू-अमेरिकी समुदाय और कुछ पूर्व अमेरिकी सैनिकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक और हिंदू-अमेरिकी रुचिर बख्शी ने कहा कि उन्होंने सेना की वर्दी इसलिए नहीं पहनी और युद्ध में इसलिए नहीं गए कि कोई व्यक्ति अपनी राजनीतिक जीत के बाद उनके धर्म के खिलाफ कार्रवाई की बात करे। बख्शी अफगानिस्तान और इराक में तैनात रह चुके हैं।
Texas Hanuman Statue: क्या बोले पूर्व अमेरिकी सैनिक रुचिर बख्शी?
बख्शी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अलग-अलग धर्मों से आने वाले अमेरिकी सैनिकों के साथ सेवा की। उनके मुताबिक सेना में ईसाई, यहूदी, मुस्लिम, हिंदू और नास्तिक सभी साथ काम करते थे और किसी के धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू-अमेरिकी टैक्स देते हैं, कारोबार करते हैं और अपने बच्चों को उसी देश की सेना में भेजते हैं।
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बख्शी ने ह्यूजेस की टिप्पणी को धार्मिक स्वतंत्रता और अमेरिकी मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि किसी समुदाय के पूजा स्थल को केवल उसके धर्म की वजह से गिराने की बात को देशभक्ति नहीं कहा जा सकता। उनकी प्रतिक्रिया को कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) का भी समर्थन मिला। संगठन ने सोशल मीडिया पर धार्मिक कट्टरता को लेकर चिंता जताई और बख्शी के रुख का समर्थन किया। टेक्सास में रहने वाले पूर्व सैनिक और राजनीतिक कमेंटेटर कार्ल व्हीलेस ने भी बख्शी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी।
कौन हैं जेसी ह्यूजेस और उन्होंने क्या कहा?
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जेसी ह्यूजेस कंजर्वेटिव कमेंटेटर और YouTuber हैं। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद उन्होंने कथित तौर पर अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए ईसाई धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में ‘झूठी मूर्तियों’ के खिलाफ विचार व्यक्त किए और कहा कि ईसा मसीह की वापसी के बाद ऐसी मूर्तियां हटेंगी। हालांकि, उनकी शुरुआती पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं था कि ‘हम जीतेंगे’ से उनका सीधा राजनीतिक या चुनावी संदर्भ क्या था।
यही वजह है कि इस मामले को 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के दौरान चल रही पहचान, धर्म, आव्रजन और सांस्कृतिक मुद्दों की बहस से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, ह्यूजेस की पोस्ट को किसी आधिकारिक चुनावी अभियान या सरकारी नीति का बयान मानने का आधार सामने नहीं आया है।
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90 फुट की मूर्ति क्यों है खास?
शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनियन का उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में हुई थी। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह 90 फुट ऊंची पंचलोहम/पंचधातु की अभय हनुमान प्रतिमा है और उत्तर अमेरिका में भगवान हनुमान की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसका नाम ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ इसलिए रखा गया क्योंकि रामायण में हनुमान ने भगवान राम और माता सीता के पुनर्मिलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रतिमा का वजन करीब 90 टन बताया गया है। 2024 में उद्घाटन के समय इसे अमेरिका की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल किया गया था और कई रिपोर्टों ने इसे उस समय अमेरिका की तीसरी सबसे ऊंची प्रतिमा बताया था।
मंदिर और परियोजना से जुड़े लोगों के अनुसार इसका उद्देश्य शक्ति, भक्ति, निस्वार्थ सेवा और एकता का संदेश देना है। परियोजना की परिकल्पना आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्ना जीयर स्वामी ने की थी।
मूर्ति को लेकर पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब टेक्सास की यह प्रतिमा अमेरिकी धार्मिक-राजनीतिक बहस के केंद्र में आई है। अगस्त 2024 में मूर्ति के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ह्यूस्टन क्षेत्र के एक चर्च समूह के करीब 25 लोग मंदिर के बाहर पहुंचे थे। उन्होंने प्रार्थना और प्रचार किया था। उस समूह के एक नेता ने सोशल मीडिया पर मूर्ति को लेकर बेहद आपत्तिजनक धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल किया था। मंदिर प्रबंधन की ओर से पुलिस बुलाने की बात कहे जाने के बाद समूह वहां से चला गया। बाद में मंदिर की सुरक्षा भी बढ़ाई गई।
सितंबर 2025 में टेक्सास के रिपब्लिकन नेता और सीनेट उम्मीदवार अलेक्जेंडर डंकन ने भी इस प्रतिमा को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे ‘झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति’ बताते हुए अमेरिका को ‘ईसाई राष्ट्र’ कहा था। इस बयान पर हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन सहित हिंदू-अमेरिकी संगठनों ने आपत्ति जताई थी।
अब क्यों बढ़ा मामला?
2026 में जेसी ह्यूजेस की पोस्ट ने 2024 और 2025 के विवादों को फिर से चर्चा में ला दिया है। खास बात यह है कि इस बार विवाद केवल किसी धार्मिक समूह की आपत्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक की सार्वजनिक प्रतिक्रिया और हिंदू-अमेरिकी संगठनों के समर्थन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन गया है।
इस पूरे विवाद के बीच एक अहम तथ्य यह भी है कि प्रतिमा श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर की संपत्ति पर स्थित है और इसे धार्मिक समुदाय ने स्थापित किया है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह परियोजना धार्मिक आस्था और सामुदायिक सहयोग पर आधारित है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिमा को हटाने या गिराने की कोई आधिकारिक सरकारी कार्रवाई सामने नहीं आई है। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर हुई बयानबाजी और उसके जवाब में सामने आई प्रतिक्रियाओं के इर्द-गिर्द है।
धार्मिक आजादी बनाम राजनीतिक पहचान की बहस
टेक्सास का यह विवाद अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता, बदलती जनसांख्यिकी और राजनीतिक पहचान से जुड़े बड़े सवालों को भी सामने ला रहा है। एक तरफ हिंदू-अमेरिकी संगठन धार्मिक स्थलों और आस्था के सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ कंजर्वेटिव आवाजें अमेरिका की ईसाई सांस्कृतिक पहचान पर जोर देती रही हैं।
हालांकि, ह्यूजेस की ‘जब हम जीतेंगे’ वाली टिप्पणी का वास्तविक राजनीतिक संदर्भ स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे सीधे किसी पार्टी या आधिकारिक चुनावी नीति से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। इतना जरूर है कि 90 फुट की यह हनुमान प्रतिमा अब केवल एक धार्मिक स्मारक नहीं, बल्कि अमेरिका में धार्मिक विविधता और राजनीतिक-सांस्कृतिक बहस का चर्चित प्रतीक बन चुकी है।
