Lafayette Park firing Washington DC: दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पते ‘1600 पेंसिलवेनिया एवेन्यू’ यानी व्हाइट हाउस के बाहर रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी। यह घटना तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद व्हाइट हाउस के भीतर मौजूद थे। (Lafayette Park firing Washington DC) ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और तेहरान की ओर से मिल रही लगातार धमकियों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति के आवास के ठीक सामने हुई इस फायरिंग ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है, लेकिन हमलावर का चकमा देकर फरार हो जाना सुपरपावर अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
Lafayette Park firing Washington DC: लाफायेट पार्क के पास फायरिंग और ट्रंप की मौजूदगी
सीक्रेट सर्विस के मुताबिक, फायरिंग की यह सनसनीखेज घटना व्हाइट हाउस के ठीक सामने स्थित लाफायेट पार्क के पास हुई। जिस वक्त गोलियां चलीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वीकेंड के कारण व्हाइट हाउस में ही रुके हुए थे। फायरिंग होते ही सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया और राष्ट्रपति को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। (Lafayette Park firing Washington DC) हमलावर एक वाहन में सवार था और वारदात को अंजाम देकर गायब हो गया। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के जरिए संदिग्ध वाहन की तलाश में जुटी हैं। व्हाइट हाउस के आसपास के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, लेकिन वहां का सामान्य कामकाज फिलहाल जारी रखा गया है।
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आसमान में मंडराता खतरा: ड्रोन और फाइटर जेट्स का अलर्ट
अमेरिका के लिए यह कोई इकलौती सुरक्षा चूक नहीं है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी आसमान में अज्ञात खतरों का साया मंडरा रहा है। हाल ही में फ्लोरिडा में एक संदिग्ध विमान दिखने के बाद एफ-16 फाइटर जेट्स को तुरंत उड़ान भरनी पड़ी थी। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात 19 मार्च की है, जब अमेरिका के बेहद संवेदनशील सैन्य ठिकानों और वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे गए थे। (Lafayette Park firing Washington DC) ये ड्रोन उन इलाकों में मंडरा रहे थे जहाँ विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे वीवीआईपी रहते हैं। इन घटनाओं के बाद दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों के लिए ‘ग्लोबल सिक्योरिटी अलर्ट’ जारी किया गया है।
क्या ईरान का ‘गुरिल्ला वॉर’ अमेरिका तक पहुंच गया?
रक्षा विशेषज्ञ इस फायरिंग और ड्रोन की घटनाओं को ईरान के साथ चल रहे युद्ध से जोड़कर देख रहे हैं। ईरान अपनी घातक ड्रोन टेक्नोलॉजी और ‘गुरिल्ला वॉरफेयर’ (छापामार युद्ध) के लिए जाना जाता है। (Lafayette Park firing Washington DC) आशंका जताई जा रही है कि यह फायरिंग ‘लोन वुल्फ’ अटैक यानी किसी अकेले हमलावर की साजिश हो सकती है, जो ईरान समर्थित गुटों से प्रभावित हो। अमेरिका के प्रमुख एयरफोर्स बेस जैसे MacDill और Joint Base McGuire पर सुरक्षा स्तर को बढ़ाकर ‘चार्ली’ (Charlie Status) कर दिया गया है, जो किसी बड़े हमले की आशंका का संकेत है।
सुपरपावर की सुरक्षा में सेंध: अब आगे क्या?
सवाल यह उठता है कि दुनिया की सबसे एडवांस सुरक्षा प्रणाली रखने वाला अमेरिका अपने राष्ट्रपति के घर के पास हो रही फायरिंग को क्यों नहीं रोक पा रहा है? ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच इस तरह की घटनाएं मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा भी हो सकती हैं। व्हाइट हाउस ने इस मामले पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है ताकि सुरक्षा के खतरों का नए सिरे से आकलन किया जा सके। फिलहाल, वाशिंगटन की सड़कों पर तनाव साफ देखा जा सकता है और राष्ट्रपति की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढील न देने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह महज एक आपराधिक घटना थी या इसके पीछे किसी विदेशी ताकत का हाथ है।
