Jammu Kashmir Cloudburst: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में इन दिनों बादल फटने (Cloudburst) से जुड़ी घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में करीब 14 अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। बुधवार को राजौरी जिले के थानामंडी सब-डिविजन की राजधानी पंचायत के पास बादल फटने से अचानक बाढ़ (Flash Flood) आ गई। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नुकसान पहुंचा है।
पहाड़ी इलाकों में बादल फटने के बाद अचानक तेज बहाव के साथ पानी आया और कई जगहों पर भूस्खलन (Landslide) की स्थिति बन गई। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 14 अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की सूचना मिली, जिसके बाद स्थानीय नालों में पानी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया। देखते ही देखते कई इलाकों में तबाही का मंजर दिखाई देने लगा।
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Jammu Kashmir Cloudburst: राजौरी में बह गया मुख्य बस स्टैंड, गाड़ियां और घर भी तबाह
बादल फटने का सबसे ज्यादा असर राजौरी जिले के कई हिस्सों में देखने को मिला। तेज बहाव वाली बाढ़ के पानी में मुख्य बस स्टैंड पूरी तरह बह गया। इसके अलावा कई गाड़ियां भी सैलाब के पानी के साथ बह गईं। कई रिहायशी घर या तो पूरी तरह बह गए या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।
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इस प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) में चार लोगों की जान चली गई। राजौरी के राजधानी पंचायत इलाके में तबाही का असर सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। यहां मकानों के साथ खेती और कृषि योग्य जमीन भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गई। वहीं पहाड़ी इलाकों में जगह-जगह भूस्खलन होने से रास्ते भी बाधित हो गए।
6 लोगों के परिवार का घर बहा, सरकारी स्कूल में ली शरण
राजधानी इलाके में एक छह सदस्यीय परिवार का घर पूरी तरह बाढ़ में बह गया। परिवार ने अपना घर और सामान खो दिया, जिसके बाद उन्हें सरकारी स्कूल में शरण लेनी पड़ी। अचानक आई बाढ़ ने परिवार को संभलने तक का मौका नहीं दिया और पूरा घर तेज पानी में बह गया।
एक मीडिया एजेंसी से बात करते हुए स्थानीय युवक अब्दुल गनी ने इस भयावह घटना का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 19 तारीख की रात करीब 3 बजे से 3:45 बजे के बीच बादल फटने के बाद इलाके में बाढ़ आ गई। इस दौरान उनका घर भी बह गया। स्थानीय चौकीदार ने घटना की रिपोर्ट दर्ज की और लोगों को इसकी जानकारी दी।
नदी की दहाड़ और पत्थरों की आवाज सुनकर बाहर निकले लोग
अब्दुल गनी के मुताबिक, हालात इतने खराब थे कि कोई उन तक पहुंच नहीं सका। परिवार के सभी लोग उस समय घर के अंदर मौजूद थे। अचानक उन्हें नदी की तेज दहाड़ और लुढ़कते पत्थरों के टकराने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद उन्होंने किसी तरह घर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
घर पूरी तरह बह जाने के बाद परिवार के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची, इसलिए उन्होंने सरकारी स्कूल में शरण ली। अब्दुल ने बताया कि इस आपदा में उन्होंने अपना घर पूरी तरह खो दिया है।
स्थानीय लोगों में डर, ऐसी बाढ़ पहले नहीं देखी
राजौरी के स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने इलाके में इतनी डरावनी और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) पहले कभी नहीं देखी थी। लोगों में पहाड़ी इलाकों में लगातार बने हुए भारी बारिश (Heavy Rainfall), अचानक बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है।
19 जुलाई को हुई इस आपदा ने राजौरी में भारी तबाही मचाई है। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, सड़कें, गाड़ियां, घर और खेती की जमीन बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुई हैं। राजधानी इलाके में हुई इस तबाही ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों की बादल फटने, अचानक बाढ़ और खराब मौसम जैसी प्राकृतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता को सामने ला दिया है।
