Bangladesh elections 2026: बांग्लादेश की सत्ता किसके हाथ जाएगी… इसका आधिकारिक फैसला कुछ समय बाद हो जाएगा। यह चुनाव सिर्फ बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि भारत के लिए भी बेहद अहम है। वजह साफ है क्योंकि दोनों देशों के बीच 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा, जो भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे बड़ी सीमा है। ऐसे में बांग्लादेश में बनने वाली सरकार का असर सीधे भारत की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ने वाला है।
Bangladesh elections 2026: सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल
अगर सरकार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की बने या जमात-ए-इस्लामी की, भारत के सामने कई बड़े सवाल खड़े हैं। सीमा के कई हिस्सों पर आज भी बाड़ नहीं है। (Bangladesh elections 2026) इन इलाकों से गैर-कानूनी घुसपैठ, जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार और नकली नोटों की आवाजाही होती रही है। भारत के लिए यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।
बांग्लादेश की स्थिरता क्यों जरूरी
अधिकारियों का साफ कहना है कि भारत को एक मजबूत और स्थिर बांग्लादेश चाहिए। स्थिर सरकार का मतलब है सीमाओं पर बेहतर तालमेल और लगातार संवाद। (Bangladesh elections 2026) भारत को इस बात की भी चिंता है कि अगर हालात बिगड़े तो आतंकी तत्व सीमा का फायदा उठा सकते हैं। इसलिए नई सरकार का रुख भारत के लिए बेहद मायने रखेगा।
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यूनुस का दौर और बढ़ती गतिविधियां
चिंता की एक बड़ी वजह मुहम्मद यूनुस के शासन से जुड़ी मानी जा रही है। इस दौर में कई कट्टरपंथी और आतंकी तत्वों की रिहाई हुई। (Bangladesh elections 2026) साथ ही बांग्लादेश में ISI की गतिविधियों के सक्रिय होने की भी खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में भारत के खिलाफ हो सकता है।
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काउंटर टेररिज्म पर असर
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के समय भारत और बांग्लादेश के बीच काउंटर-टेररिज्म मजबूत आधार बना हुआ था। संयुक्त ऑपरेशन बिना रुकावट के चलते रहे। (Bangladesh elections 2026) भारत चाहेगा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई नई सरकार भी इसी संतुलन को बनाए रखे।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और रिश्तों की कसौटी
भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए बांग्लादेश एक अहम कड़ी है। हसीना के दौर में व्यापार, ऊर्जा सहयोग और बिजली के लेन-देन में बड़ी प्रगति हुई थी। (Bangladesh elections 2026) विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर राजनीतिक अस्थिरता आई तो 1971 से अब तक बनी रणनीतिक साझेदारी को भारी नुकसान हो सकता है।
BNP और जमात की बदली तस्वीर
भारत को उम्मीद है कि बीएनपी की सरकार बनने पर संवाद आसान रहेगा। हालांकि अधिकारी यह भी मानते हैं कि जमात के सत्ता में आने पर रिश्ते पूरी तरह टूटेंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा। (Bangladesh elections 2026) फर्क बस इतना है कि अब बीएनपी और जमात सहयोगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी हैं। ऐसे में आने वाले नतीजे सिर्फ सरकार नहीं, पूरे क्षेत्र की दिशा तय करेंगे।
