LPU Student Protest: पंजाब के फगवाड़ा जिले में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी एलपीयू (Lovely Professional University) में एक छात्रा से रेप और आत्महत्या की अफवाह के बाद शुरू हुआ विवाद अब हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी तक पहुंच चुका है। हालांकि, पुलिस ने फ्लैग मार्च (Flag March) के बाद हालात को काबू में होने का दावा किया है, लेकिन कैंपस में तनाव अभी भी बना हुआ है।
हालात को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रविवार शाम अगले 10 दिनों के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी। इसके साथ ही मिडटर्म एग्जाम (Midterm Exam) भी रद्द कर दिए गए हैं। सोमवार से क्लासेस सस्पेंड होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कैंपस छोड़कर अपने घरों के लिए रवाना हो गए। धीरे-धीरे एलपीयू कैंपस खाली होता नजर आ रहा है। यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि 10 दिन बाद हालात सामान्य होने पर दोबारा क्लासेस शुरू हो सकती हैं।
शनिवार भोर से शुरू हुए इस पूरे घटनाक्रम में करीब 24 घंटे के दौरान कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं।
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LPU Student Protest: आज सुबह कैंपस में कैसे हैं हालात?
सोमवार सुबह एलपीयू कैंपस में हालात शांत बताए जा रहे हैं। रात में पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर फ्लैग मार्च किया था। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे छात्र अपने-अपने हॉस्टल लौट गए।
इससे पहले रविवार को छात्रों ने कैंपस में जमकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान दुकानों और दूसरी संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया और पुलिसकर्मियों पर पथराव भी हुआ। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई है।
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हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल को कैंपस में तैनात किया गया था। आधी रात के बाद पुलिस के फ्लैग मार्च के बाद प्रदर्शनकारी छात्र पीछे हटे और हॉस्टल लौट गए।
20 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान
इंटेलिजेंस इनपुट (Intelligence Input) के मुताबिक, प्रदर्शन और तोड़फोड़ के दौरान 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति को नुकसान पहुंचने का अनुमान है।
हिंसा बढ़ने के बाद पुलिस ने कैंपस में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी थी। पुलिस की ओर से स्थिति को नियंत्रण में बताए जाने के बाद फिलहाल माहौल शांत है।
एलपीयू के हॉस्टलों में करीब 25 हजार छात्र रहते हैं। इतने बड़े कैंपस में तनाव की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
फ्लैग मार्च के बाद हाईवे भी खुला
पंजाब पुलिस के एडीजीपी मोहम्मद फैयाज फारूकी ने बताया कि पुलिस ने रात में कैंपस के अंदर फ्लैग मार्च किया और छात्रों ने भी इसमें सहयोग किया। उन्होंने कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है और हाईवे को भी खोल दिया गया है।
एडीजीपी फारूकी ने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद कक्षाएं दोबारा शुरू होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने साफ किया कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा बवाल?
पूरे विवाद की शुरुआत एक छात्रा से कथित रेप और आत्महत्या की अफवाह से हुई। सोशल मीडिया (Social Media) पर इससे जुड़े मैसेज तेजी से फैलने लगे।
इन दावों के बाद बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे प्रदर्शन उग्र हो गया और छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई। इस दौरान पथराव हुआ और पुलिस की दो गाड़ियों में आग लगा दी गई। कई दूसरे वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई है।
पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति पर दर्ज किया केस
पुलिस के मुताबिक, छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी (SIT) का गठन भी किया गया है।
हालांकि, एलपीयू प्रशासन ने कैंपस में रेप की घटना के दावे को खारिज किया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे अफवाह बताया है। यानी एक तरफ पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है, वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि कैंपस में रेप की घटना होने का दावा झूठा और निराधार है।
छात्रों ने तीन दिन पुरानी घटना का किया दावा
प्रदर्शन की शुरुआत रविवार तड़के करीब एक बजे गर्ल्स हॉस्टल-3 के पास हुई थी। कुछ छात्रों ने दावा किया कि तीन दिन पहले हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ एक प्लंबर ने रेप किया था।
छात्रों का आरोप था कि हॉस्टल वार्डन को इस घटना की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीआईजी नवीन सिंगला के मुताबिक, छात्रों ने यह भी दावा किया कि संबंधित छात्रा बाद में अपने घर चली गई। इन दावों के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ा और प्रदर्शन तेज होता चला गया।
MiG-23UM और सेना के टैंक पर चढ़े प्रदर्शनकारी
सुबह होते-होते बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जमा हो गए। प्रदर्शनकारी छात्र ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगाते नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ करते दिखाई दिए। इस दौरान एक छात्र कैंपस में रखे पुराने MiG-23UM विमान के ऊपर चढ़ गया। कुछ प्रदर्शनकारी वहां रखे सैन्य टैंक पर भी चढ़ गए। इसके बाद कैंपस में चल रहा प्रदर्शन और ज्यादा चर्चा में आ गया।
NH-44 पर भी लगा दिया जाम
प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी के बाहर दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे-44 (NH-44) को भी जाम कर दिया था। हाईवे पर बड़ी संख्या में वाहनों की कतार लग गई। इसके चलते यातायात को दूसरे रास्तों से डायवर्ट करना पड़ा।
रविवार शाम करीब 7:30 बजे पुलिस ने छात्रों से हाईवे खाली करने को कहा। अधिकारियों के मुताबिक, इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकीं। इसके बाद पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और छात्र कैंपस की ओर भागे।
कपूरथला, जालंधर और होशियारपुर से पहुंची पुलिस
पुलिस का कहना है कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई। जालंधर रूरल के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क के मुताबिक, चार से पांच पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं।
स्थिति बिगड़ने के बाद कपूरथला, जालंधर रूरल और होशियारपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। एडीजीपी एमएफ फारूकी के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी कैंपस पहुंचे। बाद में डीआईजी नवीन सिंगला ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है और एनएच-44 पर यातायात भी बहाल करा दिया गया है।
LPU रजिस्ट्रार ने आरोपों को बताया झूठा
पुलिस ने छात्रों के बयान के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीआईजी नवीन सिंगला के मुताबिक, जांच में फॉरेंसिक सैंपल, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड समेत दूसरे सबूतों को देखा जाएगा। छात्र प्रतिनिधियों को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही गई है।
वहीं, एलपीयू की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कैंपस में रेप के दावों को झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि पुलिस की जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। एलपीयू प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें।
बाहरी लोगों को लेकर भी उठा सवाल
प्रदर्शन में बाहरी लोगों के शामिल होने का दावा भी सामने आया है। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि रविवार रात कुछ बाहरी लोग यूनिवर्सिटी कैंपस में आए और उन्होंने संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
छात्र के मुताबिक, जब तक सिर्फ यूनिवर्सिटी के छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, तब तक स्थिति नियंत्रण में थी। बाद में कुछ बाहरी लोग आए और तोड़फोड़ शुरू हो गई। प्रदर्शनकारी छात्र का कहना है कि यूनिवर्सिटी के छात्र सिर्फ मामले में जवाबदेही और प्रशासन के साथ साफ-सुथरी बातचीत चाहते थे।
छात्र प्रतिनिधियों को जांच में शामिल करने की बात
छात्र विंग के डीन सौरभ लखनपाल ने कहा है कि यूनिवर्सिटी हर तरह की जांच के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि छात्र प्रतिनिधियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है। डीन के मुताबिक, यूनिवर्सिटी छात्रों को सीसीटीवी फुटेज दिखाने और जांच की प्रक्रिया में शामिल कराने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि अफवाह को लेकर भी जांच की जाएगी।
यूनिवर्सिटी ने फिर दी सफाई
एलपीयू की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों पर फैल रही अफवाहों को झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के संज्ञान में आया है कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत अफवाहें फैला रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इन अफवाहों की वजह से छात्रों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो रहा है और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। रजिस्ट्रार ने कहा कि इन अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है और लोगों से इन पर भरोसा नहीं करने की अपील की गई है।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने AAP सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे मामले को लेकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी यानी आप (AAP) सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि छात्रों की ओर से उठाए जा रहे गंभीर सवालों का पारदर्शी और समयबद्ध जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने हिंसा के मामले को पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए राज्य सरकार की आलोचना भी की।
अब 10 दिन बंद रहेगा LPU
हिंसा और तनाव के बीच एलपीयू प्रशासन ने अगले 10 दिनों के लिए छुट्टी घोषित कर दी है। सोमवार से क्लासेस सस्पेंड हैं और मिडटर्म एग्जाम भी रद्द कर दिए गए हैं।
इसके बाद छात्र-छात्राएं कैंपस छोड़कर अपने घरों की ओर जाते दिखे। बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टल से बाहर निकल चुके हैं और धीरे-धीरे एलपीयू कैंपस खाली हो रहा है।
प्रशासन की योजना है कि 10 दिन बाद अगर हालात सामान्य होते हैं तो क्लासेस दोबारा शुरू की जा सकती हैं।
चितकारा यूनिवर्सिटी में भी तनाव
पंजाब की एक दूसरी निजी यूनिवर्सिटी चितकारा यूनिवर्सिटी (Chitkara University) में भी छात्रों के विरोध के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है। बनूड़ स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में 24 और 25 सितंबर की दरमियानी रात जोरदार हंगामा और तोड़फोड़ हुई थी। इसके बाद 26 सितंबर को भी सैकड़ों छात्र दोबारा इकट्ठा हुए और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर यानी वीसी (VC) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। छात्रों ने इंसाफ की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नॉन-टीचिंग डेज
लगातार बढ़ते विवाद और प्रशासनिक कारणों को देखते हुए चितकारा यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने भी कैंपस के लिए बड़ा फैसला लिया है। यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक ‘नॉन-टीचिंग वर्किंग डेज’ (Non-Teaching Working Days) घोषित किए हैं। चितकारा यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर ह्यूमन रिसोर्सेज डॉ. हरप्रीत एस. भाटिया की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के मुताबिक, इस दौरान नियमित पढ़ाई का काम बंद रहेगा।
इस तरह पंजाब की दो प्रमुख निजी यूनिवर्सिटियों में छात्रों के विरोध और तनाव के बीच कैंपस प्रशासन और पुलिस दोनों अलर्ट पर हैं। एलपीयू में जहां 10 दिन के लिए क्लासेस और परीक्षाएं रोक दी गई हैं, वहीं चितकारा यूनिवर्सिटी में भी कुछ दिनों के लिए नियमित शैक्षणिक गतिविधियां बंद रखने का फैसला किया गया है।
