Iran-US War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने बेहद स्पष्टता से कहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग “लगभग जीत ली” है। अपने लगभग 6 मिनट 50 सेकंड के संबोधन में ट्रंप ने कहा कि केवल 32 दिनों में ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचाया गया है और उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को बुरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
ट्रंप ने अपने भाषण में “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका के सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति लगभग पूरी हो चुकी है। (Iran-US War) हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी 2-3 सप्ताह में ईरान पर और भी बड़ा हमला किया जा सकता है।
Iran-US War: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बड़ा दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह “ओब्लिटरेट” कर दिया है। उनके मुताबिक, इन ठिकानों पर इतनी भीषण बमबारी की गई है कि वहां महीनों तक कोई गतिविधि संभव नहीं होगी। (Iran-US War) उन्होंने कहा कि ईरान लंबे वक़्त से परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे कदम बढ़ा रहा था और अमेरिका ने वक़्त रहते बड़ी कार्रवाई कर उसे रोक दिया।
“ईरान की सेना लगभग खत्म” – ट्रंप
अपने संबोधन में ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल सिस्टम को भयंकर रूप से नुकसान पहुंचा है। (Iran-US War) उनका दावा था कि ईरान अब अमेरिका या विश्व के किसी भी हिस्से को खतरा पहुंचाने की स्थिति में नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की रक्षा प्रणाली और रडार लगभग पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जिससे वह अब जवाबी कार्रवाई करने में कमजोर पड़ गया है।
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सत्ता परिवर्तन पर विरोधाभासी बयान
ट्रंप ने एक तरफ कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना नहीं था, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की “पूरी शीर्ष नेतृत्व” खत्म हो चुकी है, जिसके कारण वहां अपने आप सत्ता परिवर्तन हो गया है। (Iran-US War) यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से कोई विरोधाभास नजर आता है।
हॉर्मुज और तेल पर रणनीति
ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका अब सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की लड़ाई से खुद को अलग कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएं।
साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अभी तक ईरान के तेल ठिकानों को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन आवश्यकता पड़ी तो उन पर भी हमला किया जा सकता है।
“समझौता नहीं तो तबाही तय”
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने बातचीत के माध्यम समझौता नहीं किया, तो अमेरिका उसके बिजली उत्पादन संयंत्रों को एक साथ निशाना बनाएगा। उन्होंने कहा कि “हमारे पास सारे पत्ते हैं, उनके पास कुछ नहीं।”
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वैश्विक प्रभाव और आगे की राह
ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा कि इस संघर्ष के खत्म होने के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजार में स्थिरता आएगी और कीमतें गिरेंगी। (Iran-US War) हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी बड़े सैन्य कदम से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और भी बढ़ सकता है।
बता दे, ट्रंप के इस बयान ने जहां एक ओर अमेरिका की आक्रामक रणनीति को सामने रखा है, वहीं दूसरी तरफ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं, क्या वाकई जंग खत्म होने की कगार पर है, या आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं? फिलहाल दुनिया की निगाहें मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई हैं।
