Ali Khamenei Security: ईरान की धरती इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है और सत्ता के गलियारों में मौत जैसा सन्नाटा पसरा है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके ही देश से घसीटकर अमेरिका ले जाने की घटना ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की रातों की नींद हराम कर दी है। तेहरान की सड़कों पर ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ के नारे गूंज रहे हैं और दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलेआम चेतावनी दे दी है कि वे प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। (Ali Khamenei Security) इसी बीच ब्रिटिश मीडिया से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। दावा किया जा रहा है कि 86 वर्षीय खामेनेई ने अपना बोरिया-बिस्तर बांध लिया है और हालात बिगड़ने पर वे रूस भागने की तैयारी कर चुके हैं। क्या वाकई दुनिया का सबसे ताकतवर धार्मिक नेता अब अपनी जान बचाने के लिए मॉस्को की शरण लेगा?
Ali Khamenei Security: खामेनेई का ‘एग्जिट प्लान’ और मॉस्को की ओर नजरें
एक ताजा रिपोर्ट ने दावा किया है कि अगर ईरान के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के सामने घुटने टेक दिए या सेना में बगावत हुई, तो खामेनेई देश छोड़ देंगे। (Ali Khamenei Security) रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई ने अपने 20 सबसे करीबी सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ मॉस्को भागने की गुप्त योजना तैयार की है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब ईरान में विरोध प्रदर्शनों की आग फिर से भड़क उठी है। (Ali Khamenei Security) हालांकि यह विरोध अभी 2022 के महसा अमीनी आंदोलन जितना बड़ा नहीं है, लेकिन वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद खामेनेई को डर है कि कहीं अमेरिकी कमांडो तेहरान के महल में घुसकर उन्हें भी अगवा न कर लें। तेहरान के सत्ता गलियारों में अब सिर्फ एक ही चर्चा है—क्या कोई विदेशी ताकत खामेनेई को छूने की हिम्मत कर सकती है?
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कौन है खामेनेई की जान का पहरेदार?
भले ही खामेनेई के भागने की खबरें गर्म हों, लेकिन उनकी सुरक्षा का घेरा तोड़ना किसी भी देश के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है। खामेनेई की हिफाजत की जिम्मेदारी किसी आम सेना के पास नहीं, बल्कि ‘सिपाहे वली-ए-अम्र’ (Sepah-e Vali-ye Amr) के पास है। (Ali Khamenei Security) यह ईरान की सबसे खतरनाक और रहस्यमयी यूनिट है, जो सीधे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के तहत आती है। ‘वली-ए-अम्र’ का मतलब होता है ‘आदेश देने वाले की सेना’। इस यूनिट में करीब 12,000 ऐसे जांबाज सिपाही शामिल हैं जिन्हें दुनिया की सबसे कठिन ट्रेनिंग दी जाती है। इनका एकमात्र मकसद है—सुप्रीम लीडर की जान की कीमत पर रक्षा करना।
सिर्फ गनमैन नहीं, मौत के सौदागर हैं ये 12,000 जवान
वली-ए-अम्र के ये जवान सिर्फ हथियार चलाने में उस्ताद नहीं हैं, बल्कि ये साइबर वॉरफेयर, जासूसी और आंतरिक खतरों को सूंघने में भी माहिर हैं। 2022 में इस यूनिट की कमान ब्रिगेडियर जनरल हसन मशरुईफर को सौंपी गई थी। (Ali Khamenei Security) यह बल इतना ताकतवर है कि अगर तेहरान की सड़कों पर गृहयुद्ध जैसे हालात भी बन जाएं, तो यही यूनिट सत्ता के नियंत्रण को अपने हाथ में रखने की ताकत रखती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के लिए वेनेजुएला जैसा ऑपरेशन ईरान में दोहराना नामुमकिन के बराबर है, क्योंकि वली-ए-अम्र का हर जवान खामेनेई के लिए आत्मघाती हमलावर बनने को तैयार रहता है।
