Congress: बिहार की राजनीति और महाराष्ट्र के हालिया निकाय चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस के भीतर एक नई बहस और बेचैनी को जन्म दे दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के बढ़ते प्रभाव और कांग्रेस की रणनीतिक चुप्पी को लेकर पार्टी के भीतर, खासकर मुस्लिम नेताओं के बीच, असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। बिहार विधानसभा चुनाव और मुंबई नगर निगम जैसे अहम चुनावी नतीजों ने कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
कांग्रेस के कई मुस्लिम नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर और स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो मुस्लिम मतदाता धीरे-धीरे AIMIM की ओर पूरी तरह शिफ्ट हो सकते हैं। इसका उदाहरण पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनावों में देखने को मिला। (Congress) मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों में से एनडीए ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन को केवल 5 सीटें मिलीं। वहीं, ओवैसी की AIMIM ने अकेले 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इसी तरह, इस साल हुए मुंबई नगर निगम चुनावों में AIMIM ने 8 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को मात्र 24 सीटों से संतोष करना पड़ा। वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई का कहना है कि अगर कांग्रेस ने मजबूती से मैदान संभाला होता, तो ये 8 सीटें पार्टी के खाते में जा सकती थीं।
इस असंतोष के बीच पार्टी के भीतर बयानबाजी भी तेज हो गई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के लोकसभा व्हिप माणिक्यम टैगोर ने आलोचना करने वाले नेताओं को “जयचंद” कहकर पार्टी विरोधी करार दिया। (Congress) वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए उन्हें असुरक्षित और डरा हुआ नेता बताया। शकील अहमद, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस छोड़ दी थी, का आरोप है कि पार्टी मुस्लिम नेताओं और मुद्दों को इसलिए नजरअंदाज कर रही है क्योंकि उसे हिंदू मतदाताओं के नाराज होने का डर है। पूर्व राज्यसभा सांसद राशिद अल्वी ने भी कहा कि गुलाम नबी आजाद और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने की एक बड़ी वजह यही है कि कांग्रेस में मुस्लिम नेतृत्व की भूमिका लगातार सीमित होती जा रही है।
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पार्टी के भीतर राहुल गांधी की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी अपने भाषणों में अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी का जिक्र तो करते हैं, लेकिन ‘मुस्लिम’ शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हैं। (Congress) वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने भी गठबंधन बैठकों में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे मामलों पर कांग्रेस से बोलने का सुझाव दिया था, लेकिन पार्टी ने चुप्पी बनाए रखी।
उत्तर प्रदेश के एक कांग्रेस नेता ने दोहरे मापदंडों का आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर या धार्मिक मुद्दों पर पार्टी मुखर हो जाती है, लेकिन मॉब लिंचिंग या मुस्लिमों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर शीर्ष नेतृत्व खामोश रहता है। (Congress) हालांकि, पार्टी के सभी नेता इस आलोचना से सहमत नहीं हैं। (Congress) महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मुस्लिम एआईसीसी नेता का तर्क है कि कांग्रेस अगर खुलकर मुस्लिम पार्टी के रूप में सामने आती है, तो भाजपा को इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिलेगा। उनके अनुसार, नपी-तुली चुप्पी ही दीर्घकाल में पार्टी और मुस्लिम समुदाय—दोनों के हित में है।
फिलहाल कांग्रेस एक कठिन वैचारिक दौर से गुजर रही है। एक ओर उसे अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान बचानी है, तो दूसरी ओर AIMIM उसके पारंपरिक वोट बैंक में लगातार सेंध लगा रही है। (Congress) पार्टी के मुस्लिम नेताओं का साफ संदेश है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया, तो वह इस समुदाय का राजनीतिक नेतृत्व खो सकती है।
