Iran Protest: मौजूदा वक़्त में मिडिल ईस्ट एक बार फिर उबाल पर है। ईरान में जारी भयंकर विरोध प्रदर्शनों, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनियों, इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों और भारत सहित कई देशों की ट्रैवल एडवाइजरी ने यह स्पष्ट रूप से संकेत दे दिए हैं कि हालात साधारण नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इसे सिर्फ आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि एक बड़े ‘जियोपॉलिटिकल’ खेल का अहम मान रहे हैं।
Iran Protest: ईरान में विरोध प्रदर्शन और बढ़ती हिंसा
ईरान के 70 से ज्यादा शहरों में बीते कई दिनों से जमकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। लेटेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार, इन प्रदर्शनों में हिंसा बढ़ गयी है, जिसमें अब तक लगभग 15 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। (Iran Protest) आर्थिक बदहाली, महंगाई, बेरोजगारी और निरंतर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने आम ईरानी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि लंबे वक़्त से दबाव में चल रही ईरानी अर्थव्यवस्था अब रक बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
Also Read –Chandauli: चंदौली नौगढ़ ब्लॉक सभागार में खंड विकास अधिकारी अमित कुमार का भावपूर्ण विदाई समारोह
खामेनेई के देश छोड़ने की अटकलें तेज
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई हालात बिगड़ने पर तेहरान छोड़कर रूस के मॉस्को जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक इमरजेंसी कंटिन्जेंसी योजना बनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत खामेनेई अपने करीबी सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ देश छोड़ सकते हैं। (Iran Protest) हालांकि, ईरान सरकार और उसके दूतावास ने इन खबरों को पूर्ण रूप से फर्जी और प्रोपेगेंडा करार दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब आधिकारिक खंडन बार-बार किया जाए, तो सवाल खुद ब खुद आप खड़े हो जाते हैं।
- Advertisement -
ट्रंप की धमकियां और अमेरिकी रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हैं, तो अमेरिका आगे आकर हस्तक्षेप कर सकता है। (Iran Protest) यह बयान ऐसे वक़्त में सामने आया है, जब अमेरिका पहले ही वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन से संबंधित घटनाक्रम के बाद बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका की रणनीति सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन देशों को निशाना बना रहा है जो डॉलर आधारित व्यवस्था से बाहर जाकर तेल और संसाधनों का व्यापार कर रहे हैं।
तेल, करेंसी और ‘रेयर अर्थ’ की लड़ाई
ईरान और वेनेजुएला लंबे वक़्त से चीन को उसकी मुद्रा में तेल सप्लाई करते रहे हैं। यही बात अमेरिका को खटकती रही है। दूसरी तरफ, अमेरिका को रेयर अर्थ मिनरल्स की सख्त आवश्यकता है, जिन पर आज तक चीन का वर्चस्व माना जाता रहा है। (Iran Protest) ऐसे में ईरान पर दबाव बनाकर न सिर्फ मिडिल ईस्ट में संतुलन बदलने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि चीन की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को भी कमजोर करने की योजना भी साफ़ नज़र आ रही है।
इजराइल की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
बता दे, इजराइल ईरान को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा संकट मानता है। हाल के महीनों में इजराइल द्वारा किए गए हमलों में ईरान की कई महत्वपूर्ण और बड़े सैन्य और सुरक्षा संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की खबरें आई हैं। (Iran Protest) ईरान की एलिट सिक्योरिटी फोर्स के कई बड़े कमांडर मार दिए गए, जिससे सत्ता की पकड़ कमजोर होने की अटकलें और भी तेज हो गईं।
भारत की ट्रैवल एडवाइजरी का क्या अर्थ ?
भारत सरकार ने ईरान के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए अपने नागरिकों को गैर-जरूरी तरीके से यात्रा से बचने की सलाह दी है। (Iran Protest) साथ ही, ईरान में रह रहे भारतीयों को दूतावास के संपर्क में रहने और अपना पंजीकरण अपडेट रखने को कहा गया है। कूटनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि जब स्थिति नियंत्रण में होती है, तब ऐसी एडवाइजरी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे यह संकेत मिल रहा है कि हालात आगामी कुछ ही दिनों में और बिगड़ सकते हैं।
क्या है ‘ईरान’ है अमेरिका का अगला बड़ा टारगेट?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का अगला बड़ा टारगेट ईरान हो सकता है, हालांकि यह वेनेजुएला जितना आसान नहीं होगा। ईरान सैन्य, वैचारिक और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से कहीं अधिक मजबूत देश है, जो कि अमेरिका ऐसा कुछ सोच नहीं सकता। लेकिन आर्थिक रूप से दबाव, प्रतिबंध, आंतरिक असंतोष और बाहरी हस्तक्षेप किसी भी सरकार के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
बता दे, ईरान की मौजूदा स्थिति सिर्फ एक देश का आंतरिक संकट ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है। (Iran Protest) अब आगामी कुछ ही वक़्त में यह पूर्ण रूप से साफ हो जाएगा कि यह संकट शांत होगा है या फिर मिडिल ईस्ट एक और बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की तरफ बढ़ता है। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हुई हैं, और हर नया घटनाक्रम आने वाले बड़े तूफान का संकेत दे रहा है।
