Islamabad Talks: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत फिलहाल पूरी तरह से ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है। इस्लामाबाद में कई दौर की चर्चा के बावजूद दोनों देश किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं और अब भी कोई समझौता होता नजर नहीं आ रहा है।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसी भी तरह की प्रगति तभी संभव है जब अमेरिका अपनी तथाकथित “अनुचित मांगों” को वापस ले। (Islamabad Talks) यही वजह है कि बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष अहम मुद्दों पर एकमत नहीं हो पा रहे हैं। दावा ये भी किया जा रहा है कि ईरान फिलहाल दूसरी बातचीत की कोई योजना नहीं बना रहा है।
Islamabad Talks: अगली वार्ता पर अनिश्चितता, फिलहाल कोई योजना नहीं
हालांकि दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने की कोशिशें जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के विशेषज्ञ अब ड्राफ्ट प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि कोई साझा रास्ता निकाला जा सके। (Islamabad Talks) पाकिस्तान भी मध्यस्थ के तौर पर दोनों देशों को करीब लाने की कोशिश कर रहा है।
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इसके बावजूद यह साफ नहीं है कि अगली बातचीत कब होगी। दोनों पक्ष फिलहाल अपने-अपने विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए पीछे हट गए हैं। एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान फिलहाल अगले दौर की वार्ता की कोई योजना नहीं बना रहा है।
ईरानी मीडिया का आरोप, “अमेरिका की जरूरत से ज्यादा मांगें”
ईरान के एक टीवी चैनल में अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” की वजह से बातचीत किसी ढांचे तक नहीं पहुंच सकी। (Islamabad Talks) रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज, परमाणु नीति और अन्य मुद्दों पर मतभेद इतने गहरे हैं कि कोई रास्ता नहीं निकल पा रहा है।
एक न्यूज एजेंसी ने भी एक सूत्र के हवाले से कहा कि अमेरिका ने वही सब मांग लिया जो वह जंग के दौरान हासिल नहीं कर सका था। ईरान ने इन “महत्वाकांक्षी शर्तों” को पूरी तरह से ठुकरा दिया।
वहीं एक और रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका पूरी तरह से समझौते के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। (Islamabad Talks) रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि बचाने के लिए बातचीत कर रहा था और किसी नतीजे तक पहुंचने के लिए तैयार नहीं दिख रहा था।
सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अमेरिका को बातचीत की जरूरत अपनी “खोई हुई साख” को बचाने के लिए थी, लेकिन वह अपनी अपेक्षाएं कम करने को तैयार नहीं था।
होर्मुज पर सख्त रुख, “डील नहीं तो बदलाव नहीं”
इस पूरी बातचीत में दो मुद्दे सबसे बड़े अड़ंगे के रूप में सामने आए हैं। पहला होर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरा ईरान का परमाणु कार्यक्रम। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत के दौरान ऐसी शर्तें रखीं जिन्हें वह युद्ध के दौरान भी हासिल नहीं कर पाया था। ईरान ने इन शर्तों को सख्ती से खारिज कर दिया, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
ईरान की एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक अमेरिका कोई “उचित समझौता” नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। (Islamabad Talks) इससे साफ है कि ईरान इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
वेंस ने मानी नाकामी
कई घंटों तक चली बातचीत के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुद स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच कोई “संतोषजनक समझौता” नहीं हो सका है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तों को ईरान ने स्वीकार नहीं किया।
वेंस ने कहा कि अब तक ऐसी कोई सहमति नहीं बन पाई है जो ईरान के लिए स्वीकार्य हो, जिससे साफ हो गया कि यह वार्ता अभी भी गंभीर गतिरोध में फंसी हुई है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का सख्त संदेश
जेडी वेंस ने एक बार फिर साफ किया कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान साफ और ठोस तरीके से यह वादा करे कि वह कभी परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कदम नहीं उठाएगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ईरान लंबे समय के लिए इस प्रतिबद्धता को निभाने के लिए तैयार है, न कि सिर्फ अभी या कुछ सालों के लिए।
