Ambala Building Collapse: हरियाणा के अंबाला शहर के पास धूलकोट गांव में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में शुरुआत में चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 10 से ज्यादा मजदूरों के घायल होने की बात सामने आई। हालांकि, सोमवार सुबह एक न्यूज एजेंसी ने बताया है कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन (Search and Rescue Operation) अभी जारी है।
हादसा रविवार शाम से ठीक पहले हुआ, जब इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राहत और बचाव का काम शुरू किया और पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
Ambala Building Collapse: छत के लिए लिंटल डालते समय ढही इमारत
अधिकारियों के मुताबिक, यह तीन मंजिला इमारत एक जाने-माने कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलर की बताई जा रही है। हादसे के वक्त इमारत की छत के लिए कंक्रीट स्लैब यानी लिंटल (Concrete Slab/Lintel) डालने का काम चल रहा था।
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घटना के समय साइट पर करीब 25 मजदूर मौजूद थे। इनमें से करीब 15 मजदूर तीसरी मंजिल पर लिंटल डालने के काम में लगे थे, जबकि बाकी मजदूर ग्राउंड फ्लोर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। देखते ही देखते कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
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चार मजदूरों को मृत हालत में अस्पताल लाया गया
अंबाला की सिविल सर्जन रेणु बेरी ने बताया कि 12 घायल मजदूरों को अस्पताल लाया गया था। इनमें से पांच का इलाज अभी चल रहा था। उन्होंने बताया कि रविवार शाम चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उनके शवों को अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया गया था।
अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने भी रविवार शाम हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि की थी। हालांकि, सोमवार सुबह एएनआई की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर छह बताए जाने की जानकारी सामने आई।
मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिश
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मलबे को हटाने में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि दो-तीन लोगों का पता लगा लिया गया था और उन्हें मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने तक यह पता लगाने की कोशिश जारी रहेगी कि मलबे में और कितने लोग फंसे हो सकते हैं।
25 मजदूर कर रहे थे काम
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय निर्माण स्थल पर करीब 25 मजदूर मौजूद थे। करीब 15 मजदूर तीसरी मंजिल पर लिंटल डालने का काम कर रहे थे और बाकी ग्राउंड फ्लोर पर काम कर रहे थे।
इसी दौरान इमारत का बड़ा हिस्सा गिर गया और कई मजदूर मलबे में दब गए। अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की सीएमओ रेनू पांजनी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
मीडिया से बातचीत में एसपी ने बताया था कि उस समय तक चार लोगों की मौत हो चुकी थी और 13 से 14 मजदूरों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था। इसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी रहीं। जिला प्रशासन की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं, ताकि मलबे में फंसे किसी भी मजदूर को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।
क्या बिल्डिंग अवैध तरीके से बन रही थी?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर निर्माणाधीन इमारत का नक्शा पास था या नहीं। क्या यह निर्माण कानूनी तरीके से किया जा रहा था या निर्माण में किसी तरह की लापरवाही हुई थी।
इस सवाल पर अंबाला एसपी अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा करना है। बिल्डिंग के मालिक और इससे जुड़ी दूसरी जानकारियां भी जांच के दौरान सामने आएंगी। उन्होंने साफ कहा कि हादसे में मौतें हुई हैं और लोग घायल हुए हैं, इसलिए मामले में कानूनी कार्रवाई जरूर की जाएगी।
अवैध निर्माण हुआ तो होगी कार्रवाई
अंबाला एसपी ने कहा कि जांच में हर एंगल को देखा जाएगा। अगर निर्माण अवैध पाया जाता है या निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि नगर निगम अंबाला (Ambala Municipal Corporation) से बिल्डिंग का नक्शा लिया जाएगा। इसके जरिए यह जांच की जाएगी कि निर्माण के लिए नक्शा पास था या नहीं।
यानी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इमारत का निर्माण अवैध था या नहीं। इसका पता रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद होने वाली जांच से चलेगा।
ज्यादातर मजदूर आसपास के रहने वाले
पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल पर काम करने वाले ज्यादातर मजदूर जंडली और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। हालांकि, इनमें कुछ प्रवासी मजदूर भी हो सकते हैं।
प्रशासन और पुलिस की टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश के साथ-साथ मौके पर मौजूद मजदूरों और उनके परिजनों से भी जानकारी जुटा रही हैं।
रेस्क्यू के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल धूलकोट गांव में राहत और बचाव अभियान जारी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें मलबे को हटाकर यह पता लगाने में जुटी हैं कि कोई और मजदूर अंदर फंसा तो नहीं है।
हादसे में मौतों का आंकड़ा रविवार शाम चार से बढ़कर सोमवार सुबह छह बताए जाने के बाद प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है। वहीं, घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।
निर्माणाधीन इमारत क्यों गिरी, निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और बिल्डिंग का नक्शा पास था या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद होने वाली जांच में सामने आने की उम्मीद है।
