Iran UAE Warning Saudi Arabia: ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात अब खाड़ी क्षेत्र में बड़े टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं। इसी बीच ईरान ने सऊदी अरब और ओमान को संदेश दिया है कि अमेरिका और इज़रायल के साथ चल रहे संघर्ष के जवाब में उसने संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाने की योजना बनाई है। यह दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है।
Iran UAE Warning Saudi Arabia: ईरान की रणनीति पर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने बातचीत के दौरान सऊदी अरब के समकक्षों से कथित तौर पर कहा कि उनकी योजना अमीरातियों को कड़ा जवाब देने की है। (Iran UAE Warning Saudi Arabia) इस बातचीत में तेहरान ने रियाद और अबू धाबी के बीच पहले से मौजूद मतभेदों का भी जिक्र किया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह बातचीत कब हुई, लेकिन इसे खाड़ी देशों में तनाव बढ़ाने वाले संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
रिश्तों में सावधानी भरा संतुलन
सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और हाल के वर्षों में उसने ईरान के साथ सीधे टकराव से बचते हुए बातचीत का रास्ता अपनाया है। (Iran UAE Warning Saudi Arabia) हालांकि इसके बावजूद दोनों देशों के बीच गहरी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। यमन युद्ध में भी दोनों देश अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर चुके हैं, जिससे तनाव और गहरा हुआ है।
- Advertisement -
UAE और सऊदी अरब के बीच भी खींचतान
सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों के बीच भी मतभेद साफ दिखाई देते हैं। (Iran UAE Warning Saudi Arabia) सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच यमन, सूडान और लीबिया जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग रणनीतिक हित रहे हैं। यमन में जहां दोनों देश पहले एक ही गठबंधन में थे, वहीं बाद में उनके रास्ते अलग हो गए।
Also Read –Chennai Super Kings: CSK के खिलाफ मुंबई को जीत जरूरी, पर संजू को कैसे रोकेगी मुंबई इंडियंस?
सूडान के गृहयुद्ध में भी दोनों देशों ने विरोधी पक्षों का समर्थन किया है, जिससे उनके रिश्तों में दूरी बढ़ी है। लीबिया में भी दोनों देश अलग-अलग ताकतों के समर्थन में सक्रिय हैं।
लीबिया और हथियारों की राजनीति
रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च महीने में पाकिस्तान से हथियारों की एक खेप पूर्वी लीबिया में खलीफा हफ्तार तक पहुंची थी, जिसका खर्च सऊदी अरब ने उठाया था। (Iran UAE Warning Saudi Arabia) बताया गया है कि रियाद की कोशिश हफ्तार की सेना को संयुक्त अरब अमीरात के प्रभाव से दूर करके अपने पाले में लाने की है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक जटिलता
ईरान की इस कथित रणनीति को खाड़ी देशों के बीच फूट डालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं ईरान यह भी समझता है कि अमेरिका के सहयोगी अरब देश पहले से ही आपसी मतभेदों से जूझ रहे हैं, जिसका फायदा वह अपनी रणनीति में उठाना चाहता है।
क्षेत्र में नया तनाव, हालात और जटिल
कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बदलते रिश्ते और अलग-अलग मोर्चों पर चल रही प्रतिस्पर्धा ने पूरे क्षेत्र को तनाव के नए दौर में धकेल दिया है, जिसका असर आने वाले समय में और व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
