UGC new rules controversy: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा कैंपस में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए जारी किए गए नए नियमों को लेकर इस वक़्त पूरे देश में विरोध और तीखी बहस तेज हो गई है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई के संकेत देकर इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
UGC new rules controversy: ये है मामला
दरअसल, UGC ने हाल ही में देश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए कुछ नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा संस्थानों में समानता बनाए रखना और किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना बताया गया। (UGC new rules controversy) लेकिन अब इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
SC ने याचिका को किया सूचीबद्ध
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिका को सूचीबद्ध कर लिया है और जल्द सुनवाई का भरोसा दे दिया है। (UGC new rules controversy) इस मामले में याचिकाकर्ता राहुल दीवान ने भारत सरकार के खिलाफ यह याचिका दाखिल की है। जब यह मामला चीफ जस्टिस की बेंच के सामने आया, तो कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “हमें पता है कि क्या हो रहा है” और इस पर जल्द सुनवाई की जाएगी।
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यह संकेत माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लाखों छात्रों और शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
नियमों को लेकर क्यों हो रहा विरोध?
UGC के नए नियमों का उद्देश्य भले ही भेदभाव रोकना बताया जा रहा हो, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का स्वरूप ऐसा है जिससे छात्रों के बीच विभाजन और तनाव बढ़ सकता है।
खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े विश्वविद्यालयों में पूरे देश से छात्र आते हैं, जहां जातिगत पहचान तुरंत स्पष्ट नहीं होती। (UGC new rules controversy) लेकिन गांव और छोटे जिलों के डिग्री कॉलेजों में सभी एक-दूसरे को जानते हैं, ऐसे में नियमों का गलत प्रयोग होने की आशंका अधिक है।
“छात्रों के बीच बढ़ेगा मानसिक दबाव”
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि अगर किसी छात्र पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगेगा, तो उसे मानसिक दबाव, जांच प्रक्रिया और सामाजिक तनाव झेलना पड़ेगा। (UGC new rules controversy) इसे लेकर आलोचकों का कहना है कि शिक्षा का माहौल खुला और समान होना चाहिए, लेकिन अगर शिकायतों और जांच का डर लगातार छात्रों के सिर पर रहेगा तो कैंपस का वातावरण गंभीर र्रोप से प्रभावित होगा।
स्टूडेंट और टीचर को एक ही कानून में बांधने पर सवाल
एक बड़ा विवाद यह भी है कि नए नियमों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए समान व्यवस्था रखी गई है। जबकि कई मामलों में आरोप शिक्षकों पर लगते हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि जब शिकायत निवारण समिति में शिक्षक बहुमत में होंगे, तो शिक्षक के खिलाफ निष्पक्ष रूप से कार्रवाई किस प्रकार सुनिश्चित होगी? यह मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में प्रमुख रूप से उठ सकता है।
मामले में सरकार को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) के आधार पर जवाब देना पड़ सकता है। (UGC new rules controversy) सवाल यह खड़ा किया जा रहा है कि सरकार ने कैसे तय किया कि किसी विशेष वर्ग के छात्रों के लिए अलग नियम बनाना आवश्यक है? क्या यह स्वयं “स्टेट डिस्क्रिमिनेशन” की श्रेणी में आता है? याचिका में इसे राज्य द्वारा किया गया भेदभाव बताया गया है, जो एक गंभीर संवैधानिक आरोप है।
पूरे देश में बढ़ता विरोध
UGC के इन नियमों के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन भी देखने को मिल रहे हैं। (UGC new rules controversy) कुछ राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन किए, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज है। कई लोगों का कहना है कि सरकार को छात्रों को बांटने के बजाय समान शिक्षा नीति पर ध्यान देना चाहिए।
अब, आगे क्या होगा?
अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सूचीबद्ध कर लिया है, तो संभावना पूरी है कि आगामी कुछ ही दिनों में इस पर बड़ी सुनवाई होगी। (UGC new rules controversy) कई अन्य याचिकाएं भी इसी मुद्दे पर दाखिल हैं, जिन्हें क्लब करके एक साथ सुना जा सकता है। भारत सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले में पक्ष रख सकते हैं। अगर कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाई या परिवर्तन आदेश के दिए, तो यह फैसला देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डालेगा।
बता दे, UGC के नए नियमों का बड़ा मकसद भले ही कैंपस में भेदभाव रोकना हो, लेकिन इसके स्वरूप और लागू करने के तरीके को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। (UGC new rules controversy) सुप्रीम कोर्ट की जल्द सुनवाई अब यह तय करेगी कि यह नियम छात्रों के हित में हैं या शिक्षा व्यवस्था में नया विवाद पैदा करेंगे। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा नीति से जुड़ा है।
