luxembourg: विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों यूरोपीय देश लक्जमबर्ग के दौरे पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने कहा कि भारत लक्जमबर्ग को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है और दोनों देश फिनटेक, स्पेस, और ए.आई. जैसे कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ा सकते हैं।
जयशंकर ने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्राइडन के साथ वित्त, निवेश, और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। (luxembourg) इसके अलावा, उन्होंने लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की।
luxembourg: लंबे समय से सहयोगी रहे हैं दोनों देश
भारत और लक्जमबर्ग के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत 1948 में हुई थी, और तब से दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और व्यापारिक संबंध बने रहे हैं। (luxembourg) हाल के वर्षों में हुए उच्च-स्तरीय दौरे इन द्विपक्षीय संबंधों की गहरी दोस्ती को दर्शाते हैं।
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170 से ज्यादा भारतीय कंपनियां लिस्टेड
लक्जमबर्ग की 6 लाख की आबादी वाली अर्थव्यवस्था में कई कंपनियां दो दशकों से अधिक समय से “मेक इन इंडिया” पहल में सक्रिय रूप से शामिल हैं और भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। (luxembourg) इसके साथ ही, लक्जमबर्ग के कई एनजीओ भारत में स्थानीय साझेदारों के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। लक्जमबर्ग हर साल भारत में विभिन्न फिल्म महोत्सवों में हिस्सा लेता है, जहां वह अपनी फिल्म प्रोडक्शन या सह-प्रोडक्शन दिखाता है।
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लक्जमबर्ग ने 2002 में नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला था, और तब से अब तक लक्जमबर्ग के कई व्यापार और विदेश मामलों के मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं। 1983 में, ग्रैंड ड्यूक जीन लक्जमबर्ग के पहले राष्ट्राध्यक्ष बने, जो भारत आए थे। |(luxembourg) लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में 170 से अधिक भारतीय कंपनियां लिस्टेड हैं, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग की एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करती हैं।
