Islamabad Talks: अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से चल रहा तनाव अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं और अब मामला निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर दोनों देशों की तरफ से बड़े संकेत सामने आ रहे हैं। जिसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के आगे एक बड़ी शर्त रखी है।
Islamabad Talks: ट्रंप ने साफ किया क्या होगा ‘सफल डील’ का मतलब
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ने पर सहमत हो जाता है, तो यही इस बातचीत की सबसे बड़ी सफलता मानी जाएगी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि “नो न्यूक्लियर वेपन नंबर वन” यानी सबसे पहली और अहम शर्त यही है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए।
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ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर एक अच्छी डील की बात करें तो उनके मुताबिक यह पहले से ही एक तरह का ‘रेजीम चेंज’ जैसा माहौल बन चुका है, लेकिन यह कभी उनकी आधिकारिक शर्त नहीं रही। उन्होंने दोहराया कि बिना परमाणु हथियार के समझौता ही 99 प्रतिशत समाधान है।
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जेडी वेंस पर बड़ी जिम्मेदारी, ट्रंप ने दी शुभकामनाएं
इस अहम बातचीत में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके सामने बहुत बड़ा काम है। इससे साफ है कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर कितना गंभीर है और वह किसी ठोस नतीजे की उम्मीद कर रहा है।
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वेंस को भरोसा, अच्छे नतीजे की उम्मीद
इससे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इस वार्ता से अच्छा नतीजा निकलेगा। वेंस ने यह भी साफ किया कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करता है तो अमेरिका भी उसी तरह जवाब देगा।
हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान इस बातचीत को हल्के में लेने या अमेरिका को ‘खेलने’ की कोशिश करता है, तो अमेरिकी टीम इसके लिए तैयार है। वेंस के मुताबिक वार्ता में शामिल टीम को राष्ट्रपति की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं और उसी के तहत बातचीत आगे बढ़ेगी।
क्या निकल पाएगा कोई ठोस हल
इन तमाम बयानों से साफ है कि इस बार की बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि बेहद अहम है। एक तरफ अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है, तो दूसरी तरफ ईरान के रुख पर सबकी नजर है। अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता क्या सच में तनाव खत्म करने का रास्ता खोलती है या फिर टकराव और गहरा जाता है।
