US-IRAN war: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर जारी महासंग्राम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने सबसे भरोसेमंद साथी से ही बड़ा झटका लगा है। एक तरफ जहां ट्रंप ने दावा किया था कि ब्रिटेन की नौसेना इस नाकाबंदी में अमेरिका की मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई इस समुद्री घेराबंदी का हिस्सा नहीं बनेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता की विफलता के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज हो गई है।
ट्रंप का दावा और ब्रिटेन की ‘ना’: कूटनीतिक गलियारों में हलचल
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर गर्व से घोषणा की थी कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान को ‘अवैध टोल’ चुकाने वाले जहाजों को रोकने के लिए कई देश उनके साथ आएंगे। उन्होंने ब्रिटेन के युद्धपोतों के शामिल होने की उम्मीद जताई थी। (US-IRAN war) लेकिन ब्रिटेन ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य टकराव या नाकाबंदी में शामिल होकर स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहता। इससे पहले भी ब्रिटेन ने ईरान के साथ सीधे युद्ध में कूदने से इनकार कर दिया था, जिससे अब ट्रंप की ‘ग्लोबल गठबंधन’ वाली रणनीति कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
परमाणु जिद पर अड़ा ईरान: क्यों फेल हुई इस्लामाबाद वार्ता?
ट्रंप ने बताया कि उनके प्रतिनिधियों- जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने इस्लामाबाद में ईरानी नेतृत्व के साथ करीब 20 घंटे तक मैराथन बैठक की। ट्रंप के अनुसार, बैठक कई मायनों में अच्छी रही और अधिकांश व्यापारिक बिंदुओं पर सहमति भी बन गई थी। लेकिन पेच वहां फंसा, जहां समझौता सबसे जरूरी था- यानी परमाणु हथियार। (US-IRAN war) ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने पर राजी नहीं हुआ। ट्रंप ने दो टूक कहा कि वह परमाणु ऊर्जा को ऐसे “अस्थिर और अप्रत्याशित” लोगों के हाथों में नहीं जाने दे सकते। इसी असहमति के बाद ट्रंप ने तत्काल प्रभाव से होर्मुज की नाकाबंदी का आदेश जारी कर दिया।
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तेल की सप्लाई पर संकट: आसमान छू सकती हैं कीमतें
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की कुल तेल आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से का प्रवेश द्वार है। ट्रंप ने निर्देश दिया है कि जो भी जहाज ईरान को टोल का भुगतान करेगा, उसे समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप का मानना है कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कर रहा है। (US-IRAN war) हालांकि, ब्रिटेन के पीछे हटने से इस नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करना अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी लंबी खिंची, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी।
युद्ध की विभीषिका: हजारों जिंदगियां और अरबों का नुकसान
अमेरिका और इजरायल के बीच जारी इस तनाव ने अब तक भारी तबाही मचाई है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक ईरान, लेबनान और इजरायल में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। (US-IRAN war) ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना करते हुए कहा कि वे भारत के साथ एक संभावित विनाशकारी युद्ध को टालने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं। लेकिन ईरान के मामले में ट्रंप का रुख बेहद आक्रामक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना ईरान के “बचे-खुचे हिस्से” को भी नष्ट करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। अब पूरी दुनिया की नजरें समंदर की उन लहरों पर टिकी हैं, जहां तनाव हर पल बढ़ता जा रहा है।
