Red Bull FSSAI Case: देशभर में युवाओं के बीच बेहद मशहूर एनर्जी ड्रिंक ब्रांड Red Bull अब खाद्य नियामक FSSAI के एक आदेश को लेकर कानूनी लड़ाई में उतर गया है। विवाद सिर्फ पैकेजिंग पर लिखे दो शब्दों यानी Energy Drink का नहीं है, बल्कि कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का आदेश उसे बिना पहले नोटिस दिए और अपना पक्ष रखने का मौका दिए जारी किया गया। (Red Bull FSSAI Case) इसके बाद कई जगहों पर Red Bull के उत्पादों पर कार्रवाई और स्टॉक जब्त किए जाने का दावा भी कंपनी ने किया है। मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट में है और अगली सुनवाई 29 सितंबर यानी आज होनी है।
Red Bull FSSAI Case: FSSAI ने Red Bull को क्या निर्देश दिया?
विवाद की शुरुआत 30 जून 2026 को FSSAI के एक आदेश से हुई। इसमें Red Bull को अपने कैफीनयुक्त पेय उत्पादों के लिए Energy Drink डिस्क्रिप्शन का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया। (Red Bull FSSAI Case) इसके बाद 17 जुलाई को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी कथित तौर पर ऐसे उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संचार भेजा गया।
Red Bull का आरोप है कि जुलाई के इस संचार के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके उत्पादों पर प्रवर्तन कार्रवाई हुई और कई जगह स्टॉक जब्त किया गया। कंपनी ने इसी कार्रवाई और मूल आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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हाईकोर्ट ने FSSAI से क्यों मांगा जवाब?
मामला सोमवार को जस्टिस अमित महाजन की अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FSSAI से खास तौर पर पूछा कि क्या 30 जून का आदेश जारी करने से पहले Red Bull को शो-कॉज नोटिस दिया गया था? साथ ही यह भी पूछा गया कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला था या नहीं।
कोर्ट ने तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर भी सवाल उठाया। अदालत ने FSSAI से इस संबंध में निर्देश लेने को कहा है। सोमवार की सुनवाई में Red Bull को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 29 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है। जो कि आज होनी है।
2002 से ‘Energy Drink’ नाम से बिक रहा Red Bull
कंपनी ने अपनी याचिका में कहा है कि Red Bull भारत में 2002 से Energy Drink डिस्क्रिप्शन के साथ बेचा जा रहा है। उसके मुताबिक इतने लंबे समय से इसी नाम और श्रेणी के तहत उत्पादों की बिक्री होती रही है।
कंपनी का कहना है कि 30 जून का निर्देश अचानक आया और इससे पहले उसे न तो कोई शो-कॉज नोटिस मिला और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। Red Bull ने इसी आधार पर FSSAI की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
2024 की FSSAI एडवाइजरी का भी दिया हवाला
Red Bull ने अपने पक्ष में मार्च 2024 की FSSAI एडवाइजरी का भी हवाला दिया है। इस एडवाइजरी में FSSAI ने स्पष्ट किया था कि कुछ निर्धारित श्रेणियों में आने वाले कार्बोनेटेड और नॉन-कार्बोनेटेड वॉटर-बेस्ड फ्लेवर्ड ड्रिंक्स के लिए Energy शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसी एडवाइजरी में FSSAI ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे उत्पादों को गलत तरीके से Health Drink या Energy Drink श्रेणी में दिखाने पर उचित कैटेगरी में रखने की सलाह दी थी।
कंपनी का तर्क है कि 2024 की इस स्थिति के बाद 2026 में अचानक लिया गया नया रुख स्पष्ट नहीं है। याचिका में उसने पुराने लाइसेंस, आयात मंजूरी और अन्य नियामकीय अनुमतियों का भी हवाला दिया है।
इस मामले का असर सिर्फ Red Bull तक सीमित नहीं माना जा रहा है। FSSAI की कार्रवाई से कैफीनयुक्त पेय बनाने वाली दूसरी कंपनियों के लिए भी पैकेजिंग और उत्पादों के नाम को लेकर अनुपालन का सवाल खड़ा हुआ है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है।
