PK-Priyanka Gandhi secret meeting: बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (पीके) एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में लौट आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पीके ने हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ दो घंटे की बंद कमरे में बैठक की है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। (PK-Priyanka Gandhi secret meeting) बताया जा रहा है कि दोनों ने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तर भारतीय राज्यों के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर गहन चर्चा की।
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PK-Priyanka Gandhi secret meeting: शिष्टाचार भेंट या सियासी संकेत?
हालांकि दोनों पक्षों ने इस मुलाकात को मात्र ‘शिष्टाचार भेंट’ बताकर राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है, लेकिन यह मुलाकात राजनीतिक रूप से काफी दिलचस्प है। (PK-Priyanka Gandhi secret meeting) इसकी वजह यह है कि बीते कुछ वर्षों में प्रशांत किशोर और कांग्रेस का रिश्ता कड़वाहट भरा रहा है। प्रशांत किशोर ने 2021 में जद(यू) से निष्कासित होने के एक साल बाद कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव दिया था। (PK-Priyanka Gandhi secret meeting) अप्रैल 2022 में, सोनिया गांधी के 10 जनपथ निवास पर प्रशांत किशोर ने राहुल और प्रियंका सहित शीर्ष नेतृत्व के सामने एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) भी दिया था।
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पीके ने ठुकराया था कांग्रेस का न्योता
पीके के प्रेजेंटेशन के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके प्रस्तावों पर विचार के लिए एक पैनल गठित किया था। सोनिया ने बाद में कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियों के लिए ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ बनाया और किशोर को इसमें शामिल होने का न्योता दिया। लेकिन पीके ने इसे ठुकरा दिया था। (PK-Priyanka Gandhi secret meeting) उनका कहना था कि वह इस ग्रुप में सिर्फ सदस्य बनकर शामिल होने के बजाय अधिक अधिकार और स्वतंत्रता चाहते थे। दूसरी तरफ, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, यहां तक कि जी-23 समूह के सदस्य भी, किसी बाहरी व्यक्ति के इशारे पर पार्टी संगठन में बदलाव के खिलाफ थे और उन्हें प्रशांत किशोर पर पूरा भरोसा नहीं था।
कड़वाहट भरे बयान और बिहार में हार
प्रशांत किशोर ने कांग्रेस का न्योता ठुकराते हुए बयान जारी किया था कि “मेरे विचार में कांग्रेस को मुझसे ज्यादा नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है ताकि पार्टी में गहरी जड़ें जमा चुकीं संरचनात्मक समस्याओं को परिवर्तनकारी सुधारों से ठीक किया जा सके।” इसके बाद से वह लगातार कांग्रेस की आलोचना करते रहे हैं।
बिहार चुनाव के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों को दरकिनार कर दिया था। (PK-Priyanka Gandhi secret meeting) चुनाव परिणाम आने पर उनकी बात सच साबित हुई और कांग्रेस 61 में से सिर्फ 6 सीटें जीत सकी। पीके की अपनी जन सुराज पार्टी ने भी बिहार की 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन खाता नहीं खोल सकी और उसके 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। अब बिहार की हार के बाद यह मुलाकात कई सवाल खड़े करती है कि क्या पीके एक बार फिर कांग्रेस के साथ उत्तर भारत की राजनीति में नई शुरुआत करने की तैयारी में हैं?
