India buys LPG from Iran 2026: मिडिल ईस्ट के सुलगते समंदर और युद्ध के धमाकों के बीच भारत की रसोई से एक ऐसी खबर आई है, जो हर आम आदमी के चेहरे पर मुस्कान ला देगी। पिछले कुछ हफ्तों से देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत ने हाहाकार मचा रखा था। (India buys LPG from Iran 2026) कहीं लोग लंबी लाइनों में खड़े थे, तो कहीं मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा था। लेकिन अब भारत ने एक ऐसा साहसी कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। (India buys LPG from Iran 2026) करीब 8 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत ने ईरान से सीधे गैस खरीदने का फैसला किया है। यह सिर्फ एक व्यापारिक डील नहीं है, बल्कि अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और इजरायल-ईरान जंग के बीच भारत का अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए खेला गया सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ है। आइए जानते हैं उस ‘सी बर्ड’ जहाज की कहानी जो चीन का रास्ता छोड़ भारत की ओर मुड़ गया है।
India buys LPG from Iran 2026: 8 साल का सूखा खत्म और अमेरिका को कड़ा संदेश
भारत ने आखिरी बार जून 2018 में ईरान से गैस खरीदी थी, जिसके बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार लगभग ठप हो गया था। लेकिन मौजूदा संकट इतना गहरा था कि भारत को अपने पुराने दोस्त ईरान की ओर हाथ बढ़ाना ही पड़ा। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (IOC) ने भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ मिलकर यह ऐतिहासिक डील की है। इस बार भारत ने करीब 43 हजार टन एलपीजी (ब्यूटेन और प्रोपेन) खरीदी है। (India buys LPG from Iran 2026) हालांकि यह मात्रा भारत की सिर्फ आधे दिन की जरूरत पूरी करने के लिए काफी है, लेकिन मरते को तिनके का सहारा वाली कहावत यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है। संकट के इस दौर में ईरान से आई यह मदद भारत की रसोई को बुझने से बचाने के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करेगी।
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चीन जा रहा जहाज अचानक मुड़ा भारत की ओर
इस पूरी डील में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब ‘सी बर्ड’ (Sea Bird) नाम का विशालकाय जहाज, जो ईरान से गैस लेकर चीन की ओर जा रहा था, अचानक समंदर के बीचों-बीच अपनी दिशा बदल बैठा। जानकारी के मुताबिक, भारत की इमरजेंसी डिमांड को देखते हुए इस जहाज को भारत की ओर डायवर्ट किया गया। आज गुरुवार को यह जहाज मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालने वाला है। (India buys LPG from Iran 2026) यह भारत की कूटनीतिक जीत ही है कि युद्ध के हालातों के बीच भी भारत ने अपने लिए सुरक्षित रास्ता और सप्लाई सुनिश्चित कर ली है। मिडिल ईस्ट की जंग की वजह से जब ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) जैसा अहम रास्ता बंद होने की कगार पर है, तब भारत का यह कदम देश में गैस की कीमतों को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
भारत अपनी एलपीजी की करीब दो-तिहाई जरूरत विदेशों से आयात करके पूरी करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। युद्ध के कारण जब सप्लाई चेन टूटने लगी, तो देश में सिलेंडरों के लिए मारामारी शुरू हो गई। (India buys LPG from Iran 2026) कई शहरों में सिलेंडर के दाम ब्लैक में वसूले जा रहे थे और आम जनता परेशान थी। इसी किल्लत को खत्म करने के लिए भारत अब दो और बड़ी खेप लाने की तैयारी में है, जिन पर बातचीत अंतिम चरण में है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति दिखाती है कि देश के हितों के लिए भारत किसी भी वैश्विक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
रसोई के बजट और भविष्य की रणनीति पर असर
होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव ने दुनिया को यह अहसास करा दिया है कि अगर समंदर के ये रास्ते बंद हुए, तो दुनिया भर में चूल्हे ठंडे हो सकते हैं। भारत ने ईरान से गैस खरीदकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक रास्तों और पुराने रिश्तों को दोबारा जिंदा करने से पीछे नहीं हटेगा। (India buys LPG from Iran 2026) मैंगलोर पोर्ट पर आज पहुंचने वाली यह गैस सप्लाई चेन के उस दबाव को कम करेगी जिसने पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल और गैस वितरण प्रणाली को जाम कर रखा था। अब देखना यह होगा कि ईरान के साथ शुरू हुआ यह दोबारा व्यापारिक रिश्ता आने वाले समय में भारत और अमेरिका के संबंधों पर क्या असर डालता है।
